भारत विविधताओं और अजूबों का देश है, जहां इंसानों से लेकर वस्तुओं तक, हर चीज़ की पूजा की जाती है। अब तक आपने ऐसे मंदिरों के बारे में सुना होगा जहां सचिन तेंदुलकर और रजनीकांत की पूजा की जाती है, या फिर ऐसी जगह के बारे में जहां चूहों की पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है जहां रॉयल एनफील्ड बाइक को पूजा जाता है।

जोधपुर के पास चोटिला नामक एक छोटा सा गांव है। भारत के ज़्यादातर गांवों की तरह, यह भी एक साधारण सा गांव है। लेकिन इस गांव की ख़ास बात है कि यहां का एक ऐसा मंदिर जहां भारतीय देवताओं के बजाय एक रॉयल एनफील्ड बाइक को पूजा जाता है। गांव के लोग इस मंदिर को बुलेट बाबा मंदिर बुलाते हैं।

बुलेट बाबा मंदिर की कहानी

350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बाइक गांव के मुख्या के बेटे, ओम बन्ना की बाइक थी।

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साल 1991 में, गांव के मुख्य के बेटे, ओम सिंह राठौड़, जिन्हें लोग ओम बन्ना कहकर भी पुकारते थे, एक दिन अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड पर गांव में घूम रहे थे। रास्ते में वे बाइक पर अपना कंट्रोल खो बैठे और एक पेड़ से बुरी तरह टकरा गए। इस दुर्घटना में ओम सिंह राठौड़ की जान चली गई। उनकी बाइक भी पास की खाई में गिर गई थी। गांव की पुलिस ने बाइक को जब्त कर लिया था और उसे उसके निर्धारित स्थान पर रखा दिया था। हालांकि, अगले दिन जब वहां के लोग ओम सिंह की मृत्यु का शोक व्यक्त कर रहे थे, उन्होंने उसी रॉयल एनफील्ड बाइक को उस स्थान पर देखा जहां ओम सिंह की मृत्यु हुई थी। पुलिस और लोगों के लिए यह दृश्य चौंका देनेवाला था। पुलिस दोबारा उस बाइक को अपने साथ ले गयी और इस बार उन्होंने बाइक को चेन के साथ बांधकर उसके फ्यूल का टैंक खाली कर दिया। अगले दिन फिर से सभी ने बाइक को एक्सीडेंट के स्थान पर ही पाया। इसके बाद लोगों ने तय कर लिया कि वे इस बाइक के लिए एक मंदिर बनवाएंगे और उसकी पूजा करेंगे।

ये है बुलेट बाबा मंदिर जाने का रास्ता

मंदिर से करीब 51 किलोमीटर की दूरी जोधपुर एयरपोर्ट है । इसके बाद बुलेट बाबा मंदिर से 20 किलोमीटर दूर पाली रेलवे स्टेशन भी है। यदि आप सड़क के माध्यम से जाना चाहते हैं, तो आपको जोधपुर और पाली के बीच NH65 से आना होगा। यह मंदिर NH62 पर राजपुताना होटल के सामने स्थित है।

आप खुद इस मंदिर में जाकर रॉयल एनफील्ड बाइक का पूजन होते हुए देख सकते हैं। आप चाहें तो मंदिर में शराब की बोतलें चढ़ा सकते हैं या बाइक पर पवित्र धागा भी बांध सकते हैं। दरअसल, ऐसी आस्थाओं से हमें पता चलता है कि हमारा देश इतना विविध है कि यहां एक एनफील्ड की भी पूजा की जाती है।

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