सारागढ़ी की लड़ाई पर बनी फ़िल्म केसरी, 1897 में 21 सिखों द्वारा लड़ी गई बहादुरी की कहानी हैं। ये कहानी है इतिहास के पन्नो में गुम हो चुके उन सिखों के बलिदान की, जिन्होनें 10,000 अफगानियों का सामना डट कर किया था। अनुराग सिंह के निर्देशन में बनी लगभग ढ़ाई घंटे की यह फ़िल्म, आपको इतिहास के उस अहम हिस्से से रूबरू भी कराती है और साथ ही आपको फक्र भी महसूस होता है कि भारत के इतिहास में किसी लड़ाई को इतनी बहादुरी के साथ लड़ा गया।

फिल्म की कहानी


Image Credit: Kesari Movie Trailer

कहानी वही है जो आपको ट्रेलर देख कर समझ में आती है। कहानी सारागढ़ी किले में तैनात 36 सिख रेजिमेंट के 21 जवानों औऱ 10,000 अफगानियों के बीच की है। लेकिन लगभग दो घंटे की इस फ़िल्म में यह लड़ाई क्यो लड़ी गयी से ज़्यादा इन जवानों की मानसिकता, इनकी परिवार से दूर बिताई जा रही ज़िन्दगी के साथ- साथ, इनकी देश के लिए कुछ भी कर गुज़रने की भावना को दिखाया गया है। ईशर सिंह ब्रिटिश राज के दौरान हवलदार हैं, उसके उसूल ओर संस्कार, धर्म और जात नही जानते। वह दिल से जितना नेक है, अपने इरादों में उतना बहादुर भी। भले ही इस बात की कल्पना करना मुश्किल हो कि 21 सिखों ने लगभग 7 घंटो तक 10000 अफगानियों के साथ लड़ाई कैसे की होगी, लेकिन जब आप इस बहादुरी की कहानी बड़े पर्दे ओर देखते है तो आप इस बात पर विश्वास करने लगते हैं और यही इस फिल्म की खूबसूरती है।

फिल्म के किरदार


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फिल्म का मुख्य किरदार है ईशर सिंह यानी अक्षय कुमार का किरदार है। एक बहादुर सिख, जो किसान का बेटा है और उसे अपने देश की मिट्टी से प्यार है और अपने देश के लिए कुछ भी कर सकता है। उसे मर जाना तो कबूल है लेकिन उसकी पग को कोई हाथ लगाए यह मंज़ूर नही। उसमे एक लीडर के गुण है, तभी उसके रेजिमेंट के 21 जवान, 10,000 अफगानियों के सामने अपनी जान की बाजी दाव पर लगाने को मंज़ूर हो जाते हैं। अक्षय कुमार इस किरदार को न्याय देने में एकदम सफल रहे हैं। उन्होनें इस किरदार के लिए जिस तरह का गेटअप लिया है, जिस तरह का जोश अपनाया है, वह सराहनीय है। फिल्म में परिणीती चोपड़ा भी उनकी बीवी के किरदार में है, हालांकि यह बात तो पहले ही साफ थी कि उनका इस फिल्म में काफी छोटा किरदार है, लेकिन फिर भी इस फिल्म में वह फिट बैठती हैं। फिल्म एक पीरियड फिल्म है, जाहिर सी बात है कि फिल्म में कई किरदारों की ज़रुरत थी। हालांकि फिल्म में कई जवानों को दिखाया गया है और सभी का रोल भले छोटा हो, लेकिन आपको हर जवान अहम महसूस होने लगता है और इसका श्रय फिल्म के निर्देशक को जाता है क्योंकि उन्होंने इतने ढ़ेर किरदार होने के बावजूद हर किरदार के साथ दर्शक को जोड़ने की कोशिश की है।

फिल्म देखें या नहीं


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फिल्म का निर्देशन कमाल का है। फिल्म के लिए चुनी गई लोकेशन भी लाजवाब है। कही दूर दूर तक फैले रेगिस्तान, बर्फ से ढ़के पहाड़ या फिर चट्टानों जैसे नुकीली पहाड़ो के बीच फिल्माई गई इस फिल्म को देख कर आप अंदाज़ा लगा सकते है कि इस फिल्म को शूट करना काफी मुश्किल रहा होगा। फिल्म एक्शन से भरपूर है, इंटरव्ल के बाद सिर्फ और सिर्फ अफगानियों और सिखों की लड़ाई को ही दिखाया गया है। हालांकि फिल्म के प्रमोशन के दौरान अक्षय के साथ साथ फिल्म से जुड़े लोगों ने यह बात कई बार कही थी कि वह चाहते है कि यह फिल्म बच्चों को भी दिखाई जाए, जिससे वह भारत के इतिहास में इतनी बहादुरी से लड़ी गई लड़ाई के बारे में जान सके। लेकिन फिल्म में एक्शन और हिंसा बहुत ही ज्यादा है। ऐसे में काफी छोटे बच्चों को यह फिल्म दिखाना शायद सही ना हो। फिल्म में कई बार ऐसा लगता है निर्देशक बहादुरी की जगह लड़ाई को ज्यादा ग्लोरिफाई कर रहे हैं।

हालांकि इन सब के बावजूद इस बात में कोई दो राय नहीं कि इस फिल्म की कहानी को दिखाया जाना बेहद ज़रुरी था, जो कम से कम अनुराग और अक्षय की वजह से दुनिया के सामने है।

फिल्म की रिसर्च , कॉस्ययूम और एक्शन में जिस तरह का परफेक्शन और बारीकी है वह वाकई तारीफ के काबिल है। आवाज़ डॉट कॉम इस फिल्म को 3 स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।