जिनका नाम जहन में आते ही सुफी संगीत की दुनिया में डूब जाने को मन करता है। बॉलीवुड संगीत में अपनी गायकी का एक अलग ही पहचान बनाने वाले इस शानदार गायक पद्म श्री कैलाश खेर को आज भले ही किसी पहचान की ज़रुरत ना हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब लोग उन्हें कहते थे कि वो गायक बनने का सपना भूल जाए।

बिना संगीत सीखे मिला आवाज़ का तोहफ़ा

2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद कैलाश खेर मुंबई आ गए

कैलाश को सूफीयाना आवाज़ का तोहफ़ा मिला था, लेकिन उनकी जिंदगी भी कम संघर्षपूर्ण नहीं रही। कैलाश कहते हैं, “मैंने कभी संगीत की कोई तालीम नहीं ली, ये ईश्वर का आशीर्वाद है, जो मुझे आवाज़ के तौर पर मिला। 13 साल की उम्र में मैंने अपना घर छोड़ दिया क्योंकि मेरे पड़ोसी और परिवार वाले लोग मुझे निकम्मा समझते थे। 13 साल की उम्र से ही मुझे रोटी खाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। कई बार तो मुझे कई दिनों तक भूखा भी सोना पड़ा था।”

ज़िन्दगी से हताश होकर डिप्रेशन का शिकार भी हुआ

कैलाश खेर का एक बैंड भी है ‘कैलासा’

18 साल की उम्र में कैलाश खेर ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर बिज़नेस में हाथ आज़माया, लेकिन नुकसालन झेलना पड़ा। कैलाश कहते हैं कि,”उस वक़्त जो नुक्सान हुआ उस में मेरी सारी जमा की हुई पूंजी चली गई। मैं इतना हताश हुआ की मैं डिप्रेशन में चला गया और तो और फिर अपनी ज़िन्दगी ख़त्म करने के बारे में भी मैंने कई बार सोचा। मैं भगवान को शुक्रिया कहता हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि वो मेरी परीक्षा ले रहे थे, मुझे नई ज़िन्दगी देने से पहले मुझे और मेरी हिम्मत को परख रहे थे।”

लोगों ने कहा गाना गाने का इरादा छोड़ दो

बॉलीवुड में ‘अल्लाह के बंदे’ गाने से मिली कामयाबी

शानदार आवाज़ के धनी कैलाश आगे कहते हैं कि ” जब मैं संगीत सीखने लोगों के पास गया तो उनका कहना था कि मेरी आवाज़ अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर मैं संगीत के क्षेत्र मे आना ही चाहता हूं, तो कुछ बजाना सीखूं और गाने का इरादा छोड़ दूं। मैंने बहुत दिन तक बजाना सीखा। दो साल तक गिटार सीखता रहा। कभी तबला सीखा,लेकिन कुछ सीख नहीं पाया। एक दिन मेरी मुलाकात संगीतकार राम संपत से हुई। उन्होंने मुझे कुछ रेडियो जिंगल गाने का मौका दिया और फिर कहते हैं न कि प्रतिभा के पैर होते हैं, वो अपनी मंज़िल तलाश ही लेती हैं। आधुनिक संगीत और तकनीक के साथ सूफ़ी संगीत वाला फ़ॉर्मूला काम कर गया और आज मैंने 800 से ज़्यादा गाीत गा लिए है। अलग अलग भाषा जैसे तमिल ,कन्नड़ , तेलगु,नेपाली और गुजराती सभी में मुझे मौका मिला है।”

जन्मदिन में नए टैलेंट को देंगे मौका

कैलाश खेर को देश के चौथे सबसे बड़े सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

कैलाश खेर इन दिनों प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े हुए है और साथ ही कई फ़िल्मों को संगीत देने में व्यस्त है। कैलाश खेर न केवल गाते हैं, बल्कि अपने गीत खुद लिखते और कंपोज़ भी करते है। कैलाश का कहना है कि,” मैंने फैसला किया है कि मैं अपने हर जन्मदिन के दिन नए टैलेंट को लांच करुंगा, जिसकी शुरुआत मैं बहुत जल्द करने वाला हूंं।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।