हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘मलाल’ में टपोरी बने मिज़ान जाफरी, दरअसल अपनी रियल लाईफ में एक अच्छे बेटे, एक अच्छे भाई और एक अच्छे दोस्त हैं। मुंबई में ही पले बढ़े मिज़ान, एक्टर जावेद जाफी के बेटे और एक्टर जगदीप के पोते हैं। संजय लीला भंसाली की बहन बेला सहगल की बेटी शर्मिन सहगल के साथ डेब्यू करने वाले मिज़ान के अभिनय की, उनकी पहली फिल्म ‘मलाल’ में ही काफी तारीफें हो रही हैं। अपने पिता यानी जावेद जाफरी के करियर में कई उतार चढ़ाव देख चुके मिज़ान का मानना है कि जहां वह बेहतरीन काम कर तरफ अपने पिता के कंधे का भार हल्का करना चाहते हैं, वहीं वह उन एक्टर्स और नौजवानों मे से नहीं, जो पैसा कमाने के बाद अपने मां-बाप से अलग होकर एक नया घर बसा लेते हैं।

मेरे पिता को हमेशा हमारी परवरिश की चिंता रहती थी

मिज़ान की पढ़ाई और परवरिश मुंबई में ही हुई हैं
मिज़ान की पढ़ाई और परवरिश मुंबई में ही हुई हैं

दरअसल, फिल्मों में बतौर विलेन शुरुआत करने वाले जावेद जाफरी को कई कॉमेडी के रोल मिलते चले गए और उन्होनें बतौर कॉमेडियन अपनी पहचान बनाई। साथ ही उनके डांस के भी चर्चे बहुत रहें। हालांकि एक दौर ऐसा भी आया जब इंडस्ट्री में उनके पास काम बहुत कम था। हालांकि मिज़ान की मानें तो, काम ना मिलने पर होने वाले तनाव का असर उनके पिता ने कभी भी अपने परिवार और बच्चों पर नहीं आने दिया और यही कारण है कि आज वो 56 साल के हो चुके अपने पिता जावेद जाफरी के कंधो के भार को हल्का करना चाहता हैं। मिज़ान की मानें तो, “मैंने अपने पिता तो देखा है कि जब उनका खराब वक्त आया तो उन्होनें कभी भी हौसला और हिम्मत नहीं छोड़ी क्योंकि वो अपने क्राफ्ट में इतने अच्छे हैं कि उनको हमेशा कुछ ना कुछ काम तो मिलता ही रहा। जब काम नहीं था तो पापा घर पर रहते थे। हम भाई-बहन की ज़िम्मेदारियां थी, स्कूल की फीस भरनी हैं, घर का राशन लाना हैं, पेट्रोल का पैसा, बहुत सारी चीज़े होती थी, वो सभी टेंशन हमें अपने पिता पर हमेशा दिखती थी, लेकिन वो हमें यह बात नहीं बताते थे। मुझे हमेशा लगता था कि मुझे यह बोझ उनके कंधों से उतारना है और मुझे काम करना हैं। मुझे उनका ख्याल पूरी ज़िंदगी रखना है। वो आज 56 साल के हैं, उनके लिए मुश्किल हो जाता है, वो कब तक उसी लेवल और एनर्जी से काम करते रहेंगे। मैं अब चाहता हूं कि मेरा टाइम आया है और मैं इस ऑपरच्यूनिटि का इस्तेमाल करूं और उनकी सारी तकलीफें और ज़िम्मेदारियों को दूर करूं।”

मैं इतना बड़ा नहीं हो सकता कि मां-बाप से अलग घर कर लूं

मिज़ान तीन भाई-बहन हैं
मिज़ान तीन भाई-बहन हैं

फिल्म ‘मलाल’ से लोगों की नज़रों में आ चुके मिज़ान ने हालांकि इंडस्ट्री में अभी बस शुरुआत ही की हैं, लेकिन ज्वाईंट फैमिली में पले-बढ़े मिज़ान के मुताबिक वह उन एक्टर्स और खासकर नौजवानों में नहीं हैं, जो कमाई के बाद अपना अलग घर कर लेते हैं। परिवार के साथ रहने को वह अपना इंडियन कल्चर मानते हैं और मां-बाप को अकेला छोड़ देने के बिल्कुल खिलाफ हैं। मिज़ान की मानें तो, “ मैं कभी अलग घर रह ही नहीं सकता। मेरी परवरिश ऐसी रही है और जो माहौल घर पर मिला है, मैं बड़े होकर उस पर ही तो अमल करूंगा। बचपन से सिखाया गया है कि परिवार पहले हैं। मैं, मेरी बहन और भाई ऐसा कर भी नहीं सकते क्योंकि हम सभी एक दूसरे पर निर्भर है। हम सबको एक दूसरे की ज़रुरत है। अलग हो गए तो एकदम सुना-सुना सा लगेगा। अलग हुए भी तो एक ही बिल्डिंग में घर ले लिया ऐसा हो सकता हैं। लेकिन साथ रहना ज़रुरी है क्योंकि यही हमारे देश का कल्चर भी हैं। आज जो लोग अलग हो जाते हैं और निकल जाते है घर से अपनी ज़िंदगी जीने, हमने वेस्ट्रन कल्चर से वो अडोप्ट किया है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए की हमारा कल्चर क्या है और हम कहां से आते हैं। परिवार के साथ रहना इंडिया का खूबसूरत कल्चर है और हमें उसे बरकरार रखना चाहिए। बहुत सारी ऐसी खूबसूरत चीज़ों को भूल जाएंगे तो यह कल्चर ही नहीं रहेगा।”

हालांकि यह आश्चर्य की बात है कि फिल्म में टपोरी किरदार निभा कर लोगों का दिल जीत रहे मिज़ान असल ज़िंदगी में अपने किरदार शिवा के बिल्कुल भी करीब नहीं। फिलहाल संजय लीला भंसाली के बैनर तले बनी फिल्म ‘मलाल’ से शुरुआत करने वाले मिज़ान को यकीन है कि उनकी एक्टिंग की प्रतिभा के भरोसे उन्हें इंडस्ट्री में बेहतरीन काम मिलता ही रहेगा।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।