निर्देशक: हार्दिक मेहता

मुख्य अभिनेता: संजय मिश्रा, दीपक डोबरियाल

फिल्म की कहानी

कामयाब की कहानी सुधीर(संजय मिश्रा) नामक एक ऐसे कलाकार की कहानी है जो 70 एवं 80 के दशक में नामचीन साइड -रोल्स करने वाला एक्टर हुआ करता था। एक इंटरव्यू के दौरान उसे यह पता चला है कि वह अभी तक 499 फ़िल्में कर चुका है, और अगर वह अपनी 500वीं फिल्म कर लेगा तो शायद उसका करियर इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

बस, इसी उम्मीद से वो फिल्म इंडस्ट्री की तरफ एक बार फिर लौटता है। पर वह देखता है कि ना सिर्फ सिनेमा बदल चुका है, बल्कि लोगों का सिनेमा की तरफ रवैया भी। अपने 500वें रोल की तलाश में भटकते हुए, सुधीर की मदद करता है, कास्टिंग डायरेक्टर गुलाटी(दीपक डोबरियाल)।

फिल्म में सुधीर की 500वीं फिल्म का स्ट्रगल एक तरफ आपको ज़ोर-ज़ोर से हंसने पर मजबूर कर देगा और दूसरी तरफ अपनी असल ज़िंदगी के अंधेरों में डूब चुके इन कलाकारों का दर्द आपको रुला देगा।

फिल्म का लेखन एवं निर्देशन

फिल्म के निर्देशन और लेखन में निर्देशक हार्दिक मेहता की बेजोड़ मेहनत साफ़-साफ़ दिखाई देती है। ‘अमदावाद मा फेमस‘ नामक शॉर्ट फिल्म से राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करे वाले हार्दिक मेहता ने यह बता दिया है कि ‘कामयाब’ उनकी पहली फीचर फिल्म ज़रूर है, पर आख़िरी फिल्म बिलकुल नहीं होगी।

फिल्म के डायलॉग सरल, मगर सटीक हैं। फिल्म छोटी-छोटी परिस्थितियों में बड़े-बड़े, गंभीर विषयों पर मज़ेदार ढंग से चुटकियां लेती हुई दिखाई देती है।

अभिनय

फिल्म दर फिल्म, हर रोल को एक नए आयाम पर ले जाने का हुनर, संजय मिश्रा को बेहद कामयाब कलाकार बनाता है। दीपक डोबरियाल जैसे कलाकार के बारे में अब क्या कहा जाए! शायद वे लाश बनकर भी स्क्रीन पर आएँगे, तो भी आपको एंटरटेन कर के चले जाएंगे।

फिल्म में तीन गाने भी हैं, जिनमें से बप्पी लहरी का गाना ‘ टिम टिम टिम ’ दर्शकों के द्वारा खूब सराहा जा रहा है।

कामयाब देखनी चाहिए या नहीं ?

‘कामयाब’ जैसी छोटे बजट की फिल्म से खुद सुपरस्टार शाहरुख खान ने जुड़कर पूरी इंडस्ट्री को एक बेहतरीन संदेश दिया है, खासतौर पर इंडस्ट्री के उन बड़े प्रोडक्शन हाउसेज़ को जो सिर्फ स्टार वैल्यू पर फिल्म बनाने की वजह से अच्छी कहानियों से दूर होते जा रहे हैं। इस बात के लिए ‘दृश्यम फिल्म्स’ के ‘मनीष मुंद्रा’ तारीफ़ के काबिल है जो ऐसी कहानियों को कई वर्षों से लगातार दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं।

यह फिल्म सिर्फ वन टाइम नहीं, बल्कि टू, थ्री, फोर टाइम वॉच है। फिल्म का निर्देशन, कहानी और कलाकारों का अभिनय, तीनों ही अच्छा और जानदार है। ओवर ऑल ‘कामयाब’ को एक अच्छी एंटरटेनर कहा जा सकता है।

स्टार रेटिंग: 4 स्टार