बंटवारे की कहानियां कई बार हिन्दी सिनेमा में परोसी गई है और जब-जब भी इस कहानी को दिखाया गया है, यह आपके आंखों में आंसू ज़रुर लेकर आती हैं। फिल्म ‘भारत’ भी ऐसी ही कहानी है, जो बंटवारे में बिछड़े हुए लोगों से शुरु होती है और कई सालों बाद उनके आपस में मिलने पर खत्म। बंटवारे के बाद के लगभग 63 साल तक, एक देश कैसे तरक्की करता है, उसे इस फिल्म में सलमान खान यानी भारत की नज़र से दिखाया गया है। अली अब्बास ज़फर के निर्देशन में बनी यह फिल्म इमोशन और वीएफएक्स से भरपूर है। हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि यह फिल्म भले ही सुल्तान जितनी खुबसुरत ना हो, लेकिन सलमान की पिछली दो ईद पर रिलीज़ हो रही फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ और ‘रेस3’ से बेहतर है।

फिल्म दरअसल शुरु होती है साल 2010 से जहां भारत यानी सलमान अपने परिवार ( भाई , बहन और उनके बच्चे, मां और मैडम सर के साथ) दिल्ली में रहता है। उसका जन्मदिन है और वह हर साल 15 अगस्त को इटावा स्टेशन पर अपना जन्मदिन मनाता है, क्योंकि इसी दिन वह अपनी जान बचाकर ट्रेन के ज़रिए पाकिस्तान से भारत लौट कर आया था। 1947 के बंटवारे को अपनी नज़रो से देख चुका भारत, इस बंटवारे में अपने पिता जैकी श्राफ और छोटी बहन गुड़िया (तब्बू) से बिछड़ चुका है। बंटवारे के बाद भारत आकर बसा सलमान का किरदार, बेरोज़गारी के दौर से भारत के ग्लोबाइज़ेशन के दौर और मॉल कल्चर का ग्वाह बनता है। अपने परिवार का पेट पालने के लिए वह इन सालों में, सरकस, तेल के कुएं की खदान, नेवी शीप से लेकर खुद की दुकान में काम करता है। एक देश के 63 सालों की जर्नी को इस फिल्म में भारत के नज़रिए से दिखाया गया है, कि कैसे एक देश के साथ-साथ उसका एक नागरिक भी तरक्की करता है। साल 2014 में बनी साउथ कोरियन फिल्म ‘एन ऑड टू म़ाइ फादर’ की रीमेक पर आधारित इस फिल्म की कहानी बेहद खूबसूरत है। फिल्म में एक देश और उसमें रहते भारत की 63 साल की इस जर्नी में सलमान के किरदार के पांच लुक्स देखने को मिलेंगे।

अली और सलमान खान की यह एक साथ तीसरी फिल्म है

फिल्म की कहानी में भी अली ने योगदान दिया है

Image Credit: Bharat Movie

फिल्म का फ़र्स्ट हॉफ बंटवारे के दृश्यों से लोगों को भावुक कर देता है। इस बारे में कोई दो राय नहीं कि शुरु के लगभग 20 से 25 मिनट सिर्फ और सिर्फ जैकी श्राफ के हैं। बंटवारे के दौरान, पाकिस्तान के एक स्टेशन पर स्टेशन मास्टर का काम कर रहे जैकी श्राफ, अपने परिवार को तो भारत भेज देने में कामयाब होते हैं, लेकिन अपनी बच्ची की तलाश के कारण खुद पाकिस्तान में रह जाते हैं। अपने बेटे भारत से परिवार का ख्याल रखने का वचन लेने के बाद, उनका बेटा भारत अपनी पूरी ज़िंदगी अपने पिता के इसी वचन को निभाने में लगा देता हैं। यहां तक की इस वादे को पूरा करने में वह इतना डूब जाता है कि खुद के बारे में भी कभी कुछ नहीं सोचता। फिल्म में कैटरीना का किरदार भी उसके इस व्यवहार की वजह से उससे कहता है “इंसान हो तो इंसान बन कर रहो, भगवान बनने की कोशिश मत करो’, इतना ही नही उसका बेस्ट फ्रेंड विलायती भी उसे एक मोड़ पर आकर इस बात का एहसास दिलाता है कि उसे उसकी ज़िंदगी में मौजूद लोगों की कदर होनी चाहिए और ना कि उन लोगो की (पिता और उसकी बहन) जिसका कोई अता पता ही नहीं है।

सलमान और कैटरीना की केमेस्ट्री

सलमान और कैटरीना ने एक साथ कई फिल्में की है, जिसे हर बार सराहा गया है

Image Credit: Bharat Movie

दरअसल, ईद पर रिलीज़ होती सलमान की फिल्म में लोग सलमान खान को देखने के लिए ही थियेटर तक जाते हैं। इस फिल्म में अगर बात करे तो सलमान खान अपने अभिनय से लोगों को निराश नहीं करेंगे। हालांकि सलमान खान के पांच अलग दौर को दिखाने के लिए कई जगहों पर कुछ ज़्यादा ही फोटोशॉप और वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया है, जो देखने में काफी अजीब लगता है। खासकर सलमान की जवानी और बुढ़ापे का दौर आपको रियालिस्टिक नहीं लगता। सलमान का स्वैग इस फिल्म में दर्शकों को देखने को मिलेगा, लेकिन इस फिल्म में जो आपको सरप्राईज़ करेगा, वो है सलमान का इमोशन। सलमान हर इमोश्नल सीन को दर्शकों तक पहुंचाने में इस कदर कामयाब हुए हैं कि दर्शक भी उनके साथ रोता है। फिल्म में 70 की उम्र होने के बावजूद दिखाया गया उनका एक्शन थोड़ा अजीब लगता है, वहीं जवानी के दिनों में सर्कस में दिखाए गए उनके सीन्स और शॉट्स को काफी फोटोशॉप किया गया है। हालांकि अली और सलमान खान इस फिल्म से पहले दो फिल्में ‘टाइगर ज़िंदा है’ और ‘सुल्तान’ कर चुके हैं। इन दोनों ही फिल्मों में सलमान ने अपने अभिनय से दर्शकों को सरप्राइज़ किया था, इस बात में कोई दो राय नहीं कि इस फिल्म में भी उनका अभिनय आपको पसंद आएगा, लेकिन कहीं कहीं आपको यह भी लगेगा कि सलमान खान अपने किरदार ‘भारत’ पर हावी हो रहे हैं।

मैडम सर यानी कैटरीना कैफ फिल्म में खूबसूरत लगी हैं, यह बात तो हमें ट्रेलर से ही पता लग गयी थी, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि इस फिल्म में उन्होनें अपने किरदार, अपनी हिन्दी भाषा पर खूब मेहनत की हैं। इस फिल्म को पहले प्रियंका चोपड़ा करने वाली थी, लेकिन शादी की वजह से उनके फिल्म छोड़ने के बाद , शूटिंग के कुछ ही दिन पहले कैटरीना को फिल्म दी गई। हालांकि फिल्म के निर्देशक अली अब्बास ने कहा था कि कैटरीना के लिए इस किरदार को बिल्कुल नहीं बदला गया, हालांकि फिल्म देखकर यह बात साफ हो जाती हैं कि किरदार में ढ़लने के लिए कैटरीना ने मेहनत की होगी। कुमूद का किरदार निभाती कैटरीना को जिस दौर का दिखाया गया है, उसके मुताबिक वह काफी बोल्ड लगता और दिखता है। जहां फिल्म में एक देश के साथ-साथ एक इंसान भारत की जर्नी को दिखाया गया है, ऐसे में उस समाज की औरतों की छवि उनकी तरक्की और ग्रोथ को कैटरीना के माध्यम से दिखाया जा सकता था, जिसमें फिल्मकार फेल हुए हैं।

फिल्म ज़ीरो और इस फिल्म में कैटरीना के अभिनय को देखकर एक बात का दावा किया जा सकता है कि अभी तक सिर्फ और सिर्फ अपनी खूबसूररती के लिए जानी जाती कैटरीना, इस बात को तो साबित कर ही रही हैं, कि अगर उन्हें मौका दिया जाए तो वह बेहतर अभिनय कर सकती हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सलमान और कैटरीना की केमेस्ट्री इस फिल्म में लाजवाब है। सलमान से प्यार कर बैठती मैडम सर और सलमान की लव स्टोरी में कई टर्न और ट्वीस्ट है, जिसे दर्शक थियेटर में जाकर देखें तो बेहतर होगा।

फिल्म में सुनील ग्रोवर को भी काफी अच्छा मौका मिला है। वह सलमान खान के दोस्त विलायती का अभिनय कर रहे हैं। उनका किरदार फिल्म में कॉमेडी लाता है। खास बात है कि सुनील ग्रोवर का भी फिल्म में उतना ही प्रेसेंस है जितना सलमान खान का। सुनील का अभिनय शानदार है। हर सुख और दुख में अपने दोस्त भारत का साथ निभाने वाले सुनील को इस फिल्म के बाद ढेरों ऑफर आएंगे, इस बात मे कोई दो राय नहीं है।

फिल्म देखें या नहीं

इस फिल्म की गिनती अभी तक की चुनिंदा महंगी फिल्मों में की जा रही हैं

Image Credit: Bharat Movie

दरअसल, इस फिल्म के साथ दावा किया जा रहा था कि यह फिल्म एक देश की लगभग 60 साल की जर्नी को, उस देश में रहते एक नागरिक की नज़र से दिखाएगा। लेकिन इस फिल्म में बंटवारे, नेहरु जी का ज़िक्र, देश की बेरोज़गारी, भारतीयों के साथ विदेश में होते भेदभाव, भारत का ग्लोबलाइज़ेशन के दौर में 90 के दशक में तेज़ी से उभरना और सैटेलाइट चैनल की शुरुआत जैसे मौक़ों का ज़िक्र ज़रुर होता है, लेकिन वह कहीं ना कहीं अधूरा लगता है। इस दौर को देख चुके और इसका हिस्सा रह चुके 40 की उम्र से ऊपर के लोग भले ही इससे खुद को जोड़ कर देख सके, लेकिन आज की युवा पीढ़ी के लिए सिर्फ इतना ज़िक्र काफी नहीं हैं। दरअसल, फिल्म में दौर बदलने के नाम पर सिर्फ किरदार भारत के रोज़गार को बदलता दिखाया गया है, सिर्फ रोज़गार से किसी देश की स्थिति का पता नहीं लगाया जा सकता। फिल्म में बार बार सलमान के लिए कहा जाता है कि तुझमें ही भारत बसता है, लेकिन फिल्मकार भारत के नज़रिए से देश भारत तो दिखाने में उतना सफल नहीं हो पाया।

फिल्म में दिशा पटनी क्यों थी, उस किरदार का क्या हुआ, उसका कोई ज़िक्र नहीं है। दरअसल शुरुआत में यह फिल्म आपको कई किस्सों को जोड़कर बनाई गई फिल्म लगती है। ऐसा लगता है कि मानो छोटे-छोटे किस्सों को एक साथ जोड़ कर कहानी बनाने और बताने की कोशिश की गई हो। जिस परिवार के लिए सलमान खान का किरदार भारत, इतने बलिदान देता है, अपनी ज़िदंगी तक को दांव पर लगाता है, उस परिवार के साथ सलमान खान की केमेस्ट्री बिल्कुल मिसिंग है। आपको कहीं भी पूरी फिल्म में वह उनका परिवार और वह उस परिवार का हिस्सा है, यह महसूस ही नहीं होता।

फिल्म में बंटवारे के सीन्स , रिफ्यूज़ी कैम्प, वाघा बॉर्डर पर बिछड़े हुए लोगो का कई सालों बाद मिलना ही कुछ ऐसे दृश्य है, जो आपका दिल छूं लेते हैं और उन्हे काफी रियालिस्टिक तरीके से फिल्माया गया है। जिसका श्रेय फिल्म के सिनेमाटोग्राफर मारसीन लास्कावीस और आर्ट डायरेक्टर ज़ुरिया क्रिस्टोबल को जाता है।

हालांकि फिल्म में अगर कुछ प्लस प्वाइंट है तो कुछ माइनस भी, लेकिन एक बात साफ है कि इस फिल्म में आपको कई जगहों पर सलमान खान का बेहतरीन अभिनय, सलमान- कैटरीना की केमेस्ट्री और बंटवारे की वजह के लोगों के दर्द के दिल छू लेने वाले कई इमोश्नल सीन्स देखने देखने को मिलेंगे, जिसके लिए आप यह फिल्म देख सकते हैं।

आवाज़ डॉट कॉम इस फिल्म को ढाई स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।