जातिवाद और समानता के अधिकारों पर अपनी अगली फिल्म ‘आर्टिकल -15’ लेकर आ रहे आयुष्मान खुराना के लिए यह विषय हमेशा से ही दिल के करीब रहा है। दिल्ली में जन्मे और मुंबई आ कर बस चुके आयुष्मान के मुताबिक मुंबई जैसे शहर को छोड़ हर जगह पर जातिवाद बहुत ज्यादा है। इस मुद्दे पर हमारे एजुकेशन सिस्टम को ही गलत मानने वाले आयुष्मान का मानना है कि स्कूलों और घर में इस बात की शिक्षा देकर हम इस समस्या को मिटा सकते हैं। आयुष्मान के मुताबिक मुंबई जैसे ही पूरे हिंदुस्तान को होना चाहिए, जहां जाति और धर्म के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। दरअसल, उनकी आने वाली फिल्म भी ऐसे ही विषय पर आधारित है। जिसका ट्रेलर कुछ दिन पहले ही लांच किया गया, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। आप भी देखे इस ट्रेलर की झलक

मुंबई जैसा ही पूरा हिन्दूस्तान हो

दरअसल अनुभव सिन्हा आयुष्मान के साथ एक रॉम कॉम बनाना चाहते थे

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कई तरह का दलित लिटरेचर पढ़ने वाले आयुष्मान को दरअसल यह फिल्म सामने से नहीं, बल्कि मांगने पर मिली है। अनुभव सिन्हा की ‘मुल्क’ देख उससे काफी प्रभावित होने वाले आयुष्मान खुद भी कुछ इसी तरह की फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। आयुष्मान के मुताबिक, “मैं अनुभव सर से मिलने गया था, उन्होनें रॉम कॉम ऑफर की थी, लेकिन मैंने उन्हें कहा कि मैं मुल्क का बहुत बड़ा फैन हूं, जिस तरह से मुल्क में आपने कम्यूनल इश्यु को डील किया है, वैसे किसी हिन्दी फिल्म में किया नहीं गया है। मैं काफी लिटरेटचर पढ़ चुका हूं, दलित लिटरेचर खास कर के और कास्ट सिस्टम के विरुद्ध में हूं, तो यह सुनकर वो काफी आश्चर्यचकित हुए क्योंकि उनको लग रहा था कि एक्टर अक्सर ऐसी चीज़ो के बारे में पढ़ते नहीं है। उनको तो पहले इस बात को लेकर हिचकिटाहट थी कि बतौर पुलिस अफ़सर मैं कैसा लगूंगा।”

हालांकि इस विषय पर जानकारी होने की वजह से भले ही आयुष्मान को यह फिल्म मिल गई हो, लेकिन फिल्म में पहली बार पुलिस का किरदार करना उनके लिए आसान नहीं था। अपने किरदार को रियालिस्टिक बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले आय़ुष्मान के मुताबिक जात-पात जैसी समस्याओं से भले ही मुंबई जैसे बड़े शहर को जूझना ना पड़ता हो, लेकिन पूरे हिन्दूस्तान में यह काफी बड़ी समस्या है. आयुष्मान के मुताबिक, “मैं इस विषय को बहुत फील करता हूं। मुंबई ही ऐसी जगह है, जहां आप जैसे इंसान है और आपका टैलेंट है उससे आपकी पहचान बनती हैं। बहुत अलग शहर है यह बाकी शहरों से और ऐसा ही परे हिन्दूस्तान में होना चाहिए। आपकी जाति को लेकर इतना बवाल या चर्चा नहीं होनी चाहिए। बाहर के देशों में ऐसा है ही नहीं, हमारा ही एक देश है। जहां पर जाति के आधार पर बर्तन अलग होते है हमारे घर में काम करने वालों के, बाहर के देश में हम ड्राइवर के साथ बैठ कर खाना भी खा सकते हैं।”

स्कूलों में जातिवाद पर पढ़ाई बंद होनी चाहिए

आयुष्मान पहली बार पुलिस अफसर का किरदार निभा रहे हैं

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सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर बनाई गई इस फिल्म की शूटिंग लगभग 31 दिन तक उत्तरप्रदेश में की गई। फिल्म में दलितों पर होते अत्याचार की बात उठाने वाले आयुष्मान के मुताबिक यह फिल्म इस मुद्दे पर कई लोगों की आंखे खोल कर रख देगी। आयुष्मान की मानें तो फिल्म में दिखाए गए कई किस्से जातिवाद पर विश्वास रखते लोगों के दिल को भी छूं जाएंगे। हालांकि हमारे देश में मौजूद इस समस्या के लिए वह हमारे देश के सिस्टम और हमारी पढ़ाई को ज़िम्मेदार मानते हैं। आयुष्मान के मुताबिक, “ यह हमारे देश के सिस्टम का हिस्सा है, जो धीरे धीरे निकलेगा। हमें इतिहास में चार वर्णों के बारे में सिखाया जाता है, जिसे छात्र लिखते है। उन्हें यह सब स्कूलों में सिखाया जाता है। इस तरह की पढ़ाई से हमारे छात्र क्या सीख रहे हैं, उन्हें यह क्यों पढ़ाया जाता है? मुझे लगता कि आने वाली जनरेशन को अगर बताया ही ना जाए कि कौन सी कास्ट हमारी है और कौन सी कास्ट उनकी है , तो शायद यह धीरे- धीरे खत्म ही हो जाए।”

ग़ौरतलब है कि आयुष्मान ने पिछले दो सालों में लगातार बॉक्स ऑफिस पर हिट फिल्में दी है। उनकी यह फिल्म आर्टिकल-15, भारतीय संविधान में शामिल समानता के अधिकार के बारे में बात करती हैं। अनुभव सिन्हा निर्देशित यह फिल्म 28 जून को रिलीज़ होगी।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।