‘जुरासिक वर्ल्ड फॉलन किंगडम’ इस फिल्म के अजब-गजब डायनासोर आपको उतने लुभावने नहीं लगेंगे, जो इसके पहले की सीरीज़ में थे। फिल्म में आपको ढेरों डायनासोर देखने को तो मिलेंगे, लेकिन फिल्म की स्टोरी लाइन काफी कमज़ोर होने के कारण फिल्म में आगे क्या होगा इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को केवल ढाई स्टार देता है।

फिल्म की कहानी

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ये इस कड़ी की पांचवी फिल्म है

फिल्म की कहानी शुरू होती है इस्ला नुबलार पार्क से, जहां यह सारे डायनासोर रहते हैं, लेकिन यह जगह बहुत ही जल्द ज्वालामुखी की वजह से नष्ट होने वाली है और सभी डायनासोर की ज़िंदगी खतरे में है। ऐसे में अमेरिकी सरकार डायनासोर को बचाने के लिए क्या फैसला लें , इसी उधेड़बुन में रहती है। तभी फिल्म की नायिका क्लेयर (बॉयस डलास होवार्ड) ,जो इस प्रजाति को बचाने के लिए पहले से काम कर रही है, वह जुरासिक पार्क के क्रिएटर (जेम्स क्रॉम्वेल) से उनके बुलावे पर उनसे मिलने पहुंचती है। उनकी योजना इस विलुप्त होती प्रजाति को बचा कर एक सुरक्षित पार्क (जुरासिक पार्क) में पहुंचा देने की है, जिससे लोगों को भी नुकसान ना हो और डायनासोर भी सुरक्षित रहे। प्लान के अनुसार क्लेयर अपने दोस्त ओवन (क्रिस प्रैट) और अन्य लोगों की टीम के साथ जा पहुंचती है डायनासोर की 11 प्रजाति को बचाने। वहां पहले से ही इस मिशन को एक आदमी लीड कर रहा होता है, लेकिन उसकी मंशा डायनासोर को बचाने की नहीं, बल्कि स्मगलिंग करने की है।

फिल्म की अच्छी और बुरी बातें

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1993 में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफ़िस के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे

2 घंटे 8 मिनट की इस फिल्म का निर्देशन किया हैं जेए बायोना ने। फिल्म की लोकेशन, कैमरावर्क, VFX काफी खूबसूरत है। डायनासोर की ये दुनिया देखने में आपकी आशाओं पर खरी ज़रुर उतरेगी, जो चीज आपको निराश करेगी वह है सिर्फ और सिर्फ फिल्म की कहानी। फिल्म का कोई भी सीन आपको चौंका देने में या रोमांचित कर देने में सफल नहीं होता। फिल्म में फ़िल्माए गए ज्वालामुखी के दृश्य काफी खूबसूरत है। यह फिल्म एक विजुअल ट्रीट हो सकती है।

स्टीवन स्पीलबर्ग की सबसे पहली जुरासिक पार्क 1993 में आई थी। उस दौरान उस फिल्म ने बॉक्स ऑफ़िस के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। धरती से विलुप्त हो चुकी डायनासोर की प्रजाति पर और उनकी दुनिया पर बनने वाली इस फिल्म का हर किसी को काफी बेसब्री से इंतजार रहता है। इस फिल्म का इंतजार भी काफी समय से था, लेकिन यह फिल्म दर्शकों को लुभाने में शायद ही कामयाब हो पाए। फिल्म को हम ढाई स्टार देते हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।