हिंदी सिनेमा की शानदार फिल्म कुछ कुछ होता है आज 16 अक्टूबर को 20 साल पूरे कर चुकी है। करण जौहर ने इसी फिल्म से डायरेक्शन में डेब्यू किया था और यह पूरी दुनिया में सुपरहिट साबित हुई थी। अब भी करण के लिए यह दिन यादगार है, इसी वजह से आज धर्मा प्रोडक्शन कंपनी ने एक ग्रैंड इवेंट का आयोजन किया है। इस मौके पर करण ने इस फिल्म से जुडी यादें ताजा करते हुए कहा, ‘मेरे लिए ये जैसे कल की ही बात हो। इस फिल्म के हर एक शूट की याद मुझे है। इस फिल्म की यादें इतनी ताजा है मुझे फिल्म नई सी लगती है। यहां तक कि मुझे कोई दूसरी फिल्मों की शूटिंग के वाकये अच्छी तरह याद नहीं हैं। हो सकता है ऐसा इसलिए हो क्योंकि यह मेरी फर्स्ट फिल्म थी और मेरे करियर की बेस्ट फिल्म भी।

यह मेरी फर्स्ट फिल्म थी और मेरे करियर की बेस्ट फिल्म भी

इस मौके पर इमोशनल हुए करण ने कहा, ‘मैं ऐसी फिल्म फिर कभी नहीं बना पाऊंगा। आज से 20 साल पहले मैं बहुत नादान था और इस फिल्म से बिल्कुल कन्वेंस था। आज मैं उस तरह नहीं सोच नहीं पाऊंगा, जैसे पहले सोचा करता था। उस समय फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर पापा (यश जोहर) ने शुरुआत की थी और कुछ कुछ होता है दोनों के करियर के लिए एक बड़ा रिस्क थी। यह एक्साइटमेंट और फीयर का कॉन्बिनेशन बनी। मैं अपनी पहली फिल्म पर काम कर रहा था, पर मेरे पिता को फिल्म को लेकर कई दुविधाएं थी। वैसे तो यह मल्टीस्टारर फिल्म थी, जिसमें सभी बड़े स्टार मौजूद थे और दूसरी ओर या मेरी पहली फिल्म थी। मुझ पर सक्सेस देने का प्रेशर था और मुझे अपने पिता के लिए ये करना ही था।

मुझ पर सक्सेस देने का प्रेशर था और मुझे अपने पिता के लिए ये करना ही था

यहां तक की करण जौहर का मानना है कि आज भी धर्मा प्रोडक्शन के अंतर्गत लेने वाले सभी फैसले वे तभी ले पाते हैं, क्योंकि कुछ कुछ होता है एक सक्सेसफुल फिल्म थी। उन्होंने आगे कहा, ‘कुछ कुछ होता है मेरे लिए माइलस्टोन थी<, साथ ही शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी के लिए भी। कुछ कुछ होता है को उसके फैशन और म्यूजिक के लिए भी बेहद पसंद किया गया। करण ने कहा इस फिल्म का फैशन और म्यूजिक कई सालों तक लोगों के जहन में समाया रहा। मैं मनीष मल्होत्रा का बेहद आभारी हूं कि उन्होंने इस फिल्म को इस तरह से सजाया। हमने बोल्ड कलर्स का इस्तेमाल किया, जिसे हिंदी सिनेमा में पहले कभी नहीं दिखाया गया था।' इस तरह करण जौहर की फिल्म कुछ कुछ होता है उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..