कई बार कुछ फिल्मों से अपेक्षा कम होती है, लेकिन वह बेहतर प्रदर्शन कर जाती है। इस हफ्ते कुछ ऐसा ही हुआ है। दर्शकों को फिल्म ‘जलेबी’ से ज़्यादा अपेक्षा ‘हेलीकॉप्टर ईला’ से थी। लेकिन बात की जाए तो फिल्म ‘जलेबी’ दर्शकों को ज़्यादा पसंद आएगी। फिल्म में फिल्म के टाइटल की ही तरह मिठास भी है और जिंदगी के कई बार उलझ जाते रिश्तों का एहसास भी।

फिल्म की कहानी


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यह बंगाली फिल्म की रिमेक है

1 घंटे 13 मिनट की फिल्म ‘जलेबी’ को पुष्पदीप भारद्वाज ने डायरेक्ट किया है। फिल्म के प्रोड्यूसर है महेश भट्ट और विशेष फिल्म्स। यह फिल्म 2016 में रिलीज़ हुई बंगाली फिल्म ‘प्रक्टान’ की रिमेक है। यह फिल्म एक शादीशुदा कपल की कहानी हैं, जो एक दूसरे से अलग तो हो चुके हैं, लेकिन आज भी एक दूसरे से प्यार करते हैं। फिल्म में इन किरदारों को रिया चक्रवर्ती (आयशा) और वरुण मित्रा (देव) ने निभाया है। एक ट्रेन की जर्नी के दौरान आयशा की मुलाकात देव की पत्नी (जिससे देव आयशा से अलग होने के बाद शादी कर चुका है) के साथ होती है। आयशा को इस बात का एहसास है कि उसने अपने प्यार को हमेशा के लिए खो दिया हैं, लेकिन देव की पत्नी से मिलकर उसे इस बात पर शक होता है कि क्या कभी देव ने उससे सच्चा प्यार किया भी था या फिर सब कुछ एक दिखावा था। अचानक ही देव भी उसी ट्रेन में आ जाता है। पति , पत्नी , बेटी और एक्स प्रेमिका जो कभी पहले देव की पत्नी रह चुकी है सभी एक ही ट्रेन और एक ही कोच में है। ये बात ज़ाहिर है कि देव और आयशा आज भी एक दूसरे से प्यार करते हैं। फिर दोनों अलग अलग क्यों हुए, क्यों दोनों प्यार करते हुए भी एक साथ नहीं रहना चाहते? ऐसे ही कई सवालों का जवाब है खट्टे मीठे रिश्तों के मिठास से भरी ये जलेबी।

फिल्म में किरदारों का अभिनय


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यह फिल्म किसी मंझे हुए कलाकार के साथ बनाई जाती, तो हिट होती

ये वरुण मित्रा की पहली फिल्म है। फिल्म में वह टूरिस्ट गाईड की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे दिल्ली की संकरी गलियों से, पुराने खंडहर हो चुके घर से प्यार है। पढ़ा लिखा है, लेकिन इसी को वो अपनी जड़े मानता है। उसे आयशा से प्यार है, लेकिन प्यार की खातिर वो उसके सपनों को नहीं कुचलना चाहता। ज़ाहिर है कि देव का किरदार कुछ ऐसा है, जो ज़मीन से जुड़ा है और जिससे वो प्यार करता है उसकी खुशी के लिए कितने भी दर्द झेल सकता है। वरुण मित्रा ने इस किरदार को काफी सादगी के साथ निभाया है। पहली फिल्म के हिसाब से उनकी कोशिश बेहतरीन है। इस फिल्म में इमोशन्स के उतार चढाव को उन्होनें जिस तरह से पर्दे पर दिखाया है वह खूबसूरत है।

रिया चक्रवर्ती इस फिल्म में आयशा का किरदार कर रही है। जो अमीर घर से है। बिंदास है और उसे रिश्ते और दुनियादारी की इतनी समझ नहीं। हालांकि वो फिर भी अपने प्यार की खातिर बहुत कुछ कुर्बान करती है। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है कि वो बिना सोचे समझे कदम उठा लेती हैं। देव से प्यार है, लेकिन उसे अपनी एक पहचान भी चाहिए। दरअसल रिया से आज की कई लड़कियां खुद को रिलेट कर सकती है। जिन्हें प्यार के साथ साथ अपनी पहचान भी चाहिए। रिया के किरदार में भी काफी शेड्स है, लेकिन उनका अभिनय आपको इतना नहीं लुभा पाएगा। फिल्म में उनके पास और भी बेहतर करने की गुंजाईश थी। जिसका मौका रिया ने गंवा दिया।

फिल्म देखे या नहीं


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फिल्म में रोमांटिक और सेड सांग है

भट्ट कैंप की फिल्में एक बार देखने लायक ज़रुर होती है। इस फिल्म में भी फिल्म की कहानी, फिल्म की सिनेमाटोग्राफी देखने लायक है। फिल्म का म्यूज़िक भट्ट कैंप का नहीं लगता, अक्सर विशेष फिल्मस से बेहतर गीतों की उम्मीद की जाती है। फिल्म का फ़र्स्ट हॉफ आपको बोर कर सकता है, लेकिन पूरी फिल्म देखने पर आपको यह फिल्म अच्छी लगेगी।

‘उनसे मोहब्बत कमाल की होती है, जिनसे मिलना मुकद्दर में नहीं होता’ फिल्म में इस्तेमाल की गई इस शायरी में ही पूरी फिल्म की कहानी है। अगर आप भी मोहब्बत के इस एहसास से रुबरु होना चाहते हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं। हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को 2.5 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।