ऑस्कर एक ऐसा अवार्ड, जिसके नॉमिनेशन में भारतीय फिल्मों के नाम देख कर हम खुश हो जाया करते थे, लेकिन आज आखिरकार ये अवार्ड भारत आ चुका है। 91वें एकेडमी अवॉर्ड्स या कहें ‘ऑस्कर’ 2019 में भारत ने अपने नाम एक अवार्ड हासिल किया है। भारतीय प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा, जिन्होंने ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ और ‘मसान’ जैसी फ़िल्में प्रोड्यूस की हैं, उन्हें ‘बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट’ कैटेगरी में फिल्म ‘पीरियड्स- एन्ड ऑफ़ द सेंटेंस’ के लिए ऑस्कर दिया गया है। इस साल कुल 24 अलग-अलग कैटेगरी में ऑस्कर दिए गए। गुनीत के अलावा इस अवार्ड को जीतने वाले लोगों की फेहरिस्त काफी लम्बी है। जिसमें फिल्म ‘फ्री सोलो’ ने बेस्ट डाक्यूमेंट्री फीचर का अवार्ड जीता है।

क्या है पीरियड्स- एंड ऑफ़ सेंटेंस की कहानी?

दरअसल इस शार्ट फिल्म की कहानी भारत की पृष्ठभूमि पर बनाई गई है, जहां आज भी गांव में महिलाओं के पीरियड्स यानी मासिक धर्म को एक बीमारी के तौर पर देखा जाता है। यह कहानी है दिल्ली के पास हापुड़ में बसी महिलाओं की, जो इस रूढ़िवाद के खिलाफ आवाज़ उठाती हैं। इस शॉर्ट फिल्म का ट्रेलर बेहद दमदार है, जो आपको कई सालों से चली आ रही इस रुढ़िवाद परम्पराओं के विरुद्ध सोचने पर मजबूर कर सकता है। यह शॉर्ट फिल्म नेटफ्लिक्स ओरिजिनल की डॉक्यूमेंट्री है, जिसने आते ही लोगों के दिलों में घर कर लिया था। आज सोशल मीडिया से लेकर वेब जगत में इस फिल्म का बोलबाला है। बता दें कि ऑस्कर्स में इस फिल्म का मुकाबला ब्लैक शीप, एंड गेम, लाइफबोट और अ नाइट एट द गार्डन के साथ था। आप भी देखिये इस शॉर्ट फिल्म का ये ट्रेलर।

वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

बिना किसी होस्ट के हो रहा है कार्यक्रम

इस साल के अवार्ड्स की ख़ासियत ये है कि 30 सालों बाद यह कार्यक्रम को बगैर किसी होस्ट के हो रहा है। इस कार्यक्रम को पहले कॉमेडियन केविन हार्ट होस्ट करने वाले थे, लेकिन समलैंगिकता और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ किए गए उनके ट्वीट्स के कारण जो विवाद हुआ, उसे देखते हुए उन्हें कार्यक्रम को होस्ट करने से रोक दिया गया।

इन लोगों के नाम हुआ ऑस्कर

इस साल लेडी गागा को उनके करियर का पहला ऑस्कर मिला

इस साल फिल्म ‘द ग्रीन’ को बेस्ट फिल्म का अवार्ड दिया गया, जहां दूसरी ओर रैमी मैलक ने फिल्म ‘बोहेमियन रैप्सॉडी’ के लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड जीता। इसी चरण में बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड फिल्म ‘द फेवरिट’ के लिए ‘ओलिविया कोलमेन’ को दिया गया।

यह साल लेडी गागा के लिए बेहतरीन साबित हुआ। क्योंकि इस साल लेडी गागा को उनके करियर का पहला ऑस्कर मिला। उन्हें ये अवार्ड फिल्म ‘ए स्टार इज बार्न’ में दिए ओरिजिनल गाने शैलो के लिए दिया गया।

जब ऑस्कर में भारत ने दर्शाई अपनी उपस्थिति

ऑस्कर में भारत का नाम सबसे पहले साल 1983 में चर्चा में आया था, जब फिल्म गांधी के लिए भानु अथैया तो बेस्ट कॉस्टयूम डिज़ाइन के लिए इस अवार्ड से नवाज़ा गया। इस फिल्म के बाद फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के लिए भारतीय लिए ए आर रहमान और गुलज़ार को ऑस्कर से नवाज़ा गया था। ये पहली बार नहीं जब भारत ने अपनी मौजूदगी इस अवार्ड कार्यक्रम में अंकित करवाई है। भारत के महान डायरेक्टरों में से एक सत्यजीत रे को 1992 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ऑस्कर से नवाज़ा गया था। हालांकि अपनी खराब सेहत की वजह से वे इस अवार्ड को लेने नहीं जा सके, लेकिन उन्होंने इस अवार्ड को मिलने की ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए एक्सेप्टेंस स्पीच दी थी।

 

इससे पहले कई फ़िल्में ऑस्कर में नॉमिनेट हो चुकी हैं। इन फिल्मों में साल 1957 में आई मदर इंडिया, 1988 में आई सलाम बॉम्बे, 2001 में लगान जैसी फिल्में मुख्य है जिन्हें टॉप 5 में जगह मिली। आपको जान कर हैरानी होगी कि फिल्म मदर इंडिया सिर्फ एक वोट से एक इटालियन फिल्म से हार गई थी। साल 2006 में भी ऑस्कर के लिए राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म रंग दे बसंती को भेजा गया था, लेकिन इसे नांमांकन नहीं मिला। भारत में काफी पसंद की गई फिल्म लगे रहो मुन्ना भाई को भी ऑस्कर के लिए फ्री एन्ट्री के तौर पर भेजा गया था, लेकिन इसे भी नामांकित नहीं किया गया। इस साल रीमा दास की आसामीस फिल्म ‘विलेज रॉक स्टार्स’ को भारत की ओर से बेस्ट फॉरेन केटेगरी फिल्म के लिए भेजा गया लेकिन यह फिल्मं टॉप 5 में जगह नहीं बना पाई।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..