चार दोस्तों की कहानी ‘हम चार’ आज के युवाओं को पसंद आएगी। कॉलेज, होस्टल और स्कूल में अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताते और मस्ती करती आज की युवा पीढ़ी इस फिल्म के साथ खुद को जोड़ कर देख सकती हैं। अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि दोस्त हम चुन सकते हैं लेकिन परिवार नहीं, लेकिन जब दोस्त ही परिवार बन जाए तो क्या होता है? यही इस फिल्म की कहानी है। दोस्ती में ग़लतफहमी, रूठना और मनाना जैसे कई मुद्दे इस फिल्म में शामिल है। अभिषेक दीक्षित निर्देशित यह फिल्म मेडिकल में पढ़ते 4 युवाओं की कहानी है, जिनकी आपस में गहरी दोस्ती हो गई है। इन चारों की गैंग में तीन लड़के और एक लड़की शामिल है।

कहानी मेडिकल कॉलेज से शुरु होती है। कॉलेज के फ़र्स्ट ईयर में दाखिला लेने आई मंज़री यानी सिमरन शर्मा के साथ हो रही रैगिंग से उसे सेकंड ईयर के तीन लड़के बचाते है। यह तीनों लड़के आपस में पहले से ही अच्छे दोस्त हैं और इस लड़की के साथ मिलते ही यह लड़की भी उनकी गैंग में शामिल हो जाती है। इस तीनों लड़को में प्रीत हरण कमानी ने निर्मित का, अंशुमन मल्होत्रा ने अबीर का तो तुषार पांडे ने सुर्जो का किरदार निभाया है।

फिल्म में एक डायलॉग है कि जब लड़कों में एक लड़की शामिल हो जाए तो सब में तहजीब आ जाती है। इस फिल्म में यही होता है। तीन बदमाश लड़के इस लड़की के मिलने के बाद एकदम शरीफ हो जाते हैं। लेकिन वह इस लड़की की दोस्ती को प्यार समझने लगते हैं और उनकी यही एक गलतफहमी और अनजाने में हुई एक गलती की वजह से यह चारों आपस में अलग हो जाते हैं और अपना मेडिकल करियर बर्बाद कर बैठते हैं। हालांकि कई सालों बाद इन लोगों की फिर से मुलाकात होती है, लेकिन क्या इनकी दोस्ती में पहला जैसा प्यार आ पाता है यहीं फिल्म की कहानी है।

किरदारों का अभिनय


फिल्म के चारों ही किरदार नए है और पहली बार काम कर रहे हैं। हालांकि पहली फिल्म होने के बावजूद चारों ने बेहतरीन काम किया है। फिल्म में सिमरन शर्मा के अभिनय में ठहराव नज़र आता है, वहीं प्रीत कमानी ने अपने किरदार के हर रंग को बखूबी निभाया है। किसान के बेटे बने तुषार पांडे यानी सुर्जो का किरदार फिल्म में जान डाल रहा है। वहीं अबीर यानी अंनशुमन मल्होत्रा के किरदार की सादगी और सच्चाई इस फिल्म में आपको लुभाएगी

राजश्री हमेशा पारिवारिक फिल्में बनाता है। इसलिए यह फिल्म भी आप दोस्तों या फिर परिवार के साथ देख सकते हैं। हालांकि फिल्म का फर्स्ट हॉफ बोरिंग है, लेकिन फिल्म इंटरवल के बाद से काफी मजेदार हो जाती है। फर्स्ट हाफ में डायरेक्शन काफी कमज़ोर है, लगता है कि आप फिल्म नहीं कोई नाटक देख रहे है, लेकिन फिल्म की कहानी के कुछ टर्न और ट्विस्ट आप एन्जॉय करेंगे। अगर आप फिल्म देखने का मन बनाए तो एक बात ज़रुर ध्यान रखिए, कि फिल्म के एन्ड स्क्राल के साथ ही दिखाई जाती व्हाट्सएप चेट को पढ़ना ना भूले, वही काफी मज़ेदार है।

दरअसल, यह फिल्म बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा कर सकती थी अगर इस फिल्म को ‘गली ब्वॉय’ के साथ रिलीज़ नहीं किया जाता। इस फिल्म के साथ एक बड़ी फिल्म रिलीज़ होने के कारण इस फिल्म को छोटे शहरों में कम थियेटर मिले होंगे, जिसका असर इस फिल्म पर ज़रुर होगा।

फिल्म हम चार को आवाज़ डॉट कॉम 2 स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।