लड़कियों को बेवकूफ बना, झूठी शादियां करने वाले अरशद वारसी यानी भोला की कहानी है यह फिल्म। जैसा की फिल्म के नाम से ही साफ है कि इस फिल्म में अरशद वारसी ने फ्रॉड का किरदार निभाया है। वो कैसे और क्यों इतनी शादियां कर लेता है, क्या यह सभी शादियां टिक पाती हैं? आखिर में इस फ्रॉड सईया का क्या होता है, इसी पर पूरी फिल्म है।

फिल्म की कहानी

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अमन दोनवार और शरद त्रिपाठी ने इस फिल्म की कहानी लिखी है

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फिल्म में अरशद भोला नाम का फ्रॉड सईया है, जो 12 लड़कियों से शादी कर चुका है और तेरवी लड़की से करने को तैयार है। उसे कही भी इस बात का अफसोस नहीं है कि वो लड़कियों के साथ गलत कर रहा है। हर किसी को अपने प्यार के जाल में फंसाते भोला को लेकिन आखिर में प्यार हो जाता है। इस फिल्म में उनके साथ है सौरभ शुक्ला, जो हर पल उनका साथ तो निभा रहे है, लेकिन उनका इरादा इस फ्रॉड सईया को पुलिस के हाथ रंगे हाथ पकड़वाना है। फिल्म में एक नहीं 13 लड़कियां है और कुछ आईटम डांस भी। यानि फिल्म में पूरा मसाला डालने की कोशिश की गई है। लेकिन इन सब के बावजूद शायद ही आपको यह फिल्म पसंद आए।

फिल्म में अभिनय


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फिल्म में अरशद के एक ऐसे लालची और फ्रॉड व्यक्ति का किरदार निभाया है। निर्देशन सौरभ श्रीवास्तव ने उन्हे जो किरदार दिया है, उसके मुताबिक वो इतना भोला और साफ दिल है कि कोई भी लड़की उसके में आसानी से आ जाती है। अफसोस अरशद के बेहतरीन एक्टर है, लेकिन यह किरदार उन पर बिल्कुल भी फिट नहीं बैठता है। हालांकि अरशद को फिल्म में देखकर कई बार ऐसा लगा कि वह फिल्म में फिट भी नहीं लगते। आज जहां बाकी एक्टर एक्टिंग के साथ फिट दिखने में इतनी मेहनत करते है, उससे ही अरशद को थोड़ी सीख ज़रुर लेनी चाहिए।

सौरभ शुक्ला अरशद के साथ शुरु से लेकर आखिर तक है। वह अरशद का भांडा फोड़ने के लिए उसके दोस्त बनने का नाटक करते हैं और आखिर कैसे अपने इस मकसद में कामयाब होते है, वह देखने लायक है।

अरशद और सौरभ के बीच की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। दोनों के बीच कुछ लाइट मुमेंटस है, जो लोगों को पसंद आएंगे।

फिल्म देखें या नहीं

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प्रकाश कुट्टी की सिनेमाटोग्राफी अच्छी हैं

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आज कल जहां वुमेन एम्पावरमेंट पर सिनेमा बन रहा है,वहां इस तरह का सिनेमा औरतों को सिर्फ एक वस्तु के तौर पर पेश करता है, वहीं इस फिल्म की सबसे खलने वाली बात है। फिल्म को एक मसाला फिल्म बनाने की कोशिश की गई है, जिसकी वजह से वह कई छोटे शहरों मे, सिंगल स्क्रीन पर शायद लोगों को यह फिल्म पसंद आए। अगर आप अपनी मेहनत के कमाए पैसों के साथ फ्रॉड करना चाहते हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं। आवाज़.कॉम इस फिल्म को डेढ़ स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।