लिवइन रिलेशनशिप जैसे मुद्दे पर बनी फिल्म ‘लुका छुप्पी’ कॉमेडी से भरपूर है। हालांकि फिल्म के मुद्दे को सुन आपको भले ही यह लगता हो कि यह फिल्म रोमांस और दो लोगों के बीच प्यार की कहानी है, लेकिन यह फिल्म रोमांस कम बल्कि कॉमेडी ज्यादा है। दरअसल, यह फिल्म कहानी है गुड्डु यानी कार्तिक आर्यन और रश्मि यानी कृति सनोन की, जो लिवइन के बाद शादी करने को इतने उतावले है कि उस शादी को करने के चक्कर में उनके साथ जो घटनाएं होती है, उसे देखकर आप हंसते हंसते लोट-पोट हो जाएंगे।

फिल्म की कहानी


फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है

मथुरा के एक छोटे से न्यूज़ चैनल का स्टार रिपोर्टर है गुड्डु शुक्ला। कई मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते गुड्डु को अपने ऑफ़िस से लिवइन रिलेशनशिप पर एक स्टोरी तैयार करने का काम दिया जाता है। उसी दौरान उसकी कंपनी में, कट्टरवादी हिंदू संस्कृति का समर्थन करती संस्कृति रक्षा पार्टी के नेता त्रिवेदी जी की बेटी रश्मि बतौर इंटर्न आती है। यह दोनों अपने कैमरामैन अब्बास के साथ लिवइन पर स्टोरी बनाने के असाइनमेंट पर निकल जाते है। इस असाइनमेंट के दौरान दोनों ही एक दूसरे से प्यार कर बैठते है और लड़की यानी रश्मि के कहने पर दोनों लिवइन में रहना शुरु कर देते हैं। उनके इन सारे प्लान में साथ देता है उनका कैमरामैन और दोनों का खास दोस्त अब्बास। 20 दिन के लिवइन के बाद, दोनों का शादी का फैंसला कर लेते है, लेकिम कैसे इनका रिश्ता शादी के बाद भी लिवइन रहता है? कैसे लिवइन और शादी के पहले साथ रहने का समर्थन करते यह दोनों, शादी के बंधन में बंधने के लिए तड़पते है यही इस फिल्म की कहानी है।

किरदारों का अभिनय


फिल्म की शूटिंग मथुरा और ग्वालियर जैसे छोटे शहरों में हुई है

फिल्म में कार्तिक ने एक मध्यम वर्गीय परिवार में पले बढ़े लड़के का किरदार निभाया है, जिसकी परवरिश और संस्कार उसे लिवइन में रहने से मना करते हैं, लेकिन लड़की के लिए उसका प्यार उसको लिवइन में रहने के लिए मजबूर कर देता है। लिवइन के लिए जिस समय कार्तिक का किरदार घर छोड़ कर जा रहा होता है, उस दौरान उसके दिल की कशमकश को काफी खूबसूरती और कॉमेडी के साथ पेश किया गया है। कार्तिक ने अपने इस किरदार के साथ न्याय किया है। हालांकि कार्तिक को देख कर यह साफ है कि वह अपनी हर फिल्म के साथ ग्रो हो रहे हैं।

रश्मि यानि कृति सनोन का किरदार बिंदास है। उसके नेता पिता से भले ही पूरा जमाना डरता हो, लेकिन उसे डर नहीं लगता। दिल्ली में पढ़ी कृति अपनी ज़िंदगी के साथ रिस्क नहीं लेना चाहती। वह खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहती है और सोच समझ कर ही किसी सही लड़के से शादी करना चाहती है इसलिए यह जानते हुए भी कि पूरा समाज और उसका परिवार उनके खिलाफ हो जाएगा वह गुड्डु का लिवइन के लिए मना ही लेती हैं।

फिल्म के इन दो किरदारों ने डाल दी फिल्म में जान

फिल्म में इन दोनों की कास्टिंग एकदम परफेक्ट है

इन दोनों के अभिनय के अलावा जिन दो किरदारों के अभिनय की तारीफ होनी चाहिए वह है अपारशक्ति खुराना और पंकज त्रिपाठी। अब्बास यानी अपरारशक्ति ना सिर्फ गुड्डु का कैमरामैन है, बल्कि उसका अच्छा और सच्चा दोस्त भी। मुस्लिम होने के कारण उसे कई बार गुड्डु के परिवार तो कभी रश्मि के कट्टर ब्राहमण परिवार में धिक्कार दिया जाता है, लेकिन उसका अपने दोस्त के लिए प्यार कभी कम नहीं होता। दोनों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते अब्बास के प्लान भले ही हर बार निष्फल हो जाते हो, लेकिन मदद करने की उसकी नियत में कोई कमी नहीं आती। फिल्म में एक जगह पर उसका डायलॉग ‘मुस्लिम हुं जानवर नहीं हूंट, आपकी आंखे नम कर देता है। लेकिन फिल्म में अब्बास की हरकतें और उसकी मौजूदगी दर्शकों का खूब मनोरंजन करती है।

जिस किरदार के अभिनय की जितनी तारीफ की जाए वह कम है और वो है बाबूलाल यानी पंकज त्रिपाठी। वह अपनी हर फिल्म में हर बार कुछ नया ही करते हैं। इस फिल्म में वह गुड्डु की भाभी के भाई बने है, जिनका काम परिवार में आग लगाना है। जहां परिवार के आपस का मामला सुलझ रहा होगा, वहां वह आग लगाने पहुंच जाते है। जहां लगेगा कि अब तो सब कुछ शांति से निपट ही जाएगा, तो वहां बाबूलाल मामले को बिगाड़ने पहुंच ही जाते है। फिल्म में उनका किरदार आपको अंत तक हंसाता है। दर्शक बार बार उनके फिल्म में आने का इंतजार करता है।

इन किरदारों के अलावा रश्मि के पिता के किरदार में विनय पाठक, गुड्डु के बड़े भाई के किरदार बेहतरीन है। हालांकि फिल्म के सभी किरदार इतने परफेक्ट है, जिसके लिए फिल्म की कास्टिंग टीम अनमोल और अभिषेक की दाद देनी चाहिए।

फिल्म देखे या नहीं

फिल्म की कहानी रोहन शंकर ने लिखी है

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है कि फिल्म भले ही लिवइन पर बनाई गई हो, लेकिन यह शादी जैसे रिश्ते की वकालत करती है। आज की युवा पीढ़ी जो सिर्फ लिवइन में रहना चाहती है, उनको बताती है कि शादी रिश्तों का बंधन नहीं बल्कि आपके प्यार को समाज से मिली स्वीकृति है। कैसे खुद ही लिवइन में रहने की शुरुआत करने वाले गुड्डू और रश्मि, शादी के बंधन में बंधने के लिए तड़पते है यही इस फिल्म में दिखाया गया है। लिवइन और शादी दोनों को ही अपनी अपनी जगह सही बताती यह फिल्म आखिर में यही दिखाती है कि प्यार में धोखा किसी के साथ नहीं होना चाहिए, ना ही जिससे आप प्यार करते है उसके साथ और ना ही परिवार के साथ और यही इस फिल्म की खूबसूरती है।

फिल्म में कुछ ऐसे मुद्दे भी है, जिन्हे आप इस फिल्म में हल्के फुल्के अंदाज़ में देखेंगे। जैसे फिल्म में गुड्डू की मां का किरदार अपनी बहू यानी रश्मि को घर के काम छोड़, नौकरी कर खुद के पैरों पर खड़े रहने को प्रेरित करता है, रशिम के नेता पिता को उनकी बेटी रश्मि और जमाई गुड्डू चुनाव में जाति और धर्म का मुद्दा छोड़ युवाओं के मुद्दे उठाने के लिए सलाह देता है तो कैसे मुस्लिम होने के बावजूद अब्बास अपनी दोस्त रश्मि के कन्यादान के लिए उसे अपनी बहन बनाता है, वहीं कैसे गुड्डू अपने बड़े भाई के कुवांरा होते हुए भी पहले अपनी शादी कर लेता है, ऐसे कई छोटे छोटे मुद्दे है, जो हमारे समाज में आज भी मौजूद है और उसमे हो रहे बदलाव की और इशारा करते हैं।

फिल्म की बहुत सी बेहतरीन बातों के साथ साथ कुछ चीज़े है जिसे और बेहतर किया जा सकता था। फिल्म में रोमांस पर कॉमेडी हावी हुई है। यहां तक की कृति और कार्तिक की केमेस्ट्री भी इतनी उभर कर नहीं आ पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। फिल्म की कहानी लिवइन इन दो शब्दों के इर्द गिर्द ही घूमती है। जो कभी समाजिक तो कभी राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। फ़िल्म के गीत में कोका कोला को छोड़ कोई भी गीत आपको याद नहीं रहता। कई बार कुछ गीत आपको फिल्म में कहानी के साथ देखते हुए पसंद आते है, लेकिन इस फिल्म के साथ ऐसा नहीं है। इस फिल्म के आखिर में आता कोका कोला गीत के अलावा औऱ कोई गीत या धून आप अपने साथ लेकर नहीं जाते।

इन सब के बावजूद फिल्म की खास बात है कि इस फिल्म को आप अपने परिवार के साथ देख सकते है। 126 मिनट की यह फिल्म कॉमेडी से भरपूर है और अगर आप इस वीकेंड खुद को एंटरटेन करना चाहते है तो यह फिल्म आप देख सकते हैं। आवाज़ डॉट कॉम इस फिल्म को 3 स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।