आयुष्मान खुराना का जन्मदिन हिन्दी दिवस के दिन ही आता है। अपनी मां से बेहतरीन हिन्दी सीखने वाले आयुष्मान उन चुनिंदा एक्टर में से हैं, जो बहुत अच्छी हिन्दी बोल लेते हैं। हिन्दी दिवस के दिन ही जन्मे आयुष्मान की एक और खास बात है कि वो ना सिर्फ हिन्दी में गीत लिखते है, बल्कि कई छोटी कविताएं और शायरी लिखने का भी शौक रखते हैं।

मां हिन्दी की टीचर थी

आयुष्मान की परवरिश चंडीगढ़ में हुई है

पंजाब के चंडीगढ़ में पले-बढ़े आयुष्मान का जहां एक तरफ पंजाबी से लगाव है, वहीं उनकी हिन्दी भी काफी बेहतरीन है। अपने सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी लिखी हुई पंक्तियों को अपने फैंस के साथ शेयर करने वाले आयुष्मान के मुताबिक उन्हें इस बात का बेहद गर्व है कि उनका जन्मदिन हिन्दी दिवस के मौके पर ही आता है। हालांकि पंजाबी माहौल में पले-बढ़े आयुष्मान अपनी अच्छी हिन्दी के पीछे किसी और को नहीं, बल्कि आपनी मां को क्रेडिट देते हैं। आयुष्मान के मुताबिक, “हिंदी दिवस के दिन ही मेरा जन्मदिन है और अपनी मां को मैं अपनी हिन्दी का क्रेडिट देना चाहता हूं। उन्होंने हिंदी में M.A किया है, वो हिंदी पढ़ाती थी स्कूल में। उनकी वजह से ही चंडीगढ़ में पले-बढ़े होने के बावजूद मेरी हिंदी अच्छी है।”

हिन्दी भाषा पर बेहतरीन पकड़ रखने वाले आयुष्मान को हांलाकि लगता है कि आज के दौर में हिन्दी यानी देवगागरी लिखने वाले, टाइप करने वाले बहुत कर लोग रह गए हैं। उनकी मानें तो, “हमें स्क्रीप्ट रोमन में लिखी हुई मिलती है, लेकि मुझे सब चलता है। मुझे लगता है कि आज हिन्दी में लिखने वाले, टाइप करने वाले बहुत ही कम लोग रह गए हैं। हालांकि कई बार ऐसा होता भी है कि जब कोई स्क्रीप्ट रोमन में लिखे तो 100 पन्नों की होती है, लेकिन जैसे ही उसे देवनागरी में लिखे तो 200 पन्नों की हो जाती हैं। तो इतने पन्ने देखकर मैं भी डर जाता हूं।”

मां-बाप से सिखाया है कि अपनी कमाई किसी को नहीं बतानी चाहिए

राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद आयुष्मान की डिमांड फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ गई है।

हाल ही में फिल्म ‘अंधाधुंध’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले आयुष्मान खुराना का मानना है कि पुरस्कार के बाद ऐसा बिल्कुल नहीं कि उनकी ज़िम्मेदारी बढ़ गई हो, आज भी वो अपनी फिल्मों का चयन वैसे ही करते है, जैसे पहले किया करते थे। कहानी पर ज़्यादा भरोसा करने वाले आयुष्मान हालांकि इन दिनों सभी फिल्ममेकर की पहली पसंद बन चुके हैं, लेकिन उनके लिए अगर कोई चीज़ सबसे ज़्यादा मायने रखती है तो वो है दर्शकों का प्यार। रेडियो जॉकी से नेशनल अवार्ड विजेता एक्टर बनने वाले आयुष्मान के मुताबिक वह उन चुनिंदा कलाकारों में से है, जिसे दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का भी प्यार मिलता है। अवार्ड के बाद अपनी बढ़ती मांग के साथ-साथ क्या उनकी कमर्शियल वैल्यु भी बढ़ी है, पूछे जाने पर आयुष्मान ने बातों को खूबसूरती के साथ टाल दिया। आयुष्मान के मुताबिक, “मेरी परवरिश कुछ इस तरह हुई है कि मेरे मां-बाप ने मुझे सिखाया है कि अपनी सैलरी या कमाई के बारे में कभी बात नहीं करनी चाहिए। हालांकि मैं यह ज़रुर जानता हूं कि मैं जिसके लायक हूं, मुझे वो ज़रुर मिल रहा है।”

इसी शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म ड्रीम गर्ल से कई तारीफें बटोर चुके आयुष्मान अपना जन्मदिन काम से छुट्टी लेकर बिताना चाहते हैं। इतना ही नहीं अपने जन्मदिन पर उनकी विशलिस्ट में शकुन बत्रा, ज़ोया अख्तर और शरद कटारिया के साथ का करने की इच्छा शामिल है।

आवाज़ डाट कॉम उनके जन्मदिन पर यही शुभकामनाएं देता है कि जल्द ही इन निर्देशकों के साथ काम करने की उनकी इच्छा पूरी हो।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।