फिल्म ‘भावेश जोशी’ आपके और हमारे जैसे सुपर हीरो की कहानी है, जो समाज में सुधार के लिए बहुत कुछ कर गुज़रना चाहता है, लेकिन फिर हार मान लेता है। आप में, हम में और सभी में कहीं न कहीं और कभी न कभी भावेश जोशी ज़रूर रहा होगा। यह ऐसे ही हर भावेश जोशी की कहानी है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी विक्रमादित्य, अनुराग कश्यप और अभय कोराने नें मिल कर लिखी हैं
फिल्म की कहानी विक्रमादित्य, अनुराग कश्यप और अभय कोराने नें मिल कर लिखी हैं

साल 2011 में अन्ना के आंदोलन में भ्रष्टाचार के खिलाफ झंडे लहराने और नारे लगाने के दौर से इस फिल्म की शुरुआत होती है, जिसमें मुंबई कॉलेज के तीन लड़के भी शामिल हो जाते हैं। मुंबई के मलाड़ मे रहते सिकंदर (हर्षवर्धन कपूर) भावेश जोशी (प्रियांशु पैनयूली) और रजत (आशीष वर्मा) भी आंदोलन का हिस्सा बनते हैं। आंदोलन तो खत्म हो जाता है, लेकिन इन तीनों दोस्तों का जोश नहीं। लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए यह इंसाफ नाम के चैनल की शुरुआत youtube पर करते हैं। यह तीनों लोगों की मदद करने में थोड़ा बहुत सफल भी हो पाते हैं। सोसायटी से इंटरनेट की चोरी करना, स्कूल बंक करना, सिग्नल तोड़ना जैसे मुद्दों से लोगों को इंसाफ दिलाने की शुरुआत करने वाले, इन तीनों दोस्तों में भावेश जोशी सच और सही की लड़ाई में बहुत कुछ कर जाता है और पानी चोरी का सच सभी के सामने लाना चाहता है, लेकिन इस वॉटर माफिया के पीछे मिनिस्टर राणा (निशिकांत कामत) का हाथ होता है और वह भी भावेश जोशी का सफ़ाया करने की ठान लेता हैं। वहीं उसका दोस्त, सिक्कू यानि सिकंदर जब देखता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर आम जनता एक दम रुखी है, तो वह निराश हो अपनी इस लड़ाई को बीच में ही छोड़ कर कोरपोरेट की दुनिया का हिस्सा बन जाता है। आखिर में यहीं सिकंदर अपने दोस्त भावेश की शुरु की हुई लड़ाई को अंजाम देता है। कैसे फिर से सिकंदर भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होता है? ऐसा क्यों और क्या होता है…. यही इस फिल्म की कहानी है।

फिल्म में किरदारों का अभिनय

तीन दोस्तों की कहानी है यह फिल्म, जो समाज की बुराइयों से लड़ना चाहते हैं
तीन दोस्तों की कहानी है यह फिल्म, जो समाज की बुराइयों से लड़ना चाहते हैं

ये फिल्म हर्षवर्धन कपूर की दूसरी फिल्म है। खास बात है कि हर्ष ने आधी से ज़्यादा फिल्म में मास्क पहन रखा है। कॉलेज में पढने वाले लड़के का किरदार निभाते हर्ष में, हर उस लड़के के गुण दिखते हैं, जो आपको आपके आसपास रहने वाले किसी भी युवा में दिख सकते हैं। फिल्म को आम आदमी से जोड़ने के लिए हर्ष को नेक्सट डोर ब्वाय के तौर पर ही पेश किया गया है। लेकिन हर्ष इस फिल्म में भी लोगों का दिल जीतने में नाकामयाब रहे। उनके दोस्त की भूमिका में प्रियांश और आशीष वर्मा का काम बेहतरीन है। निशिकांत कामत पॉलिटिशन की भूमिका में हैं, जिनका अभिनय ठीक-ठाक ही है। फिल्म की हीरोइन के काम का जिक्र ना करने के ही बराबर है। खास बात है कि उस फिल्म में हर्षवर्धन कपूर की जगह किसी को भी लिया जा सकता था क्योंकि इस फिल्म में हीरो के पास करने के लिए कुछ ज़्यादा नहीं था।

फिल्म का निर्देशन

इस फिल्म से पहले विक्रम ‘उडान’, ‘लुटेरे’ और ‘ट्रेप्ड’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं
इस फिल्म से पहले विक्रम ‘उडान’, ‘लुटेरे’ और ‘ट्रेप्ड’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं

फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है। इस फिल्म से पहले उन्होंने ‘उड़ान’ ‘लुटेरा’ और ट्रेप्ड जैसी फिल्मों का निर्देशन किया था, जो बेहतरीन फिल्में थी। इस फिल्म में उनका निर्देशन काफी आम सा है। दरअसल फिल्म को रियल बनाए रखने की कोशिश की गई है। रिकॉर्डिंड फुटेज, स्लम एरिया और मुंबई जैसे बड़े शहर में होती पानी की चोरी जैसे मुद्दों को दिखाती इस फिल्म से महाराष्ट्र के लोग तो जुड़ पाएंगे, लेकिन क्या देश के लोग जुड़ पाएंगे? इस फिल्म को विक्रम काफी समय से बनाना चाहते थे। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद वह अपनी फिल्म बॉक्स ऑफ़िस पर लेकर आए।

फिल्म देखे या नहीं

यह कहानी एक न्यूज़ स्टोरी , पानी चोरी पर एक इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी हो सकती थी, लेकिन ढाई घंटे की फिल्म नहीं। सोशल मीडिया पर हम आए दिन ऐसे मुद्दों के अलावा और कई मुद्दों और समस्याओं पर लोगों को आवाज़ उठाते हुए देखते हैं। फिल्म देखने के लिए मनोरंजन की ज़रूरत होती है, जो इस फिल्म में नहीं।फिल्म का प्लॉट अच्छा है, लेकिन फिल्म की कहानी काफी धीमे चलती है। 2 घंटे 36 मिनट की इस फिल्म को काट कर छोटा किया जा सकता था। पहले ही सीन से यह फिल्म काफी प्रेडिक्टेबल लगती है। अगर आप मनोरंजन की उम्मीद से इस फिल्म को देखना चाहते हैं, तो ध्यान रखिए फिल्म में मनोरंजन नहीं है, लेकिन यह फिल्म आपके अंदर के भावेश जोशी को शायद जगा सकती है। हम इस फिल्म को दो स्टार देते हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।