असफलताओं से कभी हार ना मानने वाले मनोज वाजपेयी को पद्मश्री पुरस्कार ने नवाज़ा गया है। मनोज को इंडस्ट्री में लगभग 25 साल पूरे हुए है। साल 1994 में फिल्म ‘द्रोहकाल’ से अपनी करियर की शुरुआत करने वाले मनोज बाजपेयी इंडस्ट्री में इतने सालों के अपने सफर को एक रोलर कोस्टर राइड के तौर पर देखते हैं। सम्मान मिलने के बाद एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए मनोज ने कहा, “यह किसी भी पेशेवर के लिए बहुत बड़ा सम्मान है क्योंकि यह सम्मान मात्र किसी एक खास फिल्म या प्रदर्शन के लिए नहीं है। यह मेरे अब तक के सफर को सम्मानित किया जाना है।” हालांकि कुछ समय पहले अपने एक फिल्म के प्रमोशन के दौरान आवाज़.कॉम के साथ बातचीत के दौरान उन्होनें ज़िंदगी में हासिल कई उपलब्धियों के लिए किए गए संघर्ष के बारे में कई बाते सांझा की थी। उनके अनुसार उनकी सफलता का श्रेय सिर्फ और सिर्फ उनकी मेहनत को ही जाता है। मनोज कहते हैं, “मैने असफलता के बावजूद अपना रास्ता कभी नहीं बदला और यही अपने आप में एक बड़ी सीख हैं कि आप अगर कभी भी हार नहीं मानते और अपना रास्ता नहीं बदलते, तो आपको सफलता मिल ही जाएगी। मैं कभी आलोचनाओं से नहीं टूटा क्योंकि मेरे जीवन का उद्देश्य यहीं है कि सफलता मिले या ना मिले, लेकिन संघर्ष करते रहना है।”

NSD ने तीन बार मनोज बाजपेयी को ठुकराया

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राम गोपाल वर्मा की भीखू म्हात्रे से मिली पहचान

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बिहार के एक छोटे से गांव में पले बढ़े और किसान के बेटे मनोज के लिए एक्टिंग में करियर बनाना आसान काम नहीं था। तीन बार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने उन्हें एडमिशन देने से इंकार कर दिया। यह वह दौर था जब मनोज ने हताश और निराश होकर अपनी जान लेनी भी चाही, लेकिन उनके संघर्ष के आगे आखिर किसी की कुछ ना चल सकी और वह NSD के स्टूडेंट बन ही गए। साल 1994 में फिल्म ‘द्रोहकाल’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले मनोज वाजपेयी फिल्मों में आने से पहले रंगमंच से जुड़े हुए थे। जहां फिल्म ‘द्रोहकाल’ में उनका बहुत ही छोटा रोल था, वहीं शेखर कपूर की ‘बैन्डिट क्वीन’ और उसके बाद राम गोपाल वर्मा की ‘सत्या’ में भीखू म्हात्रे से जो उन्हें पहचान मिली उसके बाद उन्होनें मुड़ कर कभी नहीं देखा। मनोज बताते है, “ मेरे करियर में ‘सत्या’ का बहुत बड़ा योगदान रहा है, वो ऐसी फिल्म थी जिसके बाद सिनेमा के नए एवेन्यू खुले, कई एक्टर इंडस्ट्री में आने के लिए इंस्पायर हुए। वो फिल्म अगर आज रिलीज़ हुई होती, तो लगभग 300 करोड़ का कारोबार ज़रुर करती।”

कमर्शियल सिनेमा में भी बनाई पहचान

मनोज को गांव में जाकर खेती करना भी पसंद है

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ऑफबीट सिनेमा के लिए जाने जाते मनोज बाजपेयी ने हाल फिलहाल में कई कमर्शियल हिट फिल्में भी दी है। मनोज मानते है कि भले ही आज काम करने के लिए कई तरह के मंच बन गए हो और एक्टर को काम पाने के लिए इतना संघर्ष ना करना पड़े, लेकिन फिर भी उनकी तरह बाहर से आकर अपनी जगह बनाने वाले एक्टर कि वह बहुत इज़्ज़त करते हैं। मनोज कहते हैं, “ अमूमन फिल्म इंडस्ट्री के ही लोगों को ज़्यादा मौका मिलता है, ऐसे में इस इंडस्ट्री में बाहर से आकर जगह बनाने वाले के जज़्बे को मैं सलाम करता हूं। क्योंकि यह उसके संघर्ष और जज़्बे को दिखाता है।”

आलोचनाओं को कभी भी गंभीरता से ना लेने वाले मनोज वाजपेयी का मानना है कि एक्टिंग अपने आप में सबसे मुश्किल पेशों में से एक है। एक साधारण से साधारण किरदार को निभाने के लिए किसी भी एक्टर को काफी मेहनत करनी पड़ती है। अपने करियर के 25 सालों में लगभग 150 फिल्में करने वाले मनोज वाजपेयी को अपने खाली समय में बीवी और बच्चों के साथ घूमना, खाना पकाना, डिजीटल प्लेटफार्म पर फिल्में देखने के साथ साथ, अपने 6 भाई बहनों के साथ समय बिताने के अलावा गांव जाकर अपने पिता के साथ खेतों में समय बिताना भी काफी पसंद है। मनोज कहते हैं,, “ मेरा बचपन गांव में बिता है, इसलिए गांव जाना मुझे बेहद पसंद है। मुझे खेती बाड़ी की भी थोड़ी समझ है। खास बात है कि मेरा पूरा परिवार अलग अलग रहता है, लेकिन हम सब में बहुत प्यार है। मेरी शुरु से इच्छा थी कि हम सब लोग अलग अलग ,लेकिन प्यार से रहे। हम में से किसी को पिता की ज़मीन नहीं चाहिए। हम सबको को पता है कि, जो भी है वो सिर्फ पिता का ही है। “

मनोज के करियर में उनके अभिनय की तारीफों के साथ साथ उनकी आलोचनाएं भी बहुत हुई, लेकिन मनोज का मानना है कि वह कभी भी किसी भी तरह की आलोचनाओं को केवल हंस कर उड़ा देते है और कभी निराश नहीं होते, क्योंकि उनका मानना है कि वह मोटी चमड़ी के हैं।

मनोज बाजपेयी की हिना कुमावत के साथ हुई इस खास बातचीत के अंश आप aawaz.com पर मौजूद हमारे शो बिग ब्रेक विद हिना में क्लिक कर सुन सकते हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।