जब बॉलीवुड में मांं का ज़िक्र आता है, तब हमें कई फिल्मों का ध्यान आता है, जिसमें मदर इंडिया, सीक्रेट सुपरस्टार जैसी फिल्में हमारे ज़हन में आती है। बॉलीवुड में मां को एक अलग ही जगह दी गई है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह ट्रेंड बदल कर नए रुप में सामने आ रहा है। अब बॉलीवुड में ऐसी फिल्में भी बन रही हैं, जो पिता के चरित्र की छोटी बड़ी बातों को लोगों के सामने बड़े पर्दे पर दिखाई जाती है। इस फादर्स डे पर हम आपको बॉलीवुड की कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताएंगे, जो पिताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।

102 नॉट आउट:

 

यह बात ज़ाहिर हो गई कि भले ही बेटा कितना भी बड़ा हो जाए, पिता हमेशा पिता रहता है

अमिताभ बच्चन ने हाल ही में 102 नॉट आउट फिल्म में 75 साल के बेटे के पिता का रोल निभाया था। इस फिल्म में ऋषि कपूर ने अमिताभ के बेटे का रोल निभाया था, जिसकी उम्र 75 साल होती है। इस फिल्म की कहानी भी कुछ ऐसी थी, जिसमें पिता की भूमिका को बेहद अच्छी तरह से दिखाया गया। इस फिल्म से यह बात ज़ाहिर हो गई कि भले ही बेटा कितना भी बड़ा हो जाए, पिता हमेशा पिता रहता है। इस फिल्म ने स्टीरियोटाइप पिता की इमेज से हटकर बाप बेटे के रिश्ते के नए नज़रिए को लोगों के सामने रखा।

दंगल:

महावीर फोगट के किरदार को आमिर खान ने फिल्म दंगल में निभाया है, जो एक फेमस रेसलर रह चुके हैं

मश्हूर महावीर फोगट एक ऐसे पिता है, जिन्होंने अपनी बेटियों को बेटों से कम नहीं समझा और उन्हें बेटो के स्तर पर लाकर खड़ा किया। इन्हीं महावीर फोगट के किरदार को आमिर खान ने फिल्म दंगल में निभाया है। उल्लेखनीय है कि महावीर फोगट एक फेमस रेसलर रह चुके हैं। यह फिल्म उन्हीं की ज़िंदगी पर आधारित थी। इस फिल्म में आमिर खान ने एक ऐसे पिता को लोगों के सामने पेश किया, जो लड़कियों को लड़कों से कम ना समझकर, उनके लिए कुछ भी कर गुुुज़रने को तैयार रहता है। वह अपनी बेटियों के लिए पिता भी है और गुरु भी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर आते ही लोगों का दिल जीत लिया था।

भूमि:

इस फिल्म में एक पिता के लिए अपनी बेटी का प्यार आसानी से देखा जा सकता था

संजय दत्त की कमबैक फिल्म भूमि एक ऐसी फिल्म थी, जिसने रेप जैसी बुराई के दुष्परिणामों को सामने रखा। इस फिल्म में संजय दत्त ने एक ऐसे पिता की भूमिका निभाई है, जो अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए पूरे प्रशासन से झगड़ा मोल ले लेता है और उन लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देता है, जिसने उसकी बेटी को नुकसान पहुंचाया। इस फिल्म में एक बेटी के लिए उसके पिता के प्यार को आसानी से देखा जा सकता था। संजय दत्त की यह फिल्म लोगों को बेहद पसंद आई।

वैसे तो फिल्मों में मां के किरदारों को देख कर लोग भावुक हो जाते हैं, लेकिन यह कुछ ऐसी फिल्में थी, जिसमें पिता के किरदारों ने भी लोगों की आंखों में आंसू ला दिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..