भारत का एक ऐसा स्वतंत्रता सेनानी जिसकी ज़िंदगी के कई रहस्य का पता कोई नहीं लगा पाया, ऐसे सुभाष चन्द्र बोस की जन्म शताब्दी पर उन हिन्दी फिल्मों का ज़िक्र लाज़मी है, जिसने उनके किरदार को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। इस स्वतंत्रता सेनानी पर भारतीय भाषा में कई फिल्में बनी है। हर फिल्म में उनकी ज़िंदगी के कुछ ना कुछ पहलू से लोगों को रुबरु कराने की कोशिश की गई। 23 जनवरी 1897 में जन्मे बोस को अगर आप भी कुछ जानना चाहते है, तो आप हमारी बताई गई फिल्मों को देख सकते हैं। इस बात का दावा नहीं है कि आप इन फिल्मों को देख कर इस क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी को जान जाएंगे, लेकिन यह उम्मीद ज़रुर है कि यह फिल्में शायद आपको उन्हें समझने में थोड़ी मदद करें।

जिस फिल्म ने इस एक्टर को ऊचाईयों तक पहुंचा दिया।


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सचिन खेडेकर ने फिल्म में मुख्य किरदार निभाया था

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श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द अनफोरगेटेबल हीरो में सचिन खेडेकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म को बोस की ज़िंदगी पर बनी बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जा सकता हैं। साल 2004 में बनी इस फिल्म में बोस की ज़िंदगी के 1941 से 1945 तक के सालों को दिखाया गया था, जो उन्होंने नाज़ी जर्मनी और जापान अधिकृत एशिया में बिताए थे। इस दौरान फिल्म को लेकर काफी विवाद हुए थे, यहां तक की फिल्म के कोलकाता प्रीमियर को भी कैंसल करना पड़ा था। फिल्म में सुभाष चंद्र की आस्ट्रेलियन लड़की से शादी और उनकी मृत्यु को लेकर बताई गई कुछ बातों पर कई पार्टीयों को एतराज़ था। हालांकि इन सब विवादों के बावजूद यह फिल्म लोगों को बेहद पसंद आई थी।

सुभाष चन्द्र बोस – 1966 में पीयूष बोस निर्देशित यह फिल्म सुभाष चन्द्र के बचपन से लेकर लीडर बनने की कहानी पर आधारित थी फिल्म में अमर दत्ता ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म को 1967 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

इस फिल्म के अलावा साल 2017 में रिलीज़ हुई फिल्म राग द्वेष में भी सुभाष चन्द्र बोस के किरदार को दिखाया गया था। तिग्मांशु धूलिया निर्देशित यह फिल्म पूरी तरह से उनकी ज़िंदगी पर आधारित नहीं थी, लेकिन फिल्म की कहानी में बोस का किरदार एक अहम हिस्सा ज़रुर था। दरअसल यह फिल्म 1944 में हुए इंडियन नेशनल आर्मी के तीन सैनिकों के ट्रायल्स पर आधारित थी। फिल्म में बोस की भूमिका कैन्नी बासुमात्रे ने निभाई थी। उनका फिल्म में छोटा ही सही, लेकिन अहम किरदार था।

बोस की मृत्यु के रहस्य को जब पर्दे पर दिखाया गया


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पहली बार इस पर वेब सीरिज़ बनाई गई।

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राजकुमार राव अभिनीत वेब सीरिज़ बोस डेड और अलाइव भी इंडियन नेशनल पार्टी के नेता सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु के रहस्य के इर्दगिर्द ही बनाई गई थी। इस सीरिज़ का निर्देशन हंसल मेहता ने किया था। इस सीरिज़ को एएलटी बालाजी पर दिखाया गया था। इस वेब सीरिज़ में मुख्य तौर पर उनकी मौत से जुड़े रहस्य को दिखाने की कोशिश की गई थी। इस सीरिज़ में राजकुमार राव के अभिनय की काफी तारीफें हुई थी.

बंगाली में बनी है फिल्म


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उनकी पुण्यतिथी के मौक पर आज ही एक और बंगाली फिल्म गुमनाम की घोषणा की गई

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बंगाली में भी कई फिल्में नेताजी पर बनी हैं। 1966 में हेमन गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म नेताजी सुभाष चन्द्र बोस में नेताजी की ज़िंदगी के बारे में बताने की कोशिश की गई थी। जहां अन्य फिल्मों में उनकी ज़िंदगी के कुछ सालों को चुना गया, वहीं यह बंगाली भाषा की ऐसी फिल्म, जिसमें उनके पूरे जीवन को झलक थी।

इस फिल्म के अलावा मिथुन चक्रवर्ती की साल 2011 में अमी सुभाष बोलची फिल्म भी सुभाष चन्द्र बोस से प्रेरित थी। हालांकि इस फिल्म में सीधे सीधे उनकी ज़िंदगी के पहलूओं को ना बताकर, उन्हें एक प्रेरणा स्रोत के तौर पर दिखाया गया था फिल्म में सुभाष चन्द्र बोस, देबाब्राता का किरदार निभाते मिथुन की ज़िंदगी में आते है और बंगाली लोगों को फिर से आवाज़ उठाने और मोर्चा सम्भालने के लिए प्रेरित करते हैं।

इन फिल्मों के अलावा बंगाली एक्टर विक्टर बेनर्जी भी इन दिनों फैज़ाबाद में सन्यासी देशोनायक नाम की फिल्म की शूटिंग में व्यस्त है। यह फिल्म एक पॉलीटीकल थ्रिलर है। दरअसल कुछ सालों पहले फैज़ाबाद में सुभाष चन्द्र बोस की शक्ल जैसे एक व्यक्ति को देखा गया था, जो गुमनामी का जीवन व्यतीत करता है। लोगों का मानना है वह बोस ही है, जो प्लेन क्रेश होने के बाद अपनी पहचान छिपा रहे है। इसका निर्देशन अल्लन कुसुम घोष कर रहे हैं। खास बात है कि आज सुभाष चन्द्र की 122वी पुण्यतिथि के अवसर पर एक और बंगाली फिल्म गुमनामी घोषणा की गई है। इस फिल्म का निर्देशन श्री जीत मुखर्जी करेंगे, जो साल 2020 में जनवरी महीने में ही रिलीज़ होगी। ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि यह फिल्म भी फैज़ाबाद के गुमनाम बाबा पर ही आधारित है।

इन फिल्मों के अलावा साल 2016 में डिस्कवरी में भी बोस की मौत के रहस्य पर एक घंटे की डॉक्यूमेंटरी को दिखाया गया था, जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया। ज़ाहिर है कि समय समय पर सुभाष चन्द्र फिल्मों के माध्यम से हमारे बीच हमेशा से ही रहे है। अगर आपने भी भारतीय सिनेमा में उनकी ज़िंदगी पर बनी कोई फिल्म देखी हो, तो हमें ज़रुर लिखें।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।