लड़कों की दोस्ती और मस्ती पर बॉलीवुड में ढेरों फिल्में बनी हैं। “थ्री इडियट्स” , “दिल चाहता है” या फिर “ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा” ऐसी कुछ फिल्में हैं , जिसे देख लड़कों को अपने दोस्तों की याद आ जाती है। लेकिन महिलाओं की दोस्ती को हिन्दी फिल्मों में इतने विस्तार से बहुत ही कम दिखाया गया है। कुछ इक्का दुक्का फिल्में ज़रुर हैं , जो आपको किसी सहेली की याद दिला दे, लेकिन ऐसी फिल्मों की लिस्ट काफी छोटी है। बहुत ही जल्द रिलीज़ होने वाली फिल्म “वीरे दी वेडिंग”, चार सहेलियों की कहानी है, जिनकी ज़िंदगी एक दूसरे के बिना अधूरी है। फिल्म में करीना कपूर , सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया चार सहेलियों का किरदार निभा रही हैं। सोनम के मुताबिक “ पहली बार हम ऐसी फिल्म लेकर आ रहे हैं , जो लोगों के नज़रिये को बदल देगी। हम दिखाना चाहते हैं कि लड़कियों की दोस्ती पर बनाई गई फिल्में भी बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा कर सकती हैं। इससे पहले जितनी भी फिल्में आई हैं उसमे लड़कियों की दोस्ती को इतनी गहराई से नही दिखाया गया होगा ,जितना हम इस फिल्म में दिखाने वाले हैं।

फिल्म “वीरे दी वेडिंग” की इन चार सहेलियों की दोस्ती हमें 1 जून को देखने को मिलेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं बॉलीवुड की ऐसी पांच फिल्मों के बारे में , जिसमे लड़कियों या औरतों के बीच की दोस्ती को बहुत ही ख़ूबसूरती से दिखाया गया हो।

ये जवानी है दीवानी

फिल्म के चारों कलाकार दीपिका , रणबीर , कल्कि और आदित्य एक दूसरे को अच्छे से जान सकें इसलिये फिल्म के निर्देशक ने फैसला लिया कि सभी चंडीगढ़ से मनाली तक गाड़ी में जाएंगे। रास्ते में सभी ने इतने मज़े किए कि छह घंटे का सफर 14 घंटो मे तय किया गया। यही कारण है कि फिल्म में सभी की केमिस्ट्री काफी अच्छी है

यह फिल्म यूं तो युवा प्रेम के बारे में थी, लेकिन फिल्म में नैना (दीपिका पादुकोण) और अदिति (कल्कि केकलां) के बीच की दोस्ती भी आपको लुभाती है।एक साथ एक सफर पर निकली दो लड़कियाँ ट्रेन की यात्रा और ट्रैकिंग के दौरान एक दूसरे से मिलती हैं और पक्की सहेलियाँ बन जाती हैं। नैना और अदिति एक दूसरे के साथ ही हर जगह चिपकी रहती हैं। इन दोनों की दोस्ती ये साबित करती है कि बेस्ट फ्रेंड बनाने की कोई उम्र नही होती। ये ज़रुरी नही कि बचपन से आपके साथ पला बढ़ा ही आपका बेस्ट फ्रेंड हो सकता है।

क्वीन

करीना को रानी( कंगना) का किरदार ऑफर किये जाने की खबरें थी। हालांकि कंगना के लिए ये फिल्म उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म साबित हुई । कंगना को इस फिल्म के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया था।

ये फिल्म महिलाओं पर बनी सबसे सशक्त फिल्मों में से एक है। पेरिस के लिए अकेले ही यात्रा पर निकली रानी (कंगना राणावत) विजयलक्ष्मी (लिसा हैडन) से मिलती है और दोनो क़रीबी दोस्त बन जाती हैं। इस बात में कोई दो राय नही है कि इन दोनों के बीच दिखाई गई बॉन्डिंग,हिन्दी फिल्मों की बेस्ट फीमेल बॉन्डिंग में से है। इस बात को दावे के साथ कहा जा सकता है कि अगर रानी की ज़िंदगी में विज्यलक्ष्मी न आई होती, तो शायद वो क्वीन भी न बन पाई होती। ये फिल्म हमें हमारी ज़िंदगी में मौजूद विज्यलक्ष्मी यानि उस दोस्त की याद ज़रुर दिला देती है, जिसने हमें खुल कर जीने के लिए प्रेरित किया हो। यह फिल्म सभी महिलाओं को संदेश देती है कि खुश रहने के लिये ज़रुरी नही कि आपका कोई मेल पार्टनर हो ,आपकी ज़िंदगी मे अगर अच्छी सहेलियाँ भी हैं, तो भी आप खुश रह सकते हैं।

एंग्री इंडियन गॉडेसिस

फिल्म के लिए 500 लड़कियों के ऑडिशन हुए, 200 लड़कियों को शॉर्टलिस्ट किया गया और 7 लड़कियों को कास्ट किया गया।

ये कहना गलत नहीं होगा कि ये पहली बॉलीवुड फिल्म थी, जो फ़ीमेल गैंग पर बनाई गई थी। इस फिल्म ने सभी का दिल जीत लिया था। सहेलियों के बीच , सेक्स, लाइफ और ज़िंदगी के कई मुद्दों पर होती छोटी छोटी बातचीत इस फिल्म को भीड़ से अलग करती है। फिल्म को देखकर आपको भी अपनी गर्लफ़्रेंड गैंग की याद ज़रुर आई होगी, खास कर उस दोस्त की भी, जो मुसीबत के समय हमेशा आपके साथ खड़ी रहती है।

पार्च्ड

फिल्म की शूटींग राजस्थान मे हुई थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान राजस्थान में गर्मी के कारण शूट करना काफी मुश्किल हो जाता था। लेकिन किसी भी दिन शूट को कैंसल नही किया गया।

हर महिला के लिए इस फिल्म को देखना वाकई ज़रुरी है। यह फिल्म ग्रामीण राजस्थान में रहने वाली महिलाओं के साधारण जीवन और उनके बीच दोस्ती को बखूबी दिखाती है। तीनों औरतों की बिंदास बातें, सेक्स की इच्छाएं और जीवन से उनकी उम्मीदें, ये सारी बातें आपका दिल छू लेंगी। इन तीनों की ज़िंदगी के जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं , तो ये तीनों महिलाएं एक दूसरे के करीब आती हैं। ये फिल्म अन्य फिल्मों की तुलना मे काफी रियलिस्टिक है, जहां महिलाओं की समस्याओं के बारे में भी विस्तार से दिखाया गया है।

पिंक

यूं तो हर फिल्म में सबसे सीनियर कलाकार का नाम क्रे़डिट में सबसे पहले आता है, लेकिन इस फिल्म में अमिताभ बच्चन का नाम तीनों हीरोइनों के बाद आता है, ऐसा खुद अमिताभ बच्चन के कहने पर किया गया। उनका मानना था कि महिलाओं के मुद्दों पर बनाई गई इस फिल्म में महिलाओं को ही ज्यादा तवज्जो मिलनी चाहिए।

यूं तो हर फिल्म में सबसे सीनियर कलाकार का नाम क्रे़डिट में सबसे पहले आता है, लेकिन इस फिल्म में अमिताभ बच्चन का नाम तीनों हीरोइनों के बाद आता है, ऐसा खुद अमिताभ बच्चन के कहने पर किया गया। उनका मानना था कि महिलाओं के मुद्दों पर बनाई गई इस फिल्म में महिलाओं को ही ज्यादा तवज्जो मिलनी चाहिए।

क्या मीनल अरोड़ा (तापसी पन्नू) इतनी बड़ी मुसीबत का सामना अकेले कर सकती थी अगर उसकी दोनों दोस्त साथ न होती ? हिन्दी सिनेमा में जब भी महिलाओं की दोस्ती की बात होगी, तो फिल्म “पिंक” का जिक्र ज़रुर होगा। समाज में महिलाओं के प्रति दोहरे रवैये जैसे मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखती इस फिल्म में, महिलाओं की दोस्ती को लेकर एक छिपा हुआ संदेश भी था। फिल्म के निर्देशक शूजित सरकार ये बताना चाहते थे कि संकट के समय भले ही पूरी दुनिया या फिर समाज आपके विरोध में हो जाए लेकिन महिलाओं को एक दूसरे के लिए एक चट्टान के रूप में खड़े रहना ज़रुरी है।

आज जब हिन्दी फिल्मों में महिलाओं के कई मुद्दों पर फिल्में बन रही हैं, तब ये उम्मीद की जा सकती है कि महिलाओं की दोस्ती और रिश्तों पर शायद और भी कई फिल्में दर्शकों को देखने को मिले। आपकी भी ऐसी कोई पसंदीदा फिल्म हो , जिसे देखकर आपको अपनी किसी सहेली की याद आए, तो हमे आप ज़रुर बताएं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।