भारतीय सिनेमा के प्रतिभाशाली कलाकार गिरीश कर्नाड का निधन 81 साल की उम्र में आज बेंगलुरु में हुआ। मल्टीपल ऑग्रेन के फेल होने की वजह से सोमवार की सुबह उनका निधन हुआ है। वह केवल सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक महान लेखक और फिल्मकार भी थे। राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ- साथ, साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले गिरीश कर्नाड पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ था। उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण से भी नवाजा जा चुका है।

कमर्शियल के साथ-साथ आर्ट सिनेमा का भी चेहरा बने

उनकी मातृभाषा कोंकणी थी, लेकिन उन्होनें कन्नड़ और हिन्दी के लिए बहुत काम किया

गिरीश कर्नाड उस दौर में भारतीय सिनेमा का हिस्सा बने, जब कमर्शियल सिनेमा और आर्ट सिनेमा को अलग-अलग गिना जाता था। उन्होनें अपना करियर कन्नड़ फिल्मों से शुरु तो किया, लेकिन बहुत ही जल्द उन्हें उनकी अभिनय की प्रतिभा के कारण हिन्दी फिल्में भी मिलने लगी। जहां 1970 में उन्होनें कन्नड़ फिल्म से शुरुआत की तो, 1974 में उन्हें उनकी पहली हिन्दी फिल्म ‘शंख’ ऑफर हो गई थी। दूरदर्शन के लेकर फिल्मों तक का चेहरा बनने वाले गिरीश कर्नाड की सीरियल ‘मालगुड़ी देस’ में स्वामी के पिता के रुप मे भूमिका हो या फिर हिन्दी फिल्म ‘निशांत’, ‘मंथन’, पुकार और हाल ही में सलमान खान की रिलीज़ हुई फिल्में ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर ज़िंदा है’ से उनको हमेशा याद रखा जाएगा।

पद्मश्री और पद्मभूषण से किया जा चुका है सम्मानित

थिएटर में भी उनके योगदान के लिए सराहा गया

अपने करियर की शुरुआत में चेन्नई ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में काम करते हुए उन्होनें वहां के थियेटर के साथ काम करना शुरु किया और धीरे धीरे नौकरी छोड़ राइटिंग को ही अपना फुलटाइम करियर चुना। कन्नड़ भाषा में उनके नाटकों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी में भी किया गया, जिसे खूब सराहना मिली। 1961 में 23 साल की उम्र में उनका लिखा नाटक ‘यायाती’ हो या फिर उसके 3 साल बाद साल 1964 में उनका लिखा नाटक ‘तुगलक’, दोनों ही नाटकों ने उस दौरान कन्नड़ नाटक की परिभाषा को बदल दिया। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। अभिनय के साथ-साथ लेखनी पर भी उनकी पकड़ थी। उन्होनें कन्नड़ और हिन्दी फिल्मों का निर्देशन भी किया । 1971 में बतौर निर्देशक उन्हें फिल्म ‘वंश वृष’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिन्दी सिनेमा में भी उन्होनें 1977 में ‘गोधिल’ 1984 में फिल्म ‘उत्सव’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।

गिरीश कन्राड की कमी हमेशा ही भारतीय सिनेमा को खलेगी।

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