अपने हर किरदार को काफी रियलिस्टिक तरीके से निभाने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपनी अगली फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में एक फोटोग्राफर का किरदार करते नज़र आएंगे। अपने हर किरदार में कुछ नया करने की कोशिश करते नवाज़ के अनुसार उन्होंने अपनी ज़िंदगी में 3000 लोगों को इतनी बारीकी से ऑब्ज़र्व किया है कि वह अगले 100 सालों तक नए-नए किरदारों को आसानी से निभा सकते हैं। इतना ही नहीं, फिल्म फोटोग्राफ में फोटोग्राफर की भूमिका निभाने वाले नवाज़ को उनकी ज़िंदगी का पहला रोल और ऑडिशन एक फोटोग्राफर के किरदार के लिए ही देना पड़ा था। भले ही उनको वह किरदार ना मिला हो, लेकिन इतने सालों बाद वह फोटोग्राफर बन कर ही सुनहरी पर्दे पर आ रहे हैं।

जब बनवाया था पहला पोर्टफोलियो

मुबंई आने के 3 साल बाद बनाया था पहला पोर्टफोलियो

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उतर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर जिले के बुडाना नाम के छोटे से शहर में पले-बढ़े नवाज़ साल 2000 में एक्टर बनने की चाह से मुंबई आ गए। लगातार कई सालों के संंघर्ष के बाद साल 2003 में उन्हें अपना पहला पोर्टफोलियो बनवाने का मौका मिला। लगभग 6000 हजार रुपए देकर खिंचवाए गए उस पोर्टफोलियो की यादें ताज़ा करते हुए नवाज़ बताते हैं, “मैंने अपना पहला पोर्टफोलियो मुंबई आने के तीन साल बाद, साल 2003 में बनवाया था। जब मेरे पास कहीं से पैसा आया था। जुहू में एक फोटोग्राफर है, तो सभी स्ट्रगलर उसी से फोटो खिंचवाते थे, मैंने भी अपना पहला पोर्टफोलियो वहीं से बनवाया था। सब वहीं जाते थे उस समय पोर्टफोलियो के लिए। एक बहुत ही मोटी एल्बम थी मेरे पास, जो मैं आज तक कही भी लेकर नहीं गया। उस समय मैंने 5000 से 6000 रुपया फोटो खिंचवाने के लिए दिया था।”

जब पहला ऑडिशन बतौर फोटोग्राफर के रोल के लिए दिया था

नवाज़ ने कई छोटे छोटे किरदार निभा अपने करियर की शुरुआत की

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रितेश बत्रा की फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में फोटोग्राफर का रोल निभाने वाले नवाज के लिए यह एक इत्तेफ़ाक ही है कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी का पहला ऑडिशन फोटोग्राफर के रोल के लिए ही दिया था। हालांकि वह फिल्म भले ही उन्हें ना मिल पाई हो, लेकिन अब उन्हें इस फिल्म में फोटोग्राफर बनने का मौका मिला है। असली ज़िंदगी में फोटोग्राफी का बिल्कुल भी शौक ना रखने वाले वाले नवाज़ अपने इस किरदार के लिए कई रियल लाइफ फोटोग्राफर से भी मिले। नवाज के मुताबिक, “गेटवे ऑफ इंडिया पर फोटोग्राफर रहते हैं, हमने उन लोगों को बुलाया था और उनसे मैंने फोटोग्राफी सीखी थी। वह कैसे मशीन में डालते हैं और प्रिंट निकालते हैं, मैंने सब कुछ सीखा। मैंने उनकी बॉडी लैंग्वेज भी सीखी कि वो लोग कैसे पूरा दिन काम करते हैं, उनके बात करने का ढंग और सबसे महत्वपूर्ण यह था कि उनकी एनर्जी जब सुबह सूरज आता है तब एकदम हाई होती है। काला पैंट औऱ सफेद शर्ट पहन कर आते हैं और दोपहर होते-होते तक एकदम थक जाते हैं और वही थकावट और बॉडी लैंग्वेज फिल्म में मेरे किरदार में भी देखने को मिलेगी। वह सभी दोपहर तक ऐसे ही हो जाते हैं जैसे मरियल जैसे, उसी चीज़ को मैंने भी फिल्म में दिखाने की कोशिश की है।”

जब संघर्ष के दौरान मुंबई का चप्पा चप्पा छान मारा

नवाज़ फिल्मों में आने से पहले नाटक किया करते थे

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नवाजुद्दीन उन अभिनेताओं में से है, जिन्होनें हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में अपने बलबूते पर नाम कमाया। अपनी हर फिल्म के लिए पूरी तरह रिसर्च कर किरदार में डूब जाने वाले नवाज़ साल में लगभग 3 से 4 फिल्में करते है। नवाज़ का कहना है कि संघर्ष के दौरान लगभग 3000 लोगों को इतनी बारीकी से ऑब्जर्व किया है कि वह अगले आने वाले 100 साल तक भी ओवरएक्सपोज़ नहीं हो सकते और अलग अलग तरह के किरदार कर सकते हैं। नवाज़ की माने तो, “ मैंने अपनी ज़िंदगी में थियेटर में 200 नाटक किए है। रियल लाईफ में 3000 लोगों को ऑब्जर्व किया है, जब मेरे पास 10 साल तक काम नहीं था तब मैं यही करता था। आने वाले 100 साल भी मुझे काम मिलेगा तो भी मैं ओवर एक्सपोज़ नहीं हो सकता क्योंकि मेरे पास इतना मसाला है। जब मैं संघर्ष कर रहा था, तो लोगों को देखता था। लोगों को बोरीवली के बारे में पता ही नहीं होता कि कौन सा गांव और शहर है। मैंने संघर्ष के दौरान पूरा मुंबई देखा हुआ है चल चल कर।”

नवाज़ की फिल्म ‘फोटोग्राफ’ 15 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ होगी। इस फिल्म में नवाज़ के साथ सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में है। फिल्म का निर्देशन ‘लंचबाक्स’ जैसी खूबसूरत फिल्म का निर्देशन कर चुके रितेश बत्रा ने किया है। खास बात है कि फिल्म फोटोग्राफ बर्लिन और सनडांस में काफी प्रशंसा बटोर चुकी है।

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