51 वर्षीय बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान ने दो महीने पहले ट्विटर पर जानकारी दी थी कि वह ‘दुर्लभ बीमारी’ से पीड़ित हैं। इसके बाद बॉलवुड फ़िल्मों में काम कर रहे दोस्त ही नहीं बल्कि उनके लाखो करोड़ो फैन्स उनके जल्द ठीक होने की दुआ मांग रहे है. लंदन के अस्पताल में अपनी दुर्लभ बीमारी का इलाज करवा रहे अभिनेता इरफ़ान खान ने यह भावपूर्ण पत्र और कुछ खूबसूरत तस्वीरें अपने मित्र अजय ब्रह्मात्मज से साझा किया है।

इरफ़ान के बेहतरीन काम को देखते हुए उन्हें नेशनल अवार्ड से भी नवाज़ा गया है।

इरफ़ान ख़ान ने अपने पत्र में लिखा हैं हैं कि” कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला था कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं, मैंने पहली बार यह शब्द सुना था। खोजने पर मैंने पाया कि मेरे इस बीमारी पर बहुत ज़्यादा शोध नहीं हुए हैं, क्योंकि यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है।

अभी तक अपने सफ़र में मैं तेज़-मंद गति से चलता चला जा रहा था। मेरे साथ मेरी योजनायें, आकांक्षाएं, सपने और मंजिलें थीं। मैं इनमें लीन बढ़ा जा रहा था कि अचानक टीसी ने पीठ पर टैप किया, “आप का स्टेशन आ रहा है, प्लीज उतर जाएं। ’

मेरी समझ में नहीं आया, “ना ना मेरा स्टेशन अभी नहीं आया है। ’

जवाब मिला, ‘अगले किसी भी स्टाप पर आपको उतरना होगा, आपकी मंज़िल आ गई है।

अचानक एहसास होता है कि आप किसी ढक्कन (कॉर्क) की तरह अनजान सागर में, बड़ी बड़ी लहरों पर बह रहे हैं… लहरों को क़ाबू कर लेने की ग़लतफ़हमी लिए।

इस हड़बोंग, सहम और डर में घबरा कर मैं अपने बेटे से कहता हूं, “आज की इस हालत में मैं केवल इतना ही चाहता हूं… मैं इस मानसिक स्थिति को हड़बड़ाहट, डर, बदहवासी की हालत में नहीं जीना चाहता। मुझे किसी भी सूरत में मेरे पैर चाहिए, जिन पर खड़ा होकर अपनी हालत को तटस्थ हो कर जी पाऊं। मैं खड़ा होना चाहता हूं। ”

ऐसी मेरी मंशा थी, मेरा इरादा था…

हाल ही में इरफ़ान की फ़िल्म ब्लैक मेल आई थी।

इरफ़ान खान आगे कहते हैं कि,”कुछ हफ़्तों के बाद मैं एक अस्पताल में भर्ती हो गया. बेइंतहा दर्द हो रहा है। यह तो मालूम था कि दर्द होगा, लेकिन ऐसा दर्द… अब दर्द की तीव्रता समझ में आ रही है। कुछ भी काम नहीं कर रहा है। ना कोई सांत्वना, ना कोई दिलासा। पूरी कायनात उस दर्द के पल में सिमट आई थी। दर्द खुदा से भी बड़ा और विशाल महसूस हुआ।

मैं जिस अस्पताल में भर्ती हूं, उसमें बालकनी भी है। बाहर का नज़ारा दिखता है। कोमा वार्ड ठीक मेरे ऊपर है। सड़क की एक तरफ मेरा अस्पताल है और दूसरी तरफ लॉर्ड्स स्टेडियम है। वहां विवियन रिचर्ड्स का मुस्कुराता पोस्टर है। मेरे बचपन के ख्वाबों का मक्का, उसे देखने पर पहली नज़र में मुझे कोई एहसास ही नहीं हुआ। मानो वह दुनिया कभी मेरी थी ही नहीं।

मैं दर्द की गिरफ्त में हूं।

इरफ़ान की बीमारी पर अफवाह न फैलाने की गुज़ारिश की सुजीत सरकार ने।

अपने दर्द को बयां करते हुए इरफ़ान आगे लिखते हैं कि ” फिर एक दिन यह अहसास हुआ… जैसे मैं किसी ऐसी चीज का हिस्सा नहीं हूं, जो निश्चित होने का दावा करे। ना अस्पताल और ना स्टेडियम। मेरे अंदर जो शेष था, वह वास्तव में कायनात की असीम शक्ति और बुद्धि का प्रभाव था। मेरे अस्पताल का वहां होना था। मन ने कहा। केवल अनिश्चितता ही निश्चित है।

इस अहसास ने मुझे समर्पण और भरोसे के लिए तैयार किया। अब चाहे जो भी नतीजा हो, यह चाहे जहां ले जाये, आज से आठ महीनों के बाद, या आज से चार महीनों के बाद या फिर दो साल. चिंता दरकिनार हुई और फिर विलीन होने लगी और फिर मेरे दिमाग से जीने-मरने का हिसाब निकल गया।

‘आज़ादी‘ का एहसास हुआ

इरफ़ान खान सिर्फ़ बॉलीवुड में ही नहीं हॉलीवुड में भी अपना नाम कमा चुके है।

पहली बार मुझे शब्द ‘आज़ादी‘ का एहसास हुआ, सही अर्थ में! एक उपलब्धि का अहसास। इस कायनात की करनी में मेरा विश्वास ही पूर्ण सत्य बन गया। वक़्त ही बताएगा कि वह ठहरता है या नहीं। फ़िलहाल मैं यही महसूस कर रहा हूं।

लोगों की दुआ है मेरे साथ

इरफ़ान के फैन भारत देश में ही नहीं विदेशों में भी है
पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।