रजनीकांत काला बनकर बॉक्स ऑफ़िस पर छा गए । रजनीकांत की फिल्म हो और भीड़ में उमड़े यह तो हो ही नहीं सकता। सुपरस्टार रजनीकांत अपनी हर फिल्म से यह साबित कर देते हैं कि हीरो बनने के लिए किसी उम्र की ज़रूरत नहीं है। 67 की उम्र में भी उनका स्टारडम सब से परे है। जिस तरह का फिल्म का ट्रेलर था, कहानी भी वहीं है। धारावी के राजा काला ( रजनीकांत) और हरिदेव अभ्यंकर (नाना पाटेकर) के बीच ज़मीन को लेकर तनातनी हैं। काला धारावी का हिस्सा है, वो उसकी बस्ती है और वह गरीबों का मसीहा बन चुका हैं। वह यारों का यार है तो दुश्मनों का दुश्मन भी। फिल्म को तमिल, तेलुगू और हिंदी तीनों भाषा में बनाया गया है। खास बात है कि रजनीकांत की फिल्में ही ऐसी फिल्में होती है, जिसके लिए मुंबई में सुबह तड़के 4:00 और 6:00 बजे शो रखे जाते हैं और जिसे देखने के लिए सुबह से ही लंबी कतारें भी लग जाती है। आइए जानते हैं जब ऐसे ही कतारों का हिस्सा हॉट फ्राइडे टॉक्स हिस्सा बना और तमिल में इस फिल्म को देखा, तो क्या जानने को मिला?

रजनीकांत क्यों है सुपरस्टार

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रजनीकांत फिल्म की शूटिंग के लिए मुंबई आए थे, लेकिन यहां भारी बारिश की वजह से शूट को कई दिनों कर रोक देना पड़ा। हालांकि फिर इस फिल्म के लिए चेन्नई में सेट लगाना पड़ा

सबसे पहले बात करेंगे रजनीकांत की, जिसकी वजह से यह फिल्म चर्चा में है। फिल्म में रजनीकांत कैसे एंट्री करते है, इस बात का इंतजार हर किसी को होता है। लेकिन उस फिल्म में निर्देशक पा रंजीत ने रजनीकांत की एंट्री को एकदम सादा रखा है। हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार की तरह उनकी एंट्री को ग्रैंड बनाने की कोशिश नहीं की गई, बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते हुए काला की फिल्म में एंट्री होती हैं, जो बच्चों की पहली ही बॉल पर आउट हो जाते हैं। खास बात तो ये है कि उनकी इस एंट्री पर भी, उनके पहली बाल पर आउट हो जाने पर भी थियेटर तालियों से गुंज उठता है। फिल्म में उनका नाम काला है और उनको आप आधी से ज़्यादा फिल्म या यूं कहे कि लगभग पूरी फिल्में काली लूंगी, काले शर्ट में और काले चश्मे में देख सकते हैं। अपने ट्रेडमार्क स्टाइल में वह चश्मा घुमाते हुए तो नहीं देखेंगे, लेकिन बार-बार अपनी मूंछ और दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए देखेंगे, जो कि उनका इस फिल्म का ट्रेडमार्क स्टाइल बन गया है। यूं तो किसी हीरो की एंट्री पर एक ही बाहर तालियां बजती है, लेकिन जब आप रजनीकांत के फैंस के बीच आप बैठे हो तो आपको पता चलता है कि रजनीकांत की एंट्री पर एक नहीं, दो से तीन बार या कहा जाए तो बहुत सारे सीन पर तालियां क्यों बजती है।

फिल्म की कहानी

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फिल्म में हुमा के रोल के लिए पहले विधा बालन को लिया जाना था, लेकिन उन्होनें इस फिल्म को करने से इंकार कर दिया

फिल्म ऐनिमेशन के साथ शुरू होती है, जिसमें स्टोन एज से लेकर हाल में मेट्रो शहरों की स्थिति किस तरह हो गई है ये दिखाया गया है। उसी कहानी के दौरान लैंड माफ़िया का जिक्र कर दिया जाता है, जिससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि फिल्म लैंड माफ़िया पर बनी है। फिल्म में काला करिकालन एक साधारण आदमी है और अपनी बस्ती वालों का मसीहा भी। अपनी बस्ती के लोगों से बहुत प्यार करता है और हर आम आदमी से जुड़ा है। खास बात है कि वह अपनी पॉवर से नहीं, बल्कि स्वभाव से लोगों के दिल में बस चुका है। फिल्म में हरि (नाना पाटेकर) एक पॉलीटिशियन है और फिल्म में एक विलेन की भूमिका निभा रहे हैं। नाना की नज़र, काला की बस्ती यानि धारावी पर है। इस ज़मीन को हड़प कर, इस जगह को मॉडर्न बना देना चाहता है, लेकिन काला इसके खिलाफ है। किस तरह से इन दोनों के बीच में तनातनी होती है यही इस फिल्म की कहानी है।

फिल्म का पहला हिस्सा रजनीकांत और उसके परिवार को लोगों का उसके प्रति प्यार को दिखाने में चला जाता है । फिल्म में ब्रेक से पहले झरीना (हुमा कुरैशी) की एंट्री होती है, जो सिंगल मदर है और किसी जमाने में काला और वह प्यार करते थे। जहां वह बाकी लोगों के लिए काला है, वहीं वह झरीना (हुमा कुरेशी) के लिए करिकालन है। वह विदेश से लौटी है और एक एनजीओ से जुड़ी है, वह भी धारावी को मॉडर्न बनाना चाहती है। उसकी और काला की जब इतने सालों बाद होती है, तो काला की शादी हो चुकी है। कैसे काला अपनी धारावी को बचाता है, इस सिलसिले में उसे क्या कीमत चुकानी पड़ती है। यहीं इस फिल्म की कहानी है।

फिल्म की खूबी

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फिल्म में मुंबई शहर को बखूबी दिखाया गया है

फिल्म में ब्रेक से पहले मुंबई के ब्रिज पर बारिश में फिल्माये गये कुछ मिनटों के एक्शन सीक्वेंस में ही आपके पैसे वसूल हो जाएंगे। लेकिन ब्रेक के बाद भी फिल्म का एक्शन बेहतरीन है , जो काफी लंबा चलता है। मुंबई की मशहूर धारावी बस्ती को इस फिल्म में दिखाया गया है। गणपति का त्योहार, मुबई की बारिश जैसी चीज़े इस फिल्म को मुबंई शहर से जोड़ देती है। फिल्म में नाना और हुमा का अभिनय दमदार है। नाना किसी भी सीन में रजनीकांत के सामने फीके पड़ते दिखाई नहीं देते। फिल्म के दो सीन काफी खास है, एक जिसमें वह हुमा से मिलकर अपने अतीत को भूल जाने को कहते है और दूसरा जब काला, हरिदेव अभ्यंकर के घर जाता है और उसे चैलेंज करता है। फिल्म के ये दो सीन इन तीनों एक्टर के बेस्ट सीन है। फिल्म में काला की पत्नी का किरदार निभा रही इस्वरी रॉव और रजनीकांत की केमेस्ट्री बेहतरीन है। फिल्म में झरीना और काला की मुलाकात पर बेकग्राउंड में बजता कन्नम गीत काफी मधुर है।

धनुष के बैनर तले बनी ये फिल्म कई विवादों का हिस्सा रही थी, लेकिन इस फिल्म की रिलीज़ पर इसे काफी पसंद किया जा रहा है।फिल्म को हॉट फ्राइडे टॉक्स साढे़ तीन स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।