सन्नी देओल और डेब्यूटेंट एक्टर करण कपाड़िया की फिल्म ‘ब्लैंक’ एक सस्पेंस थ्रिलर है। फिल्म एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी एटीएस चीफ का किरदार निभा रहे सन्नी देओल और अपनी छाती पर बम लेकर घूम रहे एक सुसाईड बोम्बर हनीफ यानी करण कपाड़िया की कहानी है। फिल्म का निर्देशन बहजाद खम्बाटा ने किया है। फिल्म की कहानी का सस्पेंस बेहतरीन ज़रुर है, लेकिन क्यों लोगों को बांधे नहीं रख पाता और कैसे है अक्षय कुमार के साले करण कपाडि़या, यही हम आपको बताएंगे

फिल्म की कहानी
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फिल्म की कहानी फिल्म के निर्देशक बहजाद खम्बाट ने ही लिखी है

फिल्म की कहानी शुरु होती है फिल्म में एटीएस चीफ की भूमिका निभा रहे सन्नी देओल से जो किसी मिशन पर है। दरअसल उसका मिशन है एक सुसाइड बोम्बर करण कपाड़िया .यानी हनीफ के पीछे की गुत्थी को सुलझाना। हनीफ अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हैं और उसकी छाती पर सुसाइब बम है, जिसके तार और 24 बम से जुड़े है। यानी अगर हनीफ की धड़कनें बंद हुई तो 24 बम अपने आप फट जाएंगे। हनीफ को कुछ भी याद नहीं कि आखिर वो कौन है, क्यों बम लगाए है और क्या उसका मिशन है। क्या हनीफ ढ़ोंग कर रहा है, क्या वो आतंकवादी है और अगर है तो वह क्यों और किसको मारना चाहता है। इन्ही सभी सवालों का सस्पेंस इस फिल्म में है। हालांकि इस बारे में कोई दो राय नहीं कि फिल्म के निर्देशक बेजाद ने काफी बेहतरीन तरीके से इस फिल्म की कहानी को लिखा है। फिल्म के अंत तक फिल्म का सस्पेंस जान पाना मुश्किल है।

फिल्म में अभिनय
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करण कपाड़िया डिम्पल कपाड़िया की बहन सिम्पल के बेटे हैं

फिल्म से एक और डेब्यूटेंट करण की बॉलीवु़ड में एंट्री हो रही है। हालांकि करण ने इसमें बेहतरीन एक्शन किया है, लेकिन उनको अपनी एक्टिंग पर बहुत काम करना होगा। फिल्म में उनको देख कर आपको सुनील शेट्टी की याद आ जाएगी। कई जगहों पर आपको उनका अंदाज़ और उनके लुक में यंग सुनी शेट्टी की झलक देखने को मिलेगी। करण का किरदार इस फिल्म का अहम किरदार है, अपने किरदार के साथ उन्होनें न्याय किया है, फिल्म में जिस तरह के एक्शन की ज़रुरत थी, वो उन्होनें बेहतरीन तौर पर किए है, लेकिन इमोश्नल सीन्स में वह मात खाते नज़र आए है।

फिल्म में सबसे अहम किरदार सन्नी देओल का है। करण के साथ-साथ उनका किरदार भी फिल्म में काफी मुख्य है। कहीं कहीं तो ऐसा महसूस होता है कि फिल्म के हीरो सन्नी ही हैं। लेकिन इस फिल्म में सन्नी अपना जलवा नहीं दिखा पाए। उनके ढाई किलो के हाथ का जलवा भले ही इस फिल्म में हो, लेकिन आज के दौर में एक ही बंदूक से कई लोगों का पीछा करना, टूट चुकी और टायर की हवा निकलने के बावजूद भी गाड़ी चलाना जैसी चीज़े आज के दर्शकों को हज़म नहीं होती। उनके चलने का तरीका, उनकी डॉयलॉग डिलीवरी से लेकर बहुत सारी ऐसी बातें है, जो सन्नी के किरदार की कमज़ोरी हैं। सन्नी को इस फिल्म में देखकर, इस बात पर विश्वास करना मुश्किल था कि यह वहीं सन्नी देओल है, जिन्होनें इतनी बेहतरीन फिल्म भारतीय सिनेमा को दी है।

फिल्म में करणवीर शर्मा और इशिता दत्ता ने भी अहम भूमिका निभाई है। फिल्म में इशिता दत्ता एक पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार में है, वहीं करणवीर भी सन्नी की एटीएस टीम का हिस्सा है। फिल्म में अगर किसी किरदार को आप नोटिस करते है तो वो है करणवीर। फिल्म देख कर आपको एहसास होगा कि सिर्फ करणवीर ही अपने किरदार के साथ न्याय कर रहे हैं।

फिल्म देखें या नहीं
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फिल्म में करण के जीजा अक्षय कुमार का भी स्पेशल अपीरियंस है

फिल्म की कहानी बेहतरीन है लेकिन कहने का तरीका बिल्कुल भी ऐसा नहीं कि लोगों को बांध कर रख सकें। फिल्म में आतंकवादियों का मिशन क्या है, क्यों आतंक फैलाना चाह रहे हैं। किरदारों का अतीत , जैसे कई अनसुलझे सवाल है, जो फिल्म देखने के बाद भी अनसुलझे ही रह जाते हैं। फिल्म में सभी आतंकवादी की दाढ़ी और मूंछे दिखाई गई है। हालांकि फिल्मों में एक ही तरीके से ऐसे किरदारों को पेश करने के अंदाज़ को देख कर ऐसा महसूस होता है कि निर्देशकों और फिल्मकारों को कुछ अलग सोचना चाहिए। फिल्म का बैकग्राउंन्ड म्यूज़िक भी फिल्म की कहानी के साथ नहीं जाता। कहा जाए तो फिल्म की कहानी हो, एक्टिंग और या सिनेमाटोग्राफी, फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो आपको पसंद आ जाए।

आवाज़ डाट कॉम इस फिल्म को 2 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।