किसी फिल्म से लोग तब अच्छी तरह से कनेक्ट कर पाते हैं, जब उसके किरदारों के साथ खुद को जोड़ कर देख सकें। यही वजह है कि बॉलीवुड के स्टार्स इन किरदारों के रंग में रमने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। बॉलीवुड में कई ऐसी फ़िल्में बनी हैं, जिनके किरदार छोटे शहरों से ताल्लुक रखते थे और जो छोटे शहरों की कहानियां बताते हैं। एसी फिल्मों में अपने किरदारों को रियल दिखाने के लिए कलाकारों ने उस जगह की बोली को अपनाया।

हाल ही में फिल्म सोनचिड़िया भी बुंदेलखंडी भाषा की वजह से चर्चा का विषय बनी। चंबल के डाकूओं पर बनी इस फिल्म के लिए सभी कलाकारों के लिए स्थानीय भाषा सीखना ज़रुरी था। खास बात है कि कलाकारों के लिए राम नरेश दिवाकर नामक ट्यूटर को भी सेट पर रखा गया था, जो सभी को बुंदेलखंडी लहज़ा सिखाते थे। फिल्म की वास्तविकता को और भी गहराई और रियालिस्टिक तरीके से दिखाने के लिए सुशांत सिंह, मनोज बाजपेयी, भूमि पेडनेकर, रणवीर शोरी और आशुतोष राणा जैसे कलाकारों ने कड़ी मेहनत की। इसी फिल्म की तरह कई ऐसी अदाकाराएं हैं, जिन्होंने अपनी फिल्म के लिए नयी ज़बान सीखी।

कंगना रनौत – तनु वेड्स मनु रिटर्न्स

इस रोल में उन्होंने ठेठ हरियाणवी भाषा बोली थी

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कंगना रनौत एक वर्सेटाइल अदाकारा हैं, जो अपने किरदार के मुताबिक खुद को बेहद परिपक्वता के साथ ढाल लेती हैं। उनकी फ़िल्में जैसे क्वीन और तनु वेड्स मनु इसलिए ही लोगों के दिल को छू पाई। फिल्म तनु वेड्स मनु में कंगना का डबल रोल था। जिसमें से एक किरदार हरियाणवी लड़की का था। इस रोल में उन्होंने ठेठ हरियाणवी भाषा बोली थी, जिसे देख कर कंगना के फैंस बेहद खुश हुए थे और लोगों ने कंगना की एक्टिंग को बेहद सराहा था।

दीपिका पादुकोण- चेन्नई एक्सप्रेस

रानी पद्मावती के किरदार में रमने के लिए उन्होंने राजस्थान की मेवाड़ी भाषा सीखी

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इस फिल्म में दीपिका और शाहरुख़ एक साथ दिखाई दिए थे। इस फिल्म में दीपिका ने मीनम्मां नाम की लड़की का किरदार निभाया था, जो दक्षिण भारत के गांव में रहती थी। इस फिल्म में अपने किरदार के साथ न्याय करने के लिए दीपिका ने तमिल सीखी थी। इतना ही नहीं उन्होंने तमिल लहज़े को भी बखूबी अपनाया था, जिसने उनके किरदार पर चार चांद लगा दिए थे। इस फिल्म के बाद दीपिका ने अपनी विवादों से घिरी फिल्म पद्मावत के लिए खूब मेहनत की थी। रानी पद्मावती का किरदार दीपिका ने जिस प्रकार निभाया, लोगों की बोलती बंद हो गई। इस फिल्म में रानी पद्मावती के किरदार में रमने के लिए उन्होंने राजस्थान की मेवाड़ी भाषा सीखी। इस भाषा को सीखने के बाद उन्होंने रानी पद्मावती के किरदार को बड़े परदे पर जीता जागता खड़ा कर दिया। इस फिल्म की वजह से सभी ने उनकी एक स्वर में प्रशंसा की। इस फिल्म के लिए शाहिद कपूर ने भी मेवाड़ी भाषा सीखी थी।

जान्हवी कपूर – धड़क

इस फिल्म में वे राजस्थान के रईस परिवार की इकलौती बेटी के रूप में नज़र आई थीं

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श्रीदेवी की बेटी जान्हवी कपूर ने फिल्म ‘धड़क’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म मराठी फिल्म सैराट की रीमेक है। इस फिल्म में अपने किरदार पार्थवी के लिए जान्हवी ने राजस्थानी सीखी। इस फिल्म में वे राजस्थान के रईस परिवार की इकलौती बेटी के रूप में नज़र आई थीं। इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म के दूसरे हिस्से के लिए बंगाली भी सीखी, क्योंकि फिल्म की कहानी के अनुसार पार्थवी को कोलकाता में दिखाया गया था।

कृति सेनन – बरेली की बर्फी

कृति सेनन की फिल्म बरेली की बर्फी एक सुपरहिट फिल्म रही है। इस फिल्म में कृति ने बरेली में रहने वाली बिट्टी शर्मा का किरदार निभाया था। इस किरदार में जान फूंकने के लिए कृति ने उत्तर प्रदेश की बोली और लहज़ा दोनों बखूबी सीखा। फिल्म में उनकी डायलॉग डिलीवरी के लिए लोगों से उन्हें काफी सराहना मिली। इस फिल्म में वे आयुष्मान खुराना और राजकुमार राव के साथ दिखाई दी थीं।

श्रद्धा कपूर – बत्ती गुल मीटर चालु

इस फिल्म के लिए श्रद्धा ने उत्तराखंड की ठेठ भाषा गढ़वाली सीखी थी

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शाहिद कपूर के साथ श्रद्धा कपूर की फिल्म बत्ती गुल मीटर चालू भले ही बड़े पर्दे पर ज़्यादा कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन इस फिल्म में श्रद्धा कपूर के किरदार ने लोगों का दिल जीत लिया। इस फिल्म में उत्तराखंड की कहानी बताई गई थी, जिसमें श्रद्धा कपूर का दमदार रोल था। इस फिल्म के लिए श्रद्धा ने उत्तराखंड की ठेठ भाषा गढ़वाली सीखी थी और अपने किरदार को निभाते हुए बेहतरीन रूप से डायलॉग डिलीवरी दी थी। इस फिल्म के लिए शाहिद ने भी गढ़वाली भाषा सीखी। हालांकि फिल्म के लिए कलाकारों द्वारा की गई यह मेहनत सराहनीय ज़रुर है, लेकिन फिल्म में इस भाषा का प्रयोग कुछ इस तरह किया गया था कि वह काफी कई जगहों पर काफी अटपटा लग रहा था।

ज़ाहिर है कि जब भी कलाकार अपने किरदार को रियल दिखाने के लिए स्थानीय भाषा से जुड़ते हैं, तो हमेशा बड़े परदे पर उनका किरदार दमदार तो होता ही है, वह और भी निखार कर सामने आता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..