बहुत से कलाकार आते हैं और जाते हैं लेकिन काजोल जैसा सच में कोई नहीं है। लेजेंडरी अभिनेत्री तनुजा और फिल्ममेकर शोमू मुखर्जी की बेटी काजोल, बॉलीवुड में अपने 27 वर्ष पूरे कर चुकी हैं। उनका फ़िल्मी करियर बहुत सफल रहा है। इस बंगाली ब्यूटी ने सभी को अपने शानदार अभिनय का दीवाना बनाया है। काजोल की पहली फिल्म ‘बेखुदी’ थी, जो साल 1992 में रिलीज़ हुई थी, जिसके बाद से काजोल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। काजोल की सुपरहिट फ़िल्मी जर्नी से जुड़ी बहुत सी आकर्षक बातें हैं जिनमे से एक हैं SRK के साथ उनकी एवरग्रीन केमिस्ट्री। यह केमिस्ट्री SRK के साथ उनकी आखिरी फिल्म ‘दिलवाले’ में भी देखने मिली थी। दिलवाले भले ही ज़्यादा लोगों को इतनी पसंद नहीं आई थी लेकिन इसने बॉक्स-ऑफिस पर अच्छा बिज़नेस किया था।

45 की हो चुकी काजोल ने अपनी बहुत सी फिल्मों में धमाकेदार किरदार किये हैं। इन यादगार किरदारों ने उनकी फिल्म का रुख ही बदल दिया था। चलिए, काजोल के जन्मदिन पर उनके निभाए गए इन्हीं किरदारों की आज बात करते हैं।

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की सिमरन

अपने राज का इंतज़ार करती सिमरन
अपने राज का इंतज़ार करती सिमरन

राज और सिमरन फ़िल्मी दुनिया के सबसे खूबसूरत और यादगार किरदारों में से हैं। ख़ास तौर पर फिल्म में काजोल द्वारा निभाया गया भोलेपन, सादगी और प्यार से भरा सिमरन का किरदार, हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा। आप को जानकर हैरानी होगी कि यह फिल्म बड़े परदे पर सबसे ज़्यादा चलने वाली फिल्मों में से हैं। यश चोपड़ा ने अपने इस किरदार के ज़रिये बहुत सी लड़कियों को प्रभावित किया था और बहुत से घरों में लड़कियों का नाम सिमरन रखा जाने लगा था।

‘अंजली’

हमारी प्यारी अंजली
हमारी प्यारी अंजली

सबसे पहले काजोल ने ‘कुछ कुछ होता है’ की अंजली बनकर हमारा दिल जीता। इस फिल्म में काजोल ने टॉम-ब्वॉय लड़की का किरदार निभाया था, जिसे सजने सवारने से ज़्यादा फुटबॉल खेलने और अपने जिगरी दोस्त राहुल के लड़ने का शौक था। इस किरदार में काजोल सच में बहुत प्यारी और मासूम लग रही थी। अब अगर अंजली पार्ट 2 की बात करें, तो वह हमे देखने को मिली साल 2001 की ‘कभी ख़ुशी कभी गम में’। इसमें काजोल का नटखट और शरारती अंदाज़ दुगुना हो गया था। फिल्म में काजोल के अभिनय को देख दर्शक आज भी लोट-पोट हो जाते हैं। दोनों ही फिल्मों में अंजली का किरदार जितना रोमांचक था, उतना ही वफादारी और सादगी से भरा। आपको जानकार ख़ुशी होगी कि काजोल को इन दोनों फिल्मों के लिए फ़िल्म्फेयर द्वारा बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड दिया गया था।

‘गुप्त’ की ईशा दीवान

‘गुप्त’ में विलन थी काजोल

काजोल एक मेनस्ट्रीम एक्ट्रेस के रूप में ‘करण-अर्जुन’, ‘बाज़ीग़र’, ‘हलचल’ और ‘दिल्लगी’ जैसी फिल्मों के लिए बहुत प्रशंसा हासिल कर चुकी थी जब उन्होंने ‘गुप्त’ जैसी सस्पेंस थ्रिलर में एक विलेन की भूमिका के लिए हां कहां। उस फिल्म से पहले काजोल के किसी भी फ़ैन ने उन्हें इस प्रकार के नेगेटिव रोल को निभाते हुए नहीं देखा था। लेकिन मानना होगा कि ईशा दीवान की दीवानगी और जुनून को काजोल ने परदे पर बहुत अच्छे से दर्शाया था। एक विलेन के रूप में काजोल का किरदार डरावना और धमाकेदार था कि फिल्मफेयर ने भी उन्हें उस साल बेस्ट एक्ट्रेस इन अ नेगेटिव रोल का अवार्ड दिया था।

‘फनाह’ की ज़ूनी

"तेरे दिल में मेरी सांसों को पनाह मिल जाए, तेरे इश्क़ में मेरी जान फनाह हो जाए" फिल्म 'फनाह' का यह डायलॉग याद है आपको
“तेरे दिल में मेरी सांसों को पनाह मिल जाए, तेरे इश्क़ में मेरी जान फनाह हो जाए” फिल्म ‘फनाह’ का यह डायलॉग याद है आपको

‘फनाह’ में ज़ूनी नाम की एक कश्मीरी लड़की के रूप में काजोल ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। ज़ूनी भले ही देख नहीं सकती थी, लेकिन फिर भी वह आत्म-निर्भर और खुशमिज़ाज थी। एक अंधी लड़की के इस खूबसूरत किरदार को काजोल ने बहुत सादगी से पेश किया था। फिल्म में आपको ज़ूनी का भोलापन और उसकी शक्ति साफ़-साफ़ नज़र आती है। यह फिल्म काजोल के सभी फैन्स के लिए बहुत ख़ास थी क्योंकि इसी फिल्म से काफी अरसे बाद काजोल ने बड़े परदे पर वापसी की थी।

‘दुश्मन’ की नैना और सोनिया सहगल

'दुश्मन' में काजोल ने किया था डबल रोल
‘दुश्मन’ में काजोल ने किया था डबल रोल

यह फिल्म निश्चित रूप से काजोल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक हैं। इस फिल्म में काजोल ने नैना और सोनिया नाम की दो जुड़वा बहनों का डबल रोल किया है। फिल्म में जहां काजोल का एक अवतार ज़िंदादिली और मौज-मस्ती से भरा हुआ था, वहीं दूसरा घरेलू और शर्मीली लड़की का था। काजोल ने अपने दोनों किरदारों को बखूबी निभाया था। काजोल के अभिनय के साथ-साथ इस फिल्म को चार चांद लगाती है इसकी कहानी। जिस तरह सोनिया पूरी हिम्मत दिखाकर अपनी बहन नैना के साथ हुए अत्याचार का बदला लेती है, वह देखने लायक है।

गुप्त और दुश्मन जैसी फिल्मों में काजोल ने अपने अभिनय से यह साबित किया है कि वह एक वर्सेटाइलअभिनेत्री है।

‘माय नेम इज़ खान’ की मंदिरा खान

'माय नेम इज़ खान' की मंदिरा खान
‘माय नेम इज़ खान’ की मंदिरा खान

यदि काजोल इस फिल्म में ना होती, तो यह फिल्म अधूरी लगती। भले ही SRK का एक गंभीर बिमारी से पीड़ित किरदार फिल्म का मुख्य आकर्षण है, लेकिन काजोल अपने किरदार से फिल्म में एक ठहराव लेकर आती है। साल 2010 की सबसे महंगी फिल्म, ‘माय नेम इज़ खान’ इस्लाम के प्रति विदेश में लोगों के डर के बारे में बात करती है। फिल्म में यह देखने को मिलता है कि कैसे बहुत सारे लोग एक साथ मिलकर किसी एक जाति या धर्म के लोगों से दुर्व्यवहार करते हैं। यह फिल्म एक आदमी और एक देश के बीच की जंग है जिसमे आपको काजोल का ममता और प्यार से भरा एक प्रभावशाली रूप देखने मिलता है।

‘हेलीकॉप्टर ईला’ की ईला

ईला ने अपने बच्चे के लिए मां और बाप दोनों का फ़र्ज़ निभाया
ईला ने अपने बच्चे के लिए मां और बाप दोनों का फ़र्ज़ निभाया

कहीं ना कहीं दुनिया की हर मां ने काजोल के इस किरदार में अपने आप को देखा होगा। ईला वो मां थी जो अपने बेटे को लेकर इतना चिंतित रहती हैं कि वो उस चक्कर में अपने अस्तित्व को ही भूल जाती है। दिन रात सिर्फ अपने बेटे को महत्त्व देनेवाली ईला किस तरह अपनी खुशियों के लिए जीना सीखती है, यह इस किरदार की सबसे अच्छी बात है। ईला के रूप में काजोल बहुत नेचुरल थी। यह फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर तो ज़्यादा नहीं चल पाई लेकिन बहुत से दर्शकों के दिलों में घर कर गयी।

हम काजोल को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए यही दुआ चाहेंगे कि वे इसी तरह बॉलीवुड में अपने अभिनय का जादू चलाती रहें और दर्शकों को अच्छी-अच्छी फ़िल्में देती रहें।

अपने सपनो को पूरा करने की ताक़त रखती हूँ। अभिलाषी हूं और नई चीज़ों को सीखने की इच्छुक भी। एक फ्रीलान्स एंकर। मेरी आवाज़ ही नहीं, बल्कि लेखनी भी आपके मन को छू लेगी। डांसिंग और एक्टिंग की शौक़ीन। माँ की लाड़ली और खाने की दीवानी।