11 साल पहले मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमलों की याद यूं तो कभी भी कोई नहीं भूल सकता। आज भी इतने सालों बाद जब हम उस दिन को याद करते हैं, तो कांप उठते हैं। ‘होटल मुंबई’ उसी हमले पर बनाई गई फिल्म है, जिसमें ताज होटल में उन दो दिनों में क्या क्या हुआ था, उस बात को दिखाया गया है। बतौर रिपोर्टर उस हमले को कवर करने के कारण या फिर हर मुंबईकर (मुंबई में रहने वाले) शायद इस फिल्म से आसानी से रिलेट कर सकेगा। लेकिन फिल्म आखिर उन लोगों के लिए भी होती है, जो इस घटना के बारे में नहीं जानते या इस फिल्म से ज़्यादा जानना चाहेंगे। ऐसे में यह फिल्म उस होटल में हुई तबाही की कहानी को विस्तार से साथ बयान करती हैं, लेकिन हमला कैसे, क्यों और अंदर क्या क्या हुआ, इस बारे में जिक्र ज़रुर करती हैं, लेकिन उसकी तह तक नहीं जाती।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी मारस और ज्हॉन कोली ने मिलकर लिखी हैं
फिल्म की कहानी मारस और ज्हॉन कोली ने मिलकर लिखी हैं

एंथनी मारस निर्देशित होटल मुंबई, 26/11 को मुंबई के हाइ प्रोफाइल होटल ताज की कहानी सुनाती है। चार आतंकवादी किस तरह देश के नामचीन होटल की सिक्योरिटी को चीरते हुए होटल में घुस गए, कैसे सुरक्षा दलों को पहुँचने में देर हुई, कैसे मीडिया कवरेज की लापरवाही की वजह से ऑपरेशन लेट हुआ और कैसे होटल स्टाफ और खास कर वहाँ के हेड शेफ हेमंत ओबेराय (अनुपम खेर ) समेट कई होटल के स्टाफ ने मिलकर अपने मेहमानों की जान बचाई क्योंकि इनके लिए ‘अतिथि देवो भव’ था, इसी पर इस फिल्म की कहानी है। फिल्म में वही खून खराबा, निर्दयता से साथ लोगों की हत्या और सब कुछ दिखाया गया है, जो हमने इससे पहले भी इस हमले के बारे में सुन रखा था। समुद्र के रास्ते 10 आतंकवादियों ने मुंबई में घुस कर कैसे इस शहर को तीन दिनों तक थामे रखा उसे इस फिल्म में दिखाया गया है। यूं तो कई जगहों पर इन आतंकवादियों ने तबाही मचाई थी, लेकिन फिल्म मेंं वीटी स्टेशन और लिओपोल्ड कैफे का ज़िक्र करते हुए ताज में इन आतंकवादियों की हलचल को इस फिल्म में विस्तार से दिखाया गया है।

फिल्म कई फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा रही हैं

कई विदेशा नामचीन कलाकार इस फिल्म का हिस्सा है
कई विदेशा नामचीन कलाकार इस फिल्म का हिस्सा है

फिल्म में जहां अनुपम खेर ने ताज होटल के हेड शेफ की भूमिका निभाई हैं, वहीं देव पटेल भी अर्जुन के किरदार में है, जो होटल का ही स्टाफ है और घर पर अपनी प्रेगनेंट बीवी और छोटी बच्ची होते हुए भी, अपने होटल में आए मेहमानों की जान बचाने के लिए अपनी जान दाँव पर लगा देता हैं। देव बेहतरीन एक्टर है। वो अपनी आँखों से बहुत कुछ कह जाते हैं। फिल्म की कास्टिंग को काफी रियल रखा गया है। खास कर होटल में दिखाए गए चार आतंकवादी जिनका किरदार ( मेहरा, सिंह, नायर और कुमार) ने निभाया है। पाकिस्तानी बोलने का उनका लहजा हो या फिर उनके हाव-भाव, यह किरदार इस फिल्म को काफी रियल बना रहे हैं। कई विदेशी कलाकारों को इस फिल्म में जगह मिली है, जो इस फिल्म में उस रात कई विदेशी मेहमानों के साथ हुए सलूक की कहानी बयान करता है। विदेश से भारत अपने नवजात बच्चे के साथ आया एक परिवार कैसे हमला शुरु होने पर इधर-उधर बिखर जाता है और उस बच्चे को बचाने के लिए कैसे दंपति अलग-अलग हो जाते हैं, स्टोरी का यह ट्रेक आपको भावुक कर देता हैं।

फिल्म देखे या नहीं

फिल्म 125 मिनट की है
फिल्म 125 मिनट की है

फिल्म में उस दौरान की कई रियल न्यूज़ फुटेज को शामिल किया गया है। ताज के अंदर की तबाही के साथ-साथ, स्टाफ का मदद के लिए आगे आना, सुरक्षा दलों का देरी से पहुँचना जैसी कई सच्चाइयों को फिल्म में दिखाया गया है। कई रियल इवेंट्स और लोगों से मिलकर मिली इन्फोर्मेशन के आधार पर लिखी और बनाई गई इस फिल्म की सिनेमाटोग्राफी कमाल की है। हालांकि फिल्म में आतंकवादियों का जेहाद से जुड़ने का कारण, परिवार को पैसे दिलाने के लिए इस मिशन में शामिल होने की उनकी मजबूरी को भी इस फिल्म में बयान किया गया है।

लेकिन तीन दिन तक मुंबई को दहला देने वाले इन हमलों को देखने वाले और कवर करने वाले बहुत से लोग आज भी मानते है कि इस हमले को रोका जा सकता था, इतनी मौतों को टाला जा सकता था, अगर सुरक्षा दल समय पर आते, अगर होटेल की सुरक्षा और मजबूत होती और ना जाने कई कारणों का जिक्र आज भी कई सालों बाद किया जाता है। बड़े-बड़े होटलों की सुरक्षा व्यवस्था बदलने के लिए ज़िम्मेदार बनने वाले इस हमले पर बनी फिल्म आप देख सकते है, अगर आप मासूम लोगों की हत्या और खून खराबा देखने की हिम्मत रखते है।

Aawaz.com इस फिल्म को 3 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।