आयुष्मान खुराना की अमर कौशिक के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बाला’ जिंदगी को सेलिब्रेट करने का मैसेज देती है। ‘स्त्री’ जैसी फिल्म का निर्देशन करने वाले निर्देशक अमर कौशिक की यह फिल्म कॉमेडी से भरपूर है। आयुष्मान, भूमि पेडनेकर और यामी गौतम अभिनित इस फिल्म को कानपुर में फिल्माया गया है। अमर कौशिक की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन उन्होनें अपनी दूसरी ही फिल्म से साबित कर दिया है कि दर्शकों पर उनकी पकड़ है और उन्हें पता है कि बॉक्स ऑफ़िस पर किस तरह की फिल्में चलती हैं।

बालचंद्र शुक्ला की कहानी है फिल्म बाला, उसके बाल बचपन में इतने अच्छे थे कि उनका नाम ही बाला हो गया। अपने इसी बालों पर इतराते हुए वह खुद को शाहरुख और अमिताभ बच्चन समझने लगे। स्कूल से ही उन्हें इस बात का भ्रम हो गया था कि लाखों लड़कियाँ उन पर मरती हैं, लेकिन अफसोस जैसे-जैसे जवानी में कदम रखा और 30 साल के हुए तो बाल कम होते गए, बालों के कम होने के साथ-साथ, बाला का आत्मविश्वास भी जाता रहा। दरअसल, हमारे समाज में बाला जैसे कई नौजवान है, जो अपनी पूरी ज़िंदगी अपनी कमियों के बारे में सोचने, उसे सुधारने और रोने में लगा देते हैं। लेकिन अगर हम अपनी कमी को खुद ही एक्सेप्ट कर ले, तो कोई और हमें हमारी इस कमी का एहसास नहीं दिला सकता।

फिल्म में कानपुर का सेटअप है

फिल्म में अपारशक्ति स्पेशल अपीरियंस में हैं
फिल्म में अपारशक्ति स्पेशल अपीरियंस में हैं

फिल्म के तीन मुख्य किरदार दरअसल, हमारे समाज की तीन तरह की सोच को दर्शाते हैं। जहाँँ आयुष्मान अपनी कमज़ोरियों से भागने वालों में है, वहीं उनके साथ है भूमि पेडनेकर (लतिका) और यामी गौतम (परी मिश्रा)। भूमि फिल्म में सांवली हैं और आयुष्मान की बचपन से दोस्त रही हैं। अपने रंग और सांवलेपन को लेकर बचपन से ही उन्हें ना जाने कितनी बातें सुननी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया।. वो वकील है और सबसे खास बात कि वो जैसी है उसे इस पर गर्व है। यामी गौतम टिक-टाक स्टार है और देखने में अपने नाम की ही तरह परी जैसी खूबसूरत है। पढ़ाई में अच्छी नहीं, लेकिन उन्हें पता है कि उनका प्लस प्वाइंट क्या है। उन्होनें उसी प्लस प्वाइंट को इनकैश किया।

खास बात है कि इन तीनों ही किरदारों की कड़ियां एक साथ चलती हैं। फैयरनेस क्रीम बेचने वाली मार्केटिंग कम्पनी में काम करता कम बालों वाले बाला को, परी जैसी सुंदर लड़की की तलाश है तो टिकटाक स्टार यामी को खूबसूरत लड़के की चाह। लतिका चाहती बाला को है, लेकिन जो खुद से ही प्यार नहीं करता, उससे दूसरा भला कब तक प्यार करेगा?

फिल्म देखें या नहीं

फिल्म 133 मिनट की है
फिल्म 133 मिनट की है

कानपुर शहर में बुनी गई इस कहानी में बाला का छोटा भाई विहान (धीरेन्द्र कुमार गौतम) का किरदार हो या फिर उसके दोस्त का किरदार निभाते अभिषेक बेनर्जी, उसके पिता सौरभ शुक्ला, माँ या नाना, हर किरदार के ग्राफ को बहुत बेहतर तरीके से लिखा गया है। फिल्म में आयुष्मान औऱ यामी के टिकटाक वीडियो का सीन लोगों को गुदगुदाता है। बाल उगाने के लगभग 200 से ज़्यादा तरीके आज़माने वाले बाला के इन सभी उपायों का शिकार उसका छोटा भाई बनता है, जिसे गोबर से लेकर अंडा, प्याज़ और ना जाने कितनी ही चीज़ो से टार्चर होना पड़ता है। कानपुर में फिल्माई गई इस फिल्म में कानपुर की भाषा और शब्दों को ना सिर्फ बोलचाल के डायलॉग, बल्कि गीतों में भी पिरोया गया है। फिल्म के लेखक नीरेन भट्ट की सराहना करनी होगी, जिन्होनें फिल्म इस संजीदा मुद्दे को काफी मनोरंजक तरीके से लोगों तक पहुंचाया है।

आखिर में आयुष्मान और भूमि के लिए एक बात माननी होगी कि आयुष्मान गंजे हो या घने बालों के साथ, दर्शक उनकी एक्टिंग और फिल्मों के चयन के ज़रुर कायल हो जाएंगे। जहाँ तक बात है भूमि की , वो अपनी हर फिल्म के साथ कुछ नया कर रही हैं, फिल्म में उनके सांवली बनने पर कई विवाद बने, लेकिन फिल्म देखकर इस बात का एहसास होगा कि फिल्म में आखिर उनके इस किरदार को ऐसा दिखाने की ज़रुरत क्यों थी, वरना कोई भी खूबसूरत अभिनेत्री कभी मोटी, बुड्ढी तो कभी सांवली यूं ही हीं बन जाएगी।

आवाज़ डाट कॉम इस फिल्म को 4 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।