हम में से कितने लोग अंडरग्राउंड रैपर्स के बारे में जानकारी रखते हैं या रैप सुनते हैं? ज़ोया अख्तर की वेलेन्टाइन डे यानी 14 फरवरी को बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ हो रही ‘गली ब्वॉय’ की ख़ासियत यही है कि यह फिल्म आपको एंटरटेनिंग अंदाज़ में अंडरग्राउंड रैपर्स की कहानी बताएगी। यह फिल्म पूरी की पूरी निर्देशिका ज़ोया अख्तर की है। रणवीर सिंह और आलिया भट्ट ने इस फिल्म के साथ पूरी तरह न्याय किया है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि ज़ोया की टीम में शामिल हर किसी ने अपना बेस्ट परफॉर्म किया है और वही चीज सुनहरी पर्दे पर नज़र आती है जो फिल्म को बेस्ट बनाती है।

फिल्म की कहानी

फिल्म अंडरग्राउन्ड रैपर्स की कहानी है

Image Credit: Gully Boy

कहानी काफी साधारण है। मुंबई के स्लम इलाके धारावी 17 में रहता मुराद यानी रणवीर सिंह एक छोटी सी खोली(कमरे) में अपने 5 और परिवार वालों के साथ रहता है। जिंदगी की छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए संघर्ष करता मुराद लेकिन बड़े सपने देखता है। संगीत में रुचि रखने वाला मुराद जब पहली बार कॉलेज की परफोर्मेंस में MC Sher यानी सिद्दांत चतुर्वेदी को देखता है तो रैप की तरफ खिंचा चला जाता है। उसे यह समझते देर नहीं लगती कि वह रैप को ही अपनी दुनिया बनाना चाहता है। रैपर शेर भी उसे आगे बढ़ने में मदद करता है। लेकिन मुराद का सबसे बड़ा संघर्ष खुद अपनों और खास कर अपने पिता( विजय राज) से ही है, जो उसके बढ़ा होने के सपने को समझने की जगह, उसे उसी खोली और उसी मानसिकता में रखना चाहते हैं, जहां वह खुद कई सालों से रह रहे हैं। मुराद ज़िंदगी में अपनों से और आस पास के लोगों से ठुकराए जाने और बेईज्जत होने के दर्द को अपनी डायरी में लिखता रहता है। इसी दर्द और कुछ बड़ा बनने की चाह में वो मुराद से गली ब्वॉय तक का सफर तय कर लेता है। दरअसल, मुराद की कहानी हर उस इंसान की कहानी है, जो बड़ा होने का सपना देखते है। मुराद की इमोश्नल जर्नी, उसका संघर्ष लोगों को बांधे रखने में कामयाब होता है।

किरदारों का अभिनय

पहली बार रणवीर और आलिया एक साथ काम कर रहे हैं

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रणवीर सिंह को एक्टिंग की खान कहना गलत नहीं होगा। रणवीर में बहुत ही एनर्जी है, लेकिन उस एनर्जी की खास बात यह है कि रणवीर को पता है कि वह एनर्जी कहां और कब लगानी है। उनकी यही एनर्जी और परफॉर्मेंस सुनहरे पर्दे पर देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि अगर वह ‘सिम्बा’ में एस पी संग्राम बनकर आए या ‘गली ब्वॉय’ में मुराद बनकर, हर कोई उनकी एक्टिंग का कायल हो ही जाता है। उनको परदे पर देखकर इस बात का विश्वास ही नहीं होता कि यह वही रणवीर सिंह है, जिसने 9 साल पहले साल 2010 में फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ से डेब्यू किया था। इन 9 सालों में उन्होंने जिस तरह से हर फिल्म के साथ खुद को ग्रो किया है वह काबिले तारीफ है।

वहीं अगर बात करें फिल्म में सफीना का किरदार निभाती आलिया भट्ट की तो आलिया का किरदार इस फिल्म में जान डाल देता है। वह छोटा ही सही लेकिन बेहतरीन है। वह मेडिकल स्टूडेंट है और डॉक्टर बनने का सपना रखती है। उसकी भी लड़ाई खुद अपने घर और घर वालों से ही है। लड़की होने की वजह से कैसे उसको हर वह आज़ादी नहीं मिलती, जिसकी हकदार एक लड़की भी है। फिल्म में किरदार के लिए भाषा पर पकड़ और जिस तरह के हावभाव इस किरदार की ज़रूरत थी, उसे आलिया ने बखूबी निभाया है। अपने प्यार के लिए सबको धोपूंगी करने वाली आलिया को देख कर लगता है कि वह वाकई अपनी परफोर्मेंस से सभी को धोपने के लिए तैयार है।

कैसा है रैप

फिल्म को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहना मिली

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अंडरग्राउंड रैपर नेज़ी और डिवाइन से यह फिल्म प्रेरित है तो ज़ाहिर सी बात है कि फिल्म में रैप तो होगा ही। फिल्म प्रमोशन के दौरान ज़ोया अख्तर ने बताया था कि इस फिल्म में लगभग 18 रैप है, जो बैकग्राउंड, कविता और गीत के तौर पर है। लगभग ढाई घंटे की फिल्म में 18 रेप होने की बात सुनकर शायद आपको लगे कि फिल्म सिर्फ गीतों से भरी होगी, लेकिन फिल्म की खास बात यह है कि इस फिल्म का हर रैप फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है। आप उससे उबने की जगह सोचते हैं कि कब नया और अगला रैप आएगा। हर रैप एक दूसरे से अलग है। फिल्म में कई रियल रैपर्स को चांस दिया गया है साथ ही फिल्म के लिए कई रियल रैपर ने ही रैप लिखे हैं और यही कारण है कि आपको फिल्म के रैप काफी रियलिस्टिक लगते है। बॉस्को-सीजर की कोरियोग्राफी ने रैप परफॉर्मेंस में जान डाल दी है, जो काफी रियलिस्टिक महसूस होती है।

हालांकि फिल्म का फर्स्ट हॉफ काफी एंटरटेनिंग है। सेकंड हॉफ में फिल्म थोड़ी खींची हुई ज़रूर लगती है लेकिन फिल्म आपको पूरी तरह से एंटरटेन करने में सफल होगी। फिल्म में स्लम में रहते टैलेंट के खज़ाने की कहानी के साथ साथ, महिलाओं की आज़ादी, बाल मज़दूरी जैसे कई मुद्दों को कहानी में बेहद खूबसूरती के साथ पिरोया गया है, जिसके लिए रीमा कागती और ज़ोया दोनों की ही तारीफ करनी होगी। बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को काफी सराहना मिली थी। हालांकि इस फिल्म को देखकर एक बात तो साफ हो ही जाती है कि ज़ोया अख्तर ने इस फिल्म में काफी मेहनत की है, रीमा कागती की कहानी ने उसमें जान डाली है, विजय मौर्य के डायलॉग से फिल्म निखरी है, तो रणवीर और आलिया ने उसे इस तरह से परफॉर्म किया है कि हर आम आदमी उससे कनेक्ट हो सकेगा। यह फिल्म 4 स्टार के लायक है। आवाज डॉट कॉम आपको यही सलाह देगा कि अगर आप अपने इस वेलेंटाइन को डे को खास बनाना चाहते हैं तो यह फिल्म आप ज़रूर देखें।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।