पंजाब के अम्बाला में पली बढ़ी परिणीति चोपड़ा ने अपने बचपन के कई साल अंबाला कैंट एरिया में आर्मी परिवार के बीच बिताए हैं। देशभक्ति और जवानों का बलिदान, यह बातें परिणीति के लिए कुछ ऐसी यादें हैं, जो उन्हें हमेशा इमोशनल कर देती है। फिलहाल देश में पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के बाद सभी लोग देश और देश भक्ति पर बातें करने में पीछे नहीं, ऐसे में परिणीति के मुताबिक उनके लिए देश भक्ति एक ऐसा विषय है, जो उनके दिल के काफी करीब है। कारगिल युद्ध के दौरान अंबाला में रहने वाली परिणीति ने देशभक्ति से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसे बताते हुए खुद उनकी आंखें भी नम हो गई।

जब कारगिल से ट्रक भर कर आते थे शहीदों के शव

उनकी आने वाली फिल्म केसरी भी देशभक्ति पर आधारित है

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कारगिल का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लड़े गए सबसे चर्चित युद्ध में से एक है। 1999 की इस लड़ाई के समय परिणीति चोपड़ा सिर्फ 11 साल की थी। उस दौरान अम्बाला में रहती परिणीति को उन दिनों की याद आज भी ताज़ा है। उस दौरान के देश के माहौल, शहीदों के बलिदान और आम लोगों की जिंदगी को बहुत करीब से देख चुकी परिणीति का मानना है कि युद्ध के दौरान के जीवन को वही लोग बेहतर समझ सकते हैं, जिन्होंने इसको बहुत नज़दीक से देखा हो। आज भी परिणीति उन दिनों को नहीं भूल पाती जब अम्बाला में ट्रक भर के शवों को लाया जाता था। आंखें नम कर परिणीति बताती हैं, “ मेरा स्कूल आर्मी कैंट एरिया के पास ही था। मैं स्कूल आते जाते देखती थी कि ट्रक भर भर के बक्से जाते थे। वो ट्रक पीछे से खुले होते थे। उन ट्रक के अंदर सिर्फ शवों के डिब्बे होते थे, आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हर ट्रक में 9 या 10 बॉड़ीज होती थी और उन ट्रक का काम था कि हर घर पर बॉडीज़ की डिलीवरी करना। हमको इतना बुरा लगता था कि वहां इतने लोग मर रहे है कि इतने सारे लोग तो सिर्फ अंबाला से ही थे, तो अंबाला से कुछ दूर कारगिल में यह ज़िंदगी चल रही है और यहां लाइफ कितनी नॉर्मल है। इसलिए मेरा जो भी एसोसिएशन है आर्मी से वो काफी इमोश्नल है। इसलिए मैं बहुत जल्दी इस मुद्दे पर बात नहीं करती।”

लड़ाई बहुत सारे बलिदान मांगती है

परिणीति की फिल्म केसरी भी सारागढ़ी की लड़ाई पर है

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हाल ही में हुई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ लोग भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने की बातों को सोशल मीडिया पर बढ़ चढ़ कर लिख रहे थे। परिणीति का मानना है कि वह कभी भी इस बात के पक्ष में नहीं है कि दो देशों के बीच युद्ध हो। हालांकि परिणीति का यह भी मानना है कि वह खुद को इतना महत्वपूर्ण नहीं समझती कि वह इन मुद्दों पर अपनी राय रखें, लेकिन फिर भी वह ज़रूर कहती हैं कि दो देशों के बीच युद्ध नहीं होना चाहिए। परिणीति के मुताबिक, “लोगों के लिए जवान सिर्फ वहीं फिल्मी जवान ही है, जिसे वह फिल्मों में देखते है। बचपन से जवानों को अपने इर्द गिर्द देखने वाली परिणीति के मुताबिक देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ क़ुर्बान कर देते इन जवानों के जैसा वाकई में कोई नहीं। सोशल मीडिया पर युद्ध और युद्ध की बात करने लोगों को परिणीति का कहना है, “ लोग सोशल मीडिया पर इसलिए लिख रहे हो क्योंकि उनको जाकर नहीं लड़ना है। मेरे पिता को जाना पड़ेगा। क्या आप के पापा आर्मी में होते तो आप कभी युद्ध के बारे में नहीं बोलोगे, मेरे पापा आर्मी में है इसलिए मैं कभी नहीं बोलूंगी। क्योंकि मुझे पता है कि युद्ध हुआ तो मेरे पापा जाएंगे या मेरा भाई, मेरा पति या मेरा बेटा जाएगा। इसलिए सोशल मीडिया पर लिखना आसान है। ताज अटैक की बात आए तो सब इमोश्नल हो जाते है क्योंकि वो मुंबई में हुआ था। सबने देखा था, लेकिन हमने ये चीज़े कितने सालों से देखी है क्योंकि हम इसी में पले बढ़े है। इसलिए जब हमसे कहा जाता है ना कि हम क्यों नहीं बोल रहे है तो उसके पीछे कई कारण है। हमारे साथ कई लोगों की कई यादें जुड़ी होती हैं, तो ज़रुरी नहीं कि हम हर बार इन मुद्दों पर बोले ही।

फिल्म केसरी के साथ बड़े परदे पर आ रही परिणीति की यह फिल्म भी देश भक्ति से जुड़ी है। दरअसल, यह फिल्म 1897 में सारागढ़ी में 10,000 अफगानियों और 21 सिक्खों के बीच लड़े गए युद्ध की कहानी है। फिल्म में परिणीति बहुत ही छोटी भूमिका निभा रही हैं, लेकिन देशभक्ति की इस कहानी का हिस्सा बनने के कारण उन्होंने इस फिल्म के लिए हां कर दी। केसरी 21 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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