हम अक्सर हिन्दी सिनेमा में नए तरह की और अलग हटकर कहानी होने की बात करते हैं, एक ऐसा कहानी, जो मनोरंजन के साथ-साथ कुछ नया बताती है। अश्विन सरवनन की ‘गेम ओवर’ कुछ इसी तरह की फिल्म है, जो दर्शकों को नाच, गाने , हीरो और हीरोइन से दूर एक अलग तरह का सिनेमा दे रही हैं। तमिल, तेलुगू और हिन्दी में रिलीज़ हुई इस फिल्म में तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में देखने को मिलेंगी।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी निर्देशक के साथ-साथ राम कुमार काव्या और सुमन कुमार ने लिखी है

Image Credit: Game Over Movie Trailer

अश्विन की यह कहानी शुरु होती है दिल्ली के पास गुड़गांव से, जहां एक सीरियल किलर एक जवान लड़की की निर्मम हत्या कर देता है। इस हत्या के बाद एन्ट्री होती है सपना की जो उसी शहर में रहती है, एक गेम प्रोग्रामर है और वीडियो गेम बनाने के साथ-साथ उसका सबसे बड़ा पैशन है वीडियो गेम खेलना। लेकिन वह अपने अधिकतर काम घर से करती है और उसे घर से बाहर जाना पसंद नहीं। दरअसल, नए साल के दिन वह अपनी कलाई पर एक टैटु बनाती है, लेकिन उसी रात उसके साथ कुछ ऐसा घटता है कि जिसके बाद वह खुद को अपनी नौकरानी कला (विनोधिनी) के साथ हाउस अरेस्ट कर लेती हैं। उसे बाहर जाना पसंद नहीं, वो एक नॉर्मल ज़िंदगी जीने की कोशिश तो करती है, लेकिन जैसे ही उसके साथ हुई घटना को एक साल पूरा होने लगता है तो उस पर उस घटना के एनीवर्सरी इफ्केट आने लगते हैं और उसके साथ जो बीतता है उसको देखकर आपके भी रोंगटे खड़े होने लगते हैं। क्यों उसे कोई मारना चाहता है, आखिर उसके साथ हुई घटना का टैटु से क्या लेना- देना है, उसके साथ क्या घटना हुई थी, इन सभी चीज़ो की गुत्थी को ही इस 102 मिनट की फिल्म में दिखाया गया है।

तापसी का अभिनय

पहली बार है जब पूरी फिल्म में तापसी एक मात्र बड़ी कलाकार है

Image Credit: Game Over Movie Trailer

फिल्म में मुख्य किरदार तापसी का है। लगभग डेढ घंटे की इस फिल्म को एक कमरे में फिल्माया गया है। तापसी के माध्यम से निर्देशक अश्विन ने आज भी हमारे समाज में महिलाओं के लिए मौजूद कई समस्याओं को दिखाने की कोशिश की है। महिलाओं की अपने ही घर में लड़ाई, सच्चाई से भागना, लड़ने की बजाए घुटने टेक देने की परिवार से मिलती सलाह के साथ-साथ हमारे समाज में होती लड़कियों की परवरिश पर सीधे-सीधे नहीं, लेकिन फिल्म में कई जगह बहुत सारे रेफ्ररेंस है। पिंक के बाद तापसी का एक बार फिर ऐसे मुद्दे पर फिल्म करना एक कामयाब कोशिश है। तापसी का अभिनय शानदार है। अंधेरे से डर जाना, अपने साथ हुई घटना को लेकर शर्म महसूस करना, सच्चाई से भागना से लेकर आखिर में खुद के लिए खड़े होना और लड़ना जैसे उसके किरदारों के कई शेड्स को तापसी ने शानदार तरीके से निभाया है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि तापसी अगर चाहे तो थिएटर में लोगों को बांधे रखने में कामयाब हो सकती है।

फिल्म देखें या नहीं

यह फिल्म एक साथ तीन भाषाओं में रिलीज़ हो रही हैं

Image Credit: Game Over Movie Trailer

फिल्म का जॉनर थ्रिल और सस्पेंस है, लेकिन कहीं -कहीं यह फिल्म हॉरर और सुपर पॉवर पर बनाई गई फिल्म लगती है। दरअसल, फिल्म की शुरुआत में दिखाई गई निर्मम हत्या के बाद से ही कई लोग इस फिल्म को आगे देखने से सहम जाते हैं। सीरियल किलिंग क्यों, उसके पीछे कौन , तापसी को क्यों कोई मारना चाहता था, पुलिस के आ जाने के बाद भी आखिर तापसी अपनी लड़ाई क्यों खुद लड़ती है, जैसी कई गुत्थी है, जो फिल्म देखने के बाद भी नहीं सुलझ पाती। दरअसल फिल्म को सिर्फ डेढ घंटे का बनाया गया है, निर्देशक चाहते तो फिल्म को थोड़ा और बड़ा कर इसे और रोमांचक बनाया जा सकता था। फिल्म का फ़र्स्ट हाफ़ जहां तापसी के किरदार को इस्टेब्लिश करने में जाता है, वहीं फिल्म के सेकेंड हाफ में जब-जब लगता है कि फिल्म खत्म हुई, तो वो फिर से नए मोड़ के साथ शुरु हो जाती हैं। दरअसल, डर, थ्रिल और सस्पेंस में डेढ़ घंटा बिताने के बाद भी आपको कहानी अधूरी लगती है और वही इस फिल्म की कमज़ोरी है। फिल्म को एक ही घर में मुख्य तौर पर फिल्माया गया है, जो बेहतरीन है और उसका श्रेय फिल्म के सिनेटाग्राफर ए वसंत को जाता है। फिल्म की एडिटींग भी कमाल की है, जिसका श्रेय रिचर्ड केविन को जाता है।

जो लोग कमज़ोर दिल वाले है, वह इस फिल्म से दूर रह सकते है, लेकिन जो लोग सोचते है कि डर के आगे वाकई में जीत है, तो यह फिल्म उन्ही लोगों के लिए है।

आवाज़ डॉट कॉम इस फिल्म को ढाई स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।