फिल्म का टाइटल सुन कर आपको लगेगा कि यह फिल्म भी एक्शन से भरपूर होगी, जिसमें मर्दों के बीच लड़ाई या मारकाट को दिखाया गया होगा। हालांकि यह फिल्म भी एक्शन तो रखती है और इस फिल्म में भी वो मर्द है, जिसे दर्द नहीं होता, लेकिन यह फिल्म उस दर्द से कई ऊपर और अलग है। कहानी है एक ऐसे लड़के की जिसे कांजिनेटियल इनसेंसिटिवीटी टू पेन नाम की बीमारी है, जिसके चलते उसे किसी भी तरह का दर्द ही महसूस नहीं होता। यह निर्देशक वासन बाला की डेब्यू फिल्म है। खास बात है कि उनकी फिल्म मेंकिंग में नयापन है, कहानी कहने का अंदाज़ दूसरों से अलग है। क्या है इस मर्द की कहानी जिसे दर्द नहीं होता, आइए जानते हैं।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी फिल्म के निर्देशक वासन बाला ने लिखी है

Image Credit: Mard Ko Dard Nahi Hota

कहानी है सूर्या यानी अभिमन्यु दसानी की, जिसे जन्म के साथ ही किसी भी तरह का दर्द ना महसूस होने की बीमारी है। यह फिल्म उन्ही के नज़रिए से यानी उन्ही के नेरेटिव पर चलती है। शुरु से लेकर आखिर तक वही स्टोरी का नरेशन कर रहे हैं। पैदा होने के कुछ घंटो में ही अपनी मां को खो चुका सूर्या, बचपन में अपनी इस बीमारी की वजह से परिवार की चिंता का विषय, स्कूल में दोस्तों के बीच मजाक का विषय बनता है। लेकिन कैसे अपने नाना की मदद से अपनी इसी बीमारी को अपनी ताकत में तब्दील कर देता है, वही इस फिल्म की कहानी है। फिल्म में सूर्या की कहानी के साथ बचपन से ही उसकी मदद करने वाली उसकी क्लासमेट और उसकी पड़ोसन सुप्री यानी राधिका मदन की कहानी भी साथ साथ चलती है। जिससे वह किसी कारण बचपन में ही अलग हो जाता है, लेकिन उसकी मुलाकात राधिका से फिर होती है और दोनों के बीच का कॉमन प्वाइंट है कराटे मास्टर गुलशन देविहा।

फिल्म के किरदार

अभिमन्यु अभिनेत्री भाग्यश्री के बेटे हैं

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अभिमन्यु ने बेहतरीन एक्शन किया है। खास बात है वि वह एक्ट्रेस भाग्यश्री के बेटे है, इसके बावजूद उन्होंने अपने डेब्यू के लिए एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म का चयन किया यह बहुत ही बड़ी बात है। फिल्म में उन्होनें अपने किरदार को बखूबी निभाया है। फिल्म में उनके किरदार के बाद जिस किरदार का अभिनय शानदार है , वह है महेश मांजरेकर, जिन्होनें सूर्या के नाना यानी आजोबा की भूमिका निभाई है। अपनी बेटी को एक एक्सिडेंट में खो चुके आजोबा फिल्म का सबसे स्ट्रांग किरदार है, जो सूर्या को उसकी कमज़ोरी को उसकी ताकत बनाने में मदद करता है। फिल्म की अभिनेत्री राधिका मदन का एक्शन शानदार है। फिल्म की सबसे खास बात है कि फिल्म में हीरों और हीरोइन दोनों ने ही अपने एक्शन के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं किया है। आप जब यह फिल्म देखेंगे तो आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि दोनों ने ही इसके लिए काफी मेहनत की होगी। फिल्म में गुलशन देविहा के डबल रोल है कराटे मास्टर और जिम्मी। गुलशन के यह दोनों ही रोल एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत है, लेकिन जिस बखूबी से इन दोनों की किरदारों को गुलशन ने परफेक्शन के साथ निभाया है, उसकी वाकई तारीफ होना चाहिए। फिल्म में जिस चीज़ को दर्शक सबसे ज्यादा एन्जॉय करेंगे वह है जिम्मी का किरदार और आजोबा और सूर्या के बीच की केमेस्ट्री और संवाद।

फिल्म का निर्देशन बेहतरीन है। खास बात है कि फिल्म के निर्देशक वासन बाला अनुराग कश्यप के साथ असिस्टेंट रह चुके है, लेकिन इसके बावजूद उनके निर्देशन में कही भी उसकी छाप नहीं दिखती। स्टोरी बताने का जो तरीका वासन ने अपनाया है वह कुछ अलग और अनोखा है। फिल्म के किरदारों के चयन के लिए भी कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा की दाद देनी होगी। फिल्म का एक्शन भी काफी रियालिस्टिक रखा गया है।

हालांकि एक नए और अलग तरह के सिनेमा के लिए फिल्म के निर्माता रोनी स्क्रूवाला की तारीफ तो करनी ही चाहिए, लेकिन इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि यह फिल्म मेट्रो सीटी में लोगों को एंटरटेन कर सकेगी। फिल्मों से अभी भी नाच गानों और ढ़ेर सारा ड्रामा की उम्मीद करने दर्शकों को यह फिल्म ना लुभा पाए।

आवाज़ डॉट कॉम इस फिल्म को 3 स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।