कल 10 फरवरी को 61 वें ग्रैमी अवार्ड्स का आयोजन किया गया था, जिसमें लेडी गागा से लेकर केसी मसग्रेव्स और ब्रैंडी कारलाइल ने भी अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीत लिया। इस समारोह में म्युज़िक जगत से जुड़ी हुई बड़ी हस्तियां शामिल हुई थी। यह आयोजन लॉस एंजलिस के स्टेपल्स सेंटर में आयोजित किया गया था, जहां कई बड़ी हस्तियों ने दमदार परफॉर्मेंस दी।

इस समारोह में भारत से तीन म्युज़िशियन को नॉमिनेट किया गया था। इन तीनों म्यूजिशियंस में से भारत की पहली महिला गायक नॉमिनी बनी फाल्गुनी शाह, जिन्हे अपनी मधुर आवाज़ की वजह से नॉमिनेट किया गया था। इसके अलावा प्रशांत मिस्त्री और स्टैनम कौर भी एक थीं। हालांकि इस तीनों में से किसी को भी पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन संगीत जगत के इतने महत्वपूर्ण अवार्ड समारोह में नॉमिनेट होना अपने आप में अलग बात साबित हुई। इस साल लेडी गागा को तीन अलग-अलग कैटेगरीज़ के लिए इस अवार्ड से सम्मानित किया गया, जिसमें उनके गीत ‘वेयर डू यू थिंक यू गोइंग’ के लिए के पहला अवार्ड दिया गया। इसके अलावा एरियाना ग्रेनेड, ड्रेक, विली नीलसन को भी ग्रैमी सम्मान से नवाज़ा गया।

भारतीय कलाकारों का रहा बोलबाला

आपको जान कर हैरानी होगी कि ये तीनों कलाकार भारतीय मूल के हैं, जिसमें से फाल्गुनी शाह को फालूज़ बाज़ार के लिए बेस्ट चिल्ड्रन म्यूज़िक केटेगरी में नॉमिनेट किया गया था, वहीं स्टैनम कौर खालसा को बिलवेड और प्रशांत मिस्त्री को सिम्बल के लिए नॉमिनेट किया गया था।

ये भारतीय भी कर चुके हैं ग्रैमी तक की यात्रा

इससे पहले कई ऐसे भारतीय कलाकार है जिन्होंने ग्रैमी में भारत का नाम रोशन किया है। इनमें से एक नाम है भारत के मशहूर संगीत निर्देशक ए आर रहमान, जिन्होंने अपनी फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर के ज़रिये लोगों के दिल को छुआ था। इसके अलावा अनुष्का शंकर को भी कई बार ग्रैमी के लिए नॉमिनेट किया गया था, लेकिन वे पुरस्कार नहीं जीत पाईं। इससे पहले संदीप दास ने साल 2017 में सिंग मी होम के लिए ग्रैमी जीता था। इस गाने को बेस्ट वर्ल्ड म्युज़िक एल्बम की कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था।

क्या है ग्रेमी

ये अवार्ड्स हर साल द रिकॉर्डिंग एकेडमी द्वारा हर साल दिया जाता है। यह खास तौर अंग्रेजी म्युज़िक इंडस्ट्री की उपलब्धियों को दर्शाने और बढ़ावा देने के लिए इसे हर साल आयोजित किया जाता है। सबसे पहला ग्रैमी अवार्ड समारोह 4 मई, 1959 को आयोजित किया गया था। इसके बाद से ही हर साल संगीत से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को यह अवार्ड दिया जाता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..