पोखरण में 11 मई 1998 में 20 साल पहले 3.45 मिनट पर न्यूक्लियर टेस्ट हुऐ थे, 11मई 2018 को 3.45 मिनट पर लगभग 20 साल बाद जॉन अब्राहम ने काफी समय से विवादों में चल रही अपनी फिल्म ‘परमाणु- द स्टोरी ऑफ पोखरण’ का ट्रेलर रिलीज़ किया।

पोखरण का इतिहास अब रुपहले परदे पर

फिल्म की शूटींग के लिए रियल लोकेशन का किया गया चयन

फिल्म 20 साल पहले हुए इतिहास से लोगों को रुबरु कराएगी। किस तरह पोखरण में भारत ने पूरे देश और दुनिया की नज़रों से दूर न्यूक्लियर टेस्ट किया था , उसी दौर को इस फिल्म में फिर ज़िंदा किया जाएगा। फिल्म में जॉन के साथ कॉकटेल फेम अभिनेत्री डायना पेंटी मुख्य किरदार निभा रही हैं। जॉन उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, “हम आज जो खुद को कूल कहते हैं या फिर हमारी जेनरेशन, जो खुद को कुल समझती है, वो इसलिए क्योंकि 1998 में जो पोखरण में हुआ था। पोखरण के बाद हम विश्व भर में एक ताकत के तौर पर उभरे थे। इसलिए 1998 की यह कहानी हर भारतीय के लिए जानना ज़रूरी है।”

फिल्म के लिए की गई काफी रिसर्च

फिल्म की कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है, लेकिन देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किरदारों के नामों में बदलाव किए गए

फिल्म की कहानी सच्ची घटना से प्रेरित है, लेकिन देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किरदारों के नामों में बदलाव किए गए

फिल्म 6 अफसरों की कहानी है जिन्होंने इस महत्वपूर्ण काम को अंजाम दिया था। फिल्म का निर्देशन किया है अभिषेक शर्मा ने। सच्ची घटना से प्रेरित होने के कारण इस पर काफी रिसर्च भी की गई। अभिषेक के मुताबिक, “सबसे मुश्किल काम था इस बात का निर्णय लेना कि किन चीजों को तथ्य के रूप में उसी तरह पेश किया जाए और किन चीजों को हम ना बताए। हम बहुत सारे वैज्ञानिकों से मिले, हमें ऑफ रिकॉर्ड बहुत सी जानकारी मिली,लेकिन ऑन द रिकॉर्ड कुछ भी नहीं मिला। हमारी फिल्म में बहुत सारे असली किरदार हैं, लेकिन उनके नाम हमने अलग दिए हैं। आप जब फिल्म देखेंगे तो आप समझ जाएंगे कि वह कौन हैं। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम जितना दिखा सकते थे उतना ही दिखाया है।

डांस कर कर के थक गया हूं, अब दिमाग की जॉगिंग भी ज़रुरी है

केवल अच्छा सिनेमा ही बनाएंगे जॉन

फिल्म फ़ोर्स 2 के बाद जॉन दो साल के बाद बड़े पर्दे पर आ रहे हैं। हालांकि जॉन मानते हैं कि वह उन एक्टरर्स में कभी नहीं रहे, जो इनसिक्योरिटी की वजह से साल में चार से पांच फिल्में साइन कर लेते हैं। बतौर प्रोड्यूसर कभी भी एडल्ट कॉमेडी में पैसा ना डालने का दावा करने वाले जॉन ने कहा कि वह विक्की डोनर,मद्रास कैफे और परमाणु जैसी फिल्मों का ही निर्माण करेंगे। जॉन के मुताबिक, “डांस कर के मैं थक चुका हुं, बॉडी थक जाती है, थोड़ी जॉगिंग की ज़रुरत है। दिमाग को भी जॉगींग करनी पड़ेगी अगर कुछ नया करना है तो रिस्क नहीं लिया तो क्या फायदा?”

खास बात है कि ये फिल्म काफी समय से विवाद में थी। प्रेरणा अरोड़ा और क्रिअर्ज एंटरटेनमेंट के साथ चल रहे कोर्ट केस में जॉन की जीत हुई है और अब फिल्म रिलीज़ के लिए तैयार है। जॉन मानते हैं कि फिल्म को रिलीज़ करना न्यूक्लियर टेस्ट की तरह था।

“हीरो वर्दी से नहीं इरादों से बनते हैं” , इस तरह के दमदार डायलॉग के साथ बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज हो रही इस फिल्म में, इस हीरो के क्या इरादे हैं यह देखना दिलचस्प होगा।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।