फिल्म उरी में सभी का दिल जीत और अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके विक्की कौशल के साल 2019 की शुरुआत काफी बेहतरीन हुई है। उनकी आने वाली फिल्मों में जहां उनके पास एक से एक फिल्में है, वहीं हाल ही में एक और फिल्म का ऐलान हुआ है। विक्की बहुत जल्द ही स्वतंत्रता सेनानी सरदार उधम सिंह का किरदार निभाएंगे। उधम सिंह ने साल 1941 में माइकल ओ ड्वायर की गोली मार कर हत्या कर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लिया था। विक्की की इस फिल्म का निर्देशन सुजीत सरकार करने वाले हैं।

विक्की का सपना हुआ पूरा

फिल्म की शूटिंग अगले महीने शुरु होगी, जो अगले साल रिलीज़ होगी

मद्रास कैफे, पिंक, अक्टूबर, पीकू और विक्की डोनर जैसी फिल्में बना चुके सुजीत सरकार अब विक्की के साथ इस फिल्म की शूटिंग बहुत ही जल्द शुरू करने वाले हैं । कई बड़े कलाकारों के सुजीत का कहना है, “विक्की अपने फिल्मी करियर में जिस तरह की फिल्में कर रहा है वह अपने आप में काफी सराहनीय है। मैं एक ऐसा एक्टर चाहता था जो अपनी पूरी जी जान फिल्म में लगा दे। इतना ही नहीं, विक्की पंजाबी है और मुझे अपनी फिल्म के लिए किसी पंजाबी व्यक्ति की ज़रूरत थी। इसीलिए कई ऐसे कारण है जिसकी वजह से मैंने विक्की को चुना।”

वहीं शुरू से ही सुजीत सरकार के साथ काम करने की इच्छा रखते विक्की का कहना है, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मैं सुजीत के साथ काम कर रहा हूं। मैं उनकी फिल्मों का प्रशंसक रहा हूं। वो जिस तरह से उधम सिंह के किरदार को पेश करने वाले हैं, वह काफी एक्स्ट्राऑर्डिनरी और खूबसूरत है। मेरे लिए भी यह एक गर्व की बात है कि मैं उनके जैसे निर्देशक के साथ काम कर रहा हूं। मुझे इस बात पर विश्वास करने में थोड़ा समय लग रहा है कि मुझे उन जैसे प्रतिभाशाली निर्देशक के साथ काम करने का मौका मिल रहा है।

कौन थे उधम सिंह

इस बात पर कई लोगों का कहना है कि उन्होंने

सरदार उधम सिंह का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई में पंजाब के क्रांतिकारी के रूप में दर्ज है। उन्होंने जलियांवाला बाग कांड के समय पंजाब के गवर्नर जनरल रहे माइकल ओ ड्वायर को लंदन में जाकर गोली मारी थी। उत्तर भारतीय राज्य उत्तराखंड के 1 जिले का नाम भी उधम सिंह के नाम पर रखा गया है। उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। दरअसल, उधम सिंह 13 अप्रैल 1919 में घटित जलियांवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे। इस घटना को देख वह तिलमिला गए और उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ ड्वायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ली थी। अपने मिशन को अंजाम देने के लिए उन्होंने, ब्राजील, अमेरिका, अफ्रिका, नैरोबी की यात्रा अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर की। 1934 में वह लंदन पहुंचे और वहां उन्होंने अपने मिशन को अंजाम दिया। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को माइकल ओ ड्वायर का सीना गोलियों से छलनी कर दिया। उन्होंने हत्या करने के बाद वहां से भागने की कोशिश नहीं की और गिरफ्तार हो गए। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 19 को 1940 को उन्हें फांसी दे दी गई।

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