पागलपंती की बेसर पैर की कॉमेडी दर्शकों को हंसाएगी लेकिन फ़िल्म में कहानी ढूंढ़ने की अगर कोशिश की तो लोगों को निराशा ही हाथ लगेगी। अनीस बज़मी निर्देशित इस फ़िल्म में कई सितारें हैं। इस फ़िल्म में कॉमेडी के तड़के के साथ देश भक्ति की बात और नीरव मोदी की कहानी को जोड़ा हुआ हैं।अनीस क्लीन कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में ये फ़िल्म फैमिली ऑडियंस को अपनी तरफ आकर्षित करेगी।

फ़िल्म की कहानी

फ़िल्म के डायलॉग अनीस बाज़मी ने लिखे है
फ़िल्म के डायलॉग अनीस बाज़मी ने लिखे है

फ़िल्म कहानी हैं राज किशोर (जॉन अब्राहम) और उसके दो दोस्त अरशद वारसी (जंकी) और पुलकित सम्राट (चंदू) की। राज पर साढ़ेसाती चल रही है, वह भारत में एक बैंक में नौकरी करता है, जिसका पैसा नीरज मोदी (इनमूलहक़) लेकर रफूचक्कर हो जाता है । साढ़ेसाती होने की वजह से सारा कसूर राजकिशोर के सर आता है। वह अपना करियर बनाने लंदन आ जाता है और वहां दो दोस्तों के साथ काम की शुरुआत करता है, लेकिन साढ़ेसाती भारी होने की वजह से वो जिस भी काम में वह हाथ डालता है वह डूब जाता हैं। उसकी अच्छी नीयत और इमानदारी आखिर में उसे हीरो बना देती है और उसके इस हीरो बनने की जर्नी में उसके और उसके दोस्तों की सारी पागलपंती की कहानी है फिल्म पागलपंती। इस पागलपंती में डॉन , उसका पैसा,पैसो की चोरी कुछ ऐसी सिचुएशंस है जो कॉमेडी क्रिएट करती हैं।

कलाकारों का अभिनय

फिल्म 165 मिनट की है
फिल्म 165 मिनट की है

कलाकारों की अगर बात करें बात करें, तो इस फिल्म में सितारों की भरमार है। जॉन अब्राहिम, अरशद वारसी, पुलकित सम्राट, कीर्ति खरबंदा, इलियाना डिक्रूज उर्वशी रौतेला के साथ-साथ सौरभ शुक्ला और अनिल कपूर जैसे कई दिग्गज कलाकार होने की वजह से, किसी एक एक्टर को फिल्म का क्रेडिट नहीं दिया जा सकता। अरशद वारसी की कॉमेडी बेहतरीन है, वह अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते हैं जहां तक जॉन की बात है, उनके हिस्से कॉमेडी के साथ साथ कुछ हीरोइक सीन भी आए हैं। हीरोइनों की अगर बात की जाए तो फिल्म में कृति का काम बाकी दो हीरोइनों से ज्यादा है। इलियाना और उर्वशी थोड़े समय के लिए फिल्म में है लेकिन कृती ज्यादा समय के लिए दिखाई देती है। हालांकि इस फिल्म में हीरोइनों के लिए बहुत कुछ करने को नहीं है।

आखिर आपको पागलपंती देखनी चाहिए या नहीं

आपको कॉमेडी पसंद है तो ही देखें
आपको कॉमेडी पसंद है तो ही देखें

अगर आप बेसिरपैर की कॉमेडी पसंद करते हैं और आपको हाउसफुल जैसी फिल्में पसंद आती है, तो यह फिल्म आपके लिए है। लेकिन अगर आप एंटरटेनमेंट के नाम पर ऐसी बेहूदा कॉमेडी पसंद नहीं करते तो यह फिल्म आपका दिमाग खराब कर सकती है। फिल्म का फर्स्ट हाफ फिर भी देखने और झेलने लायक है, लेकिन सेकंड हाफ फिल्म को बोर करता है। फिल्म में कॉमेडी के साथ देशभक्ति और नीरव मोदी की कहानी को जिस तरह पिरोया गया है। वह फिल्म में काफी हास्यास्पद लगता है। सिंह इज़ किंग, रेडी और वेलकम जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके अनीस से दर्शकों की उम्मीदें ज्यादा होती है ऐसे में यह फिल्म उन उम्मीदों पर बिल्कुल खरी नहीं उतरती। संगीत के नाम पर पुराने गीतों का जो रीमिक्स किया गया है सिर्फ वही गीत एंटरटेन करते हैं। कोई भी ओरिजिनल गीत आपको इस फ़िल्म में पसंद नहीं आएगा।

Aawaz.Com इस फ़िल्म को 2 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।