क्या किसी टूरिस्ट फोटोग्राफर को फोटो खिंचते हुए किसी टूरिस्ट से प्यार हो सकता है? क्या लंचबॉक्स में खाने के साथ भेजी हुई चिट्ठीयों को पढ़ कर दो लोग आपस में प्यार कर सकते हैं? आपको सुनने में यह प्रेम कहानियां काफी अलग लगे, लेकिन हमारे आस पास की ऐसी ही प्रेम कहानियों को निर्देशक रितेश बत्रा अपनी फिल्मों में लेकर आते है। बहुत ही जल्द वह फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में भी ऐसी ही साधारण सी लगती लवस्टोरी को पेश करने वाले है। उनकी इस फिल्म में नवाजुद्दीन औऱ सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे। सादी और साधारण दिखती ऐसी ही लव स्टोरी को लेकिन नवाज़ रियल मानते है, उनका मानना है कि दर्शकों को बॉलीवुड में दिखाई जाने वाली प्रेम कहानियों की आदत हो गई है, जो सच्ची नहीं, क्योंकि हिन्दी फिल्में अक्सर झूठी और नकली प्रेम कहानियों को ही पेश करता है।

सच्ची प्रेम कहानियां हमारे आस पास है

फिल्म ‘फ़ोटोग्राफ़’ भारत में 15 मार्च को रिलीज़ होगी

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दरअसल बॉलीवुड की सबसे बड़ी ख़ासियत है यहां कि फिल्मों में दिखाया जाता रोमांस, नाच और गाना। हालांकि समय बदलने के साथ साथ फिल्मों की कहानियां और उसको कहने का ढ़ंग काफी बदल रहा है। इतना ही नहीं आज दर्शक भी कई अलग-अलग कहानियों की मांग करते है। फिल्म ‘फोटोग्राफ’ में भी मुख्य भूमिका निभाने वाले नवाज़ को लगता है कि बड़े परदे पर ऐसे रोमांस को दिखाया जाना चाहिए जो रियल लगे। बॉलीवुड में घोड़े पर चढ़कर, नाचने गाने वाले रोमांस में सच्चाई नहीं होती। नवाज़ का यह भी मानना है कि दर्शकों को भले ही बॉलीवुड में अब तक परोसे जाते रोमांस की आदत हो गई हो, लेकिन वह रोमांस झूठा होता है, जो हमें रियल लाइफ में देखने को नहीं मिलता। नवाज़ के मुताबिक, “ असली ज़िंदगी में हज़ार तरीके की लव स्टोरी होती है और काफी मज़ेदार होती है। हम उन्हे कभी कैप्चर नहीं करते। हमे लगता है कि एक लड़का और लड़की होते है और उनका प्यार ऐसा ही होता है, जो फिल्मों में दिखाया जाता है। दरअसल, बॉलीवूड जैसी प्रेम कहानियां तो रियल लाइफ में होती ही नहीं है। फिल्मों में दिखाई गई लवस्टोरी फेक होती है, झूठी होती है। रियल लाइफ में तो काफी साधारण सी होती है प्रेमकहानियां । आपको भी पता नहीं चलता कि क्या होता चला गया।”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भारतीय फिल्मों को मज़ाक में नहीं लिया जाता


नवाज़ की कई फिल्में कान, बर्लिन औऱ सनडांस का हिस्सा रह चुकी हैं

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‘ब्लैक फ्राइडे’ से लेकर ‘फ़ोटोग्राफ़’ तक कई फिल्मों के सिलसिले में अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का हिस्सा रह चुके नवाजुद्दीन सिद्दीकी, कान, सनडांस और बर्लिन फेस्टिवल कई बार जा चुके है। हाल ही में फिल्म ‘फोटोग्राफ’ के लिए बर्लिन और सनडांस गए नवाज़ को लगता है कि भले भारतीय फिल्मों को फिल्म फेस्टिवल में पहले मज़ाक में लिया जाता था, लेकिन अब अनुराग कश्यप और रितेश बत्रा जैसे फिल्मकारों की वजह से भारतीय फिल्मों को भी काफी गंभीरता के साथ लिया जाता है। नवाज़ के मुताबिक, “ भारत की फिल्मों को अब विदेशों में काफी गम्भीरता ले रहे हैं। विदेश में इंडिया का सबसे पोपुलर डायरेक्टर अनुराग कश्यप और रितेश बत्रा दोनों ही है। इन दोनों निर्देशकों को लोग वहां जानते है। रितेश बत्रा की ‘लंच बॉक्स’ ने यहां से तीन गुना पैसा वहां कमाया था। विश्व की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली फिल्मों में से वो एक है। हम जब ‘फोटोग्राफ’ फिल्म को लेकर बर्लिन गए तो लोग इस फिल्म का इंतजार कर रहे थे। अनुराग और रितेश जैसे निर्देशको की फिल्में है, जो लोगों को बता रही है कि हमारे यहां भारत में भी अच्छा सिनेमा बनता है।”

दरअसल, नवाज़ मानते है कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फिल्मों को काफी सोच समझ कर भेजना चाहिए। अपनी फिल्मों के चलते कई फिल्म फेस्टिवल अटेंड कर चुके नवाज़ का कहना है कि उन्हें यह तो नहीं पता कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भेजी जाने वाली फिल्मों का पैमाना क्या है, लेकिन वह यह ज़रुर जानते है कि विदेशों में लोग फिल्म मज़े के लिए बिल्कुल नहीं देखते। नवाज़ के मुताबिक, “ मुझे नहीं पता कि अंतरराष्ट्रीय फेस्टीवल में फिल्म भेजने के क्या पैमाने है, लेकिन एक गम्भीरता तो फिल्म में होनी ही चाहिए। दरअसल, भारत में हम लोग फिल्म देखने मज़े के लिए जाते है, वो हमारे यहां के लोगों के लिए टाइम पास है। विदेशों में लोग मज़े के लिए फिल्म देखने नहीं जाते। उनको जब वाकई में लगता है कि कोई फिल्म हमारी ज़िंदगी में कुछ ना कुछ बदलाव ज़रुर लाएगी, तब वह फिल्म देखने जाते हैं। फ्रांस, रोम और इटली तो इस तरह के देश जहां बचपन से ही सिनेमा पढ़ाया जाता है। उन लोगों को सिनेमा को लेकर काफी नॉलेज है।”

फिलहाल तो नवाज़ फिल्म ‘फोटोग्राफ’ से 15 मार्च को बॉक्स ऑफ़िस पर आ रहे हैं, इस फिल्म में उनके साथ सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी। सनडांस और बर्लिन दोनों में ही तारीफें बटोर चुकी यह फिल्म देखते है कि भारत में लोगों को कितनी पसंद आती हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।