fज़िंदगी में आती ज़िम्मेदारियों के चलते न जाने कितनी ही ईला जैसी माओं ने अपने सपनों को सेक्रिफाइज़ किया होगा। प्रदीप सरकार की ये ईला भी ऐसी ही हैं। जिसने अपने बेटे विवान के लिए अपने कई सपनों की कुर्बानी दे दी। अपने बच्चें को पालने और बड़ा करने के चक्कर में खुद की पहचान ही भूल चुकी ईला नाम की इस सिंगल मदर की ये कहानी उन बच्चो और खास कर के उन टीनएजर्स को ज़रूर पसंद आएगी , जिनकी मां हेलीकाप्टर की तरह सारा समय उनके ऊपर ही मंडराती रहती हैं।

फ़िल्म की कहानी

ये फ़िल्म आनंद गांधी के गुजराती प्ले ‘बेटा कागड़ो’ पर आधारित हैं।

एक जवान लड़की, जो सिंगर बनने का सपना देखती हैं। जब भी उसे लगता है कि उसके सपने पूरे होने वाले हैं, तभी कुछ न कुछ अड़चन ज़रूर आ जाती है। आखिरकार ईला शादी कर घर बसा लेती हैं। शादी, बच्चा और फिर अचानक कुछ ऐसा हो जाता है जिसके चलते ईला को बच्चे की परवरिश अकेले ही करनी पड़ती हैं। समय के साथ बच्चा तो बड़ा हो जाता हैं, लेकिन मां उसे आज भी बच्चा ही समझती है। बेटे को भूख लगने से पहले ही खाना मिल जाना, घर लौटने पर डोर बेल बजाने से पहले ही मां का दरवाज़ा खोल देना। बच्चे का ध्यान रखने के लिए बेटे की स्कूल की पिकनिक में मां का पहुंच जाना और फिर मां का भी उसी कॉलेज में एडमिशन ले लेना जिसमे उसका बच्चा पड़ता हैं। धीरे धीरे बेटे को मां का ये प्यार घुटन महसूस होने लगता हैं। उसे अपनी मां से प्यार तो है, लेकिन वो ये बिल्कुल नही चाहता कि उसकी मां की ज़िंदगी सिर्फ उस तक ही सीमित रह जाए। वो कैसे हेलिकाप्टर ईला को उसके सपनों के पंख लगा उड़ान भरना सिखाता है, यहीं इस फिल्म की कहानी है।

कलाकारों का अभिनय

रिद्धी सेन नेशनल अवार्ड जीत चुके सबसे यंग कलाकार है

काजोल काफी समय बाद कोई फ़िल्म कर रही है। खास बात है कि इस फ़िल्म में वो टीनएजर बच्चे की मां बनी हैं। सिंगल मदर, ओवर प्रोटेक्टिव मदर और सेक्रिफाइज़ करने वाली मदर जैसे कई शेड्स उनके इस किरदार में हैं। काजोल ने बेहतरीन एक्टिंग की है, लेकिन कहीं कहीं उनकी एक्टिंग काफी ओवर भी लगती हैं, लेकिन कहते है ना कि दर्द को छिपाने वाले लोग ज़्यादा मुस्कुराते हैं, उनका किरदार उसी तर्ज पर ही होने की वजह से उनकी ओवरएक्टिंग को जस्टिफॉय किया जा सकता है।

उनके बेटे के किरदार मे हैं बंगाली एक्टर रिद्धि सेन, जिनकी यह पहली हिंदी फिल्म हैं। वो नेशनल अवार्ड पाने वाले सबसे यंग एक्टर हैं। फ़िल्म मे उनका किरदार लाजवाब है। भले ही बॉलीवुड में ये उनकी पहली फ़िल्म हो, लेकिन इस फ़िल्म के बाद उन्हें बॉलीवुड से कई ऑफर आएंगे ये बात तो तय है। इतनी कम उम्र में जिस तरह की मैच्योरिटी उनकी एक्टिंग में दिखती हैं वो शानदार है। वह काफी नेचुरल एक्टर हैं।

नेहा धूपिया इस फ़िल्म में छोटा ही सही, लेकिन एक अहम किरदार निभा रही हैं। वो कॉलेज में प्रोफेसर हैं और किसी न किसी तरह ईला को उसके खोये हुए सपने और उससे धीरे धीरे दूर हो जा बेटे से वापस मिलने का काम करती हैं। प्रैक्टिकल के साथ साथ स्ट्रिक्ट टीचर का किरदार नेहा ने निभाया हैं। उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

फ़िल्म देखे या नहीं

फिल्म का निर्देशन प्रदीप सरकार ने किया है

फ़िल्म के निर्देशक प्रदीप सरकार है। इस फ़िल्म से पहले उन्होंने मर्दानी, लागा चुनरी में दाग और परिणीता जैसी फिल्में बनाई है। प्रदीप सरकार अपनी फिल्मों से कुछ ना कुछ नया परोसने की कोशिश ज़रूर करते हैं और उनकी यही कोशिश इस फिल्म में भी दिखती हैं। देखा जाए तो इस फिल्म का मुद्दा वाकई में एक ऐसा मुद्दा है, जो हमारे समाज में हमेशा से चला आ रहा है। बच्चों के लिए सेक्रिफाइज़ करती मां के सेक्रिफाइज़ किस हद तक सही है? मां का प्यार बच्चे के लिए घुटन ना बन जाए तो आखिर प्यार की क्या सीमा होनी चाहिए और क्या वाकई बच्चा चाहता है कि उसकी मां उसके लिए इतने सेक्रिफाइज़ करें, ऐसे कई सवालों का जवाब है यह फिल्म। फिल्म की कहानी बेहतरीन है, जिसे मितेश शाह और आनन्द गांधी ने लिखा है। फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा ढीला है। फिल्म काफी धीमी लगती है। फिल्म में इमोशंस की कमी है। आपको फिल्म के किरदार स्क्रीन पर रोते नज़र आते हैं, लेकिन आपकी आंखें नम नहीं होती। फिल्म में एक या दो गीतों को छोड़ दिया जाए तो फिल्म का संगीत भी इतना खास नहीं। फिल्म की शुरुआत काफी धीमी है। इंटरवल तक फिल्म किसी भी तरह से दर्शकों को बांधे नहीं रख पाती

फिल्म में अगर कुछ अच्छा है तो वह है काजोल और रिद्धि सेन दोनों के बीच की केमिस्ट्री और दोनों का अभिनय। कई ऐसे टीनएजर्स होंगे जो इस फिल्म की ईला से अपनी मम्मी को कनेक्ट कर पाएंगे। फिल्म एक फैमिली फिल्म है और पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती हैं।

हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को ढाई स्टार देता है

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।