यू तो मैं अकेला ही चला था, लेकिन लोग जुड़ते रहे और कारवां बनता गया। इस फिल्म में अविनाश (दुलकर) अकेला चला था, लेकिन फिर शौकत (इरफ़ान) का साथ और फिर तान्या (मिथिला पारकर) का साथ मिला और कारवां बनता गया। इस कारवां की खास बात है कि यह कारवां जिस सफर पर निकला है, उसके सभी मुसाफिर एक दूसरे से अलग अलग है, लेकिन फिर भी किसी ना किसी अनजान कड़ी से जुड़े हैं। धीरे-धीरे कैसे यह तीनों अपनी मंज़िल तक पहुंचते पहुंचते, ज़िंदगी को समझ जाते हैं, वही इस फिल्म की कहानी है। कुछ शब्दों में कहे तो ज़िंदगी एक सफर है, जिसकी मंज़िल तक पहुंचने वाले कारवां के हम सभी मुसाफिर और जब सभी को एक ही सफर तय करना है, तो क्यो ना हंस कर और खुल कर जिया जाए और यही इस फिल्म की कहानी हैं।

हंसी हंसी में ज़िंदगी का सबक

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अभिषेक बच्चन पहले इस फिल्म का हिस्सा थे

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक ट्रेवल बस से, जो गंगोत्री गंगा दर्शन के लिए जा रही है। इस बस के दो मुसाफिर आपस में मिलते हैं, बात करते हैं और बस वहीं से शुरू हो जाता है इस कारवां का सफर। दरअसल यह मुसाफिर अविनाश के पिता और तान्या की नानी है, लेकिन बस एक्सीडेंट में दोनों की मृत्यु हो जाती है और दोनों की ही लाशें उनके घर पहुंचा दी जाती है। गलती से बैंगलोर में रहते अविनाश के पिता की लाश, कोच्ची में रहती तान्या की मां के पास पहुंच जाती है। अविनाश अपने पिता की लाश लेने के लिए बेंगलुरु से कोच्चि तक का सफर शौकत के साथ मिलकर तय करना शुरू करता है। जैसे जैसे वह अपनी ज़िंदगी के इस कारवां के साथ आगे बढ़ता है, वैसे वैसे उसकी ज़िंदगी सुलझती चली जाती है। किसी कारण से इस कारवां का हिस्सा तान्या भी बन जाती हैं। पिता के दबाव में आकर अपने फोटोग्राफर बनने के सपने को दांव पर लगा कर, साफ्टवेयर कंपनी में काम कर रहा अविनाश, अपने पिता के मरने पर आंसू नहीं बहाता, क्योंकि वो आज भी उनसे गुस्सा है। वही तान्या (जिसकी नानी की लाश अविनाश लेकर निकला है) भी इस कारवां का हिस्सा बनती है। वह भी 8 साल की उम्र में कैंसर की वजह से अपने पिता को खो चुकी है। शौकत के पिता भी अम्मी को मारते थे, जिसकी वजह से इरफान में आज भी उनके लिए गुस्सा है और वह सबको यही कहते हैं कि उन्होंने आज तक अपने पिता को नहीं देखा। तीन अलग अलग नज़रिए से ज़िंदगी और उसके रिश्तों को देखने की कहानी है ये फिल्म। कैसे यह तीनों मुसाफिर सफर पूरा होने तक, एक दूसरे को ज़िंदगी के गुर सीखा जाते है, वही इस फिल्म की कहानी है, जिसे बहुत खूबसूरती से बयान किया गया है

इरफान तुम अभिनय की खान हो

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इन दिनों इरफान लंदन में अपना इलाज करवा रहे हैं

इरफान खान, दुलकर सलमान और मिथिला पालकर इस कारवां के यह तीनों मुख्य मुसाफिर है। इरफान को अभिनय की खान कहना गलत नहीं होगा। यह फिल्म बिना इरफान के कुछ नहीं, वह शानदार है, दरअसल इरफान के डायलॉग्स और उनकी टाइमिंग काफी बेहतरीन है। वह एक छोटे से छोटे सीन में भी अपने अंदाज़ से जान डाल देते हैं। इरफान का शायद ही ऐसा कोई सीन हो, जब लोग तालियां ना मारे, उनके हर सीन पर दर्शक हंसता है या तालियां मारता है। दक्षिण भारत की फिल्मों के स्टार दुलकर सलमान की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है, लेकिन उनका अभिनय काफी नेचुरल है। इरफान और दुलकर दोनों जब एक साथ एक ही स्क्रीन शेयर करते हैं, फिल्म के वह सीन्स देखने लायक है। मिथिला पालकर जो कि YouTube सेंसेशन है, यह उनकी भी पहली फिल्म है। आज की नौजवान लड़की, उसकी सोच और उसके अंदर की उधेड़बुन को, जिस तरह से उन्होंने अपने किरदार के साथ बड़े पर्दे पर निभाया है वह काफी बेहतरीन है। फिल्म में यूं तो कई छोटे-छोटे किरदार है, लेकिन अविनाश की एक्स गर्लफ्रेंड के रोल में कीर्ति खरबंदा का छोटा, लेकिन काफी प्रभावशाली रोल है।

ज़िंदगी का सफर हंस कर तय करना ज़्यादा आसान है

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फिल्म कही भी आपको बोर नहीं करती

जिस खूबसूरत तरीके से हंसी हंसी में जिंदगी की का ज्ञान इस फिल्म में दिया गया है, वह काफी बेहतरीन है। अक्सर बच्चे अपने मां-बाप से रूठ जाते हैं, यह सोचकर कि उन्होंने अपनी इच्छाओं को हम पर थोप दिया। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि कभी वह भी बच्चे थे और उनके भी मां-बाप ने उनके साथ ऐसा किया होगा। आखिर मां बाप ऐसा क्यों करते हैं और क्या आपके सपने और मां-बाप के सपने अलग अलग हो सकते हैं? इसी को बहुत खूबसूरत तरीके से इस फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म में आप खुद को किरदारों के साथ जोड़ कर देखते है। फिल्म में टिपीकल हिन्दी फिल्मों जैसा रोमांस नहीं है और ना ही नाच गाने ही है। फिर भी आपको लगता है कि इस कारवां का सफर कभी खत्म ना हो। बेंगलुरु से कोच्चि तक के 548 किलोमीटर के सफ़र को बहुत ही खूबसूरती से फिल्म में दिखाया किया गया है। कही कही तो ऐसा लगता है कि मानो हम पेंटिंग देख रहे हो। फिल्म में सभी कलाकारों का एकदम सहज अभिनय, सादी सी कहानी और उतनी ही सादगी से आकर्ष खुराना का निर्देशन आपके दिल को छू लेता है।

स्पेशल नोट : ये फिल्म इरफान के फैंस के लिए खास है। अपनी बीमारी का लंदन में इलाज करा रहे इरफान, भले ही कुछ समय के लिए फिल्मों से दूर हो, लेकिन इस फिल्म में इरफान को देखकर उनके फैंस यही दुआ करेंगे कि इरफान आप जल्दी ठीक हो जाए, भारतीय सिनेमा का कारवां , आपके जल्द लौटने का इंतज़ार कर रहा है।

ये फिल्म ज़िंदगी का कारवां है, रिश्तों का कारवां है और दोस्ती और मोहब्बत का कारवां है। फिल्म को हॉट फ्राइडे टॉप्स 4 स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।