स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव के साथ इमोशन्स के उतार चढ़ाव की कहानी है फ़िल्म बाज़ार। देश की आर्थिक राजधानी कही जाती मुम्बई में छोटे शहर से स्ट्रगल नही, सेटल होने का सपना देख कर आते युवाओं की कहानी है ये फ़िल्म बाज़ार, जिसका निर्देशन किया है गौरव चावला ने।

फ़िल्म की कहानी

Saif-with-rohan-mehra-500x360
फ़िल्म की कहानी लिखी है निखिल आडवाणी, असीम अरोड़ा और परवेज़ शेख ने लिखी हैa

रिज़वान अहमद यानी रोहन मेहरा छोटे शहर इलाहाबाद से ज़रूर है, लेकिन उसके सपने छोटे नहीं। वो स्टॉक मार्केट में नाम कमा चुके शगुन कोठारी यानी सैफ अली खान को अपना गुरु मानता हैं और मुम्बई जाकर कुछ वैसा ही बनना चाहता है। वो किसी तरह वहाँ तक पहूंच भी जाता है। लेकिन सफलता और पैसे हासिल कर चुका रिज़वान क्या वाकई अपनी ज़िन्दगी से खुश है, यही इस फ़िल्म की कहानी हैं।

कलाकारों का अभिनय

Saif-with-Chitrangada-500x360
इस फ़िल्म से विनोद

यह फ़िल्म सैफ की है। बड़े लंबे अर्से बाद सैफ किसी बेहतरीन किरदार में देखने को मिले है। इस फ़िल्म में वह शकुन कोठारी नाम के बिज़नेसमैन का किरदार निभा रहे है, जो सिर्फ खुद के ही फायदे की सोचता है। यहां तक कि वह मंदिरा यानी चित्रांगदा के साथ शादी भी इसीलिए करता हैं क्योंकि वो अमीर बाप की बेटी हैं। एक श्रुड गुजराती बिजनेसमैन की बॉडी लैंग्वेज और जिस तरह का एटीट्यूड उनके किरदार की डिमांड थी, उसे सैफ ने बखूबी निभाया है।
सैफ के अलावा जो किरदार आपको पसंद आएगा, वो है रिज़वान अहमद का जिसे रोहन मेहरा ने निभाया हैं। रोहन विनोद मेहरा का बेटा है, कईयो की नज़रे उस पर है। उनकी पहली फ़िल्म होने के बावजूद उन्होंने बहूत अच्छा काम किया है। इस फ़िल्म में उनका काम सैफ के जितना ही महत्वपूर्ण है।

फ़िल्म में राधिका आप्टे और चित्रांगदा सिंह भी है। राधिका ने जहाँ एम्बिशयस लड़की का किरदार निभाया है, वहीं चित्रांगदा ने सैफ की बीवी का किरदार निभाया है। दोनों ने ही अपने किरदार के साथ न्याय किया है।

फ़िल्म देखे या नहीं

Rohan-Mehra-with-Radhika-Apte-500x360
फ़िल्म 140 मिनट की हैं

फ़िल्म की सबसे खास बात है कि फ़िल्म में सेंसेक्स के उतार चढ़ाव के साथ ही कहानी में भी बहूत से उतार चढ़ाव देखने को मिलते है। साथ ही दूसरी खास बात है सैफ अली खान, जिनका अभिनय देखने लायक है। फ़िल्म में उनकी एंट्री इतनी शानदार है कि पहले ही शॉट से ये बात दर्शकों आसानी से समझ सकते है कि ये फ़िल्म सिर्फ और सिर्फ सैफ की हैं।

फ़िल्म की कहानी लेकिन उस लोगों के ही समझ में आएगी जिन्हें स्टॉक मार्केट में रुचि है। फ़िल्म का फर्स्ट हाफ फ़िल्म के सेकंड हाफ से बेहतर है। फ़िल्म कहानी के कई उतार चढ़ाव के बावजूद मासेस की फ़िल्म नहीं है। सपनो के शहर मुम्बई की बात करते इस फ़िल्म में मुम्बई को इतना एक्स्प्लोर नहीं किया गया, लेकिन किरदारो के सपनों की कमी नहीं।

‘वफादारी इंसान का काम नहीं, उसके पास दिमाग है आगे बढ़ने के लिए’, फ़िल्म के इसी डॉयलोग में ही पूरी फ़िल्म की कहानी है। हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फ़िल्म को ढाई स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।