कमांडो 3 , कमांडो की ही सीक्वेल में बनी तीसरी फिल्म है, जिसकी पहली कड़ी साल 2013 में आई थी। विपुल शाह निर्देशित यह फिल्म उनकी पहली दो कमांडो की तरह ही देश भक्ति का संदेश देती हैं। इस फिल्म में जहाँ स्टोरी एकदम बेहूदा है, वहीं एक्शन एकदम उच्च स्तर का है। हालांकि फिल्म की कहानी आपको पुरानी सी ही जान पड़ती हैं। कहानी में कई कोई भी नयापन नहीं हैं। इन दिनों कई फिल्में देश और देश भक्ति के जज़्बे को दिखाती हुई रिलीज़ हो रहीं है, लेकिन फिल्म में कहानी का होना भी ज़रुरी है, जो इस फिल्म में बिल्कुल भी नहीं ।

फिल्म की कहानी

कहानी को डेरियस यारमील और जुनैद वासी ने मिलकर लिखा है
कहानी को डेरियस यारमील और जुनैद वासी ने मिलकर लिखा है

भारत पर अटैक होने वाला है और जब इस बात की सूचना भारत ही खुफ़िया एजेंसी को मिलती है, तो वो उसके मास्टर माइंड को पकड़ने के लिए अपने सबसे बेहतरीन कमांडो करण वीर सिंह डोगरा (विद्युत जामवाल) और ऑफ़िसर भावना रेड्डी (अदा शर्मा) को लंदन भेजती है। लंदन में उनके इस मिशन में साथ देती हैं मल्लिका सूद (अंगिरा धार) और अरमान (सुमित ठाकुर) यह चारों मिलकर कैसे मास्टर माइंड बुराक अंसारी (गुलशन देवैया) का प्लान चौपट करते है, वहीं इस फिल्म की कहानी है। देश में आतंकवाद का खात्मा, धर्म परिवर्तन, जेहाद, एक कौम के को हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराना जैसी चीज़ो को इस फिल्म की कहानी में शामिल किया गया है, जिसे हम पहले भी देख चुके हैं।

फिल्म का एक्शन है हीरो

फिल्म की सिनेमाटोग्राफी मार्क हेमिल्टन की है
फिल्म की सिनेमाटोग्राफी मार्क हेमिल्टन की है

फिल्म में एक्शन हर जगह हावी होता हैं। विद्युत के पास इस फिल्म में करने के लिए एक्टिंग से ज़्यादा एक्शन है, वहीं लड़कियों के लिए भी एक्शन का अच्छा खासा स्कोप है। हालांकि अदा शर्मा फिल्म में थोड़ी बहुत मस्ती और कॉमेडी करती हुई नज़र आती हैं। फिल्म के इन तीनों की सितारों की एक्शन पर पकड़ आपको फिल्म में बांधे रखती हैं। फिल्म में अगर किसी की एक्टिंग की तारीफ करनी चाहिए, तो वो है फिल्म के विलेन गुलशन देवैया की। जिस निर्ममता और क्रूरता की ज़रुरत उनके किरदार की डिमांड है, उसे उन्होनें काफी बखूबी निभाया है।

फिल्म देखें या नहीं

फिल्म 2 घंटे 13 मिनट की है
फिल्म 2 घंटे 13 मिनट की है

हमलों के लिए किसी एक कौम को ज़िम्मेदार ठहराना या फिर अपने देश को हर मुसीबत से बचाने के लिए अपनी जान पर खेल जाता, ऐसे जज़्बे पर कम अक्सर ढेरों फिल्मों में देखते हैं, ऐसी फिल्में देश भक्ति जगाने में कामयाब भी होती है। कमांडो-3 भी ऐसी ही नियत से बनाई गई फिल्म है। इस फिल्म में लेकिन कई लूपहोल्स है। फिल्म का हीरो जिस मास्टर माइंड को पकड़ने दूसरे देश में गया है, वो उसको अपनी हर चाल पहले ही बता देता है, जिसकी वजह से इसकी चाल उसी पर भारी पड़ जाती हैं। फिल्म का फ़र्स्ट हाफ लोगों को फिर भी बांधे रख सकता हैं, लेकिन सेकेंड हाफ काफी लंबा और खींचा हुआ लगता है और एक समय के बाद दर्शक फिल्म का एक्शन देख कर भी ऊब जाते हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं कि फिल्म का संदेश आपका दिल छू जाता हैं। लेकिन देशभक्ति का जज़्बा लिए कोई भी फिल्म क्यों ना हो, वो लोगों को लुभाने में, रुलाने में सफल होती ही है क्योंकि देशभक्ति का फार्मूला कभी भी फेल नहीं हो सकता।

आवाज़ डाट कॉम इस फिल्म को 2 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।