आजकल मार्केट में नकली तेल की भरमार हो चली है। साथ ही रिफाइंड तेल को भी एक्सपर्ट्स सही नहीं मानते। इसके उपयोग से आजकल कई बीमारियां होने की संभावना जताई जा रही है। रिफाइंड तेल को डबल रिफाइन करने से इससे सारे पोषक तत्व निकल जाते हैं इसलिए इसे खाने से फायदे कम और नुकसान ज़्यादा होने लगे है। इससे आपके मन में यह विचार आता होगा कि रिफाइंड नहीं तो फिर कौन सा तेल डाइट में शामिल करें जो आपके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर न डाले । ऐसे में माना जाता है कि तिल का तेल सबसे अच्छे तेलों में से एक है। यह पोषण से भरा जाता है और स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर भी नहीं छोड़ता है। तिल का तेल विटामिन ई और विटामिन के का एक समृद्ध स्रोत है। यह तेल लोकप्रिय रूप से व्यंजनों में तो उपयोग किया जाता ही है, साथ ही मेडिसिनल उपयोग में भी लाया जाता है। यह कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में भी यूज किया जाने वाला एक लोकप्रिय इंग्रीडीएंट है। यह पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हो गया है, न केवल इसलिए कि यह अन्य वनस्पति तेलों में से एक स्वस्थ विकल्प है, बल्कि इसलिए भी कि यह औरों के मुकाबले सस्ता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, तिल के तेल को अपनी डाइट में शामिल करने के कुछ लाभ हैं जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

दिल के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है

डायटीशियन मंजरी ताम्रकार के मुताबिक, तिल के तेल में लगभग 82 प्रतिशत अन्सैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिनमें अन्सैचुरेटेड फैट होते हैं क्यों कि वो हृदय के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।इसमें ओमेगा -6 फैटी एसिड भी होता है, जो हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद करता है। 48 लोगों पर हाल ही में की गई एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग रोज़ाना चार चम्मच तिल के तेल का सेवन करते हैं, उनमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर काफी कम हो गया था।

डाइट में शामिल कीजिये तिल का तेल और उठाइए फायदे

ब्लड शुगर लेवल करे कम

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ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद करता है

तिल का तेल डायबिटीज रोगियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है क्योंकि यह हेल्दी ब्लड शुगर के लेवल को बनाए रखने में मदद कर सकता है। एक स्टडी में पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीज़ों ने 90 दिनों तक तिल के तेल का सेवन किया और वे हीमोग्लोबिन A1c के रूप में ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में सक्षम थे।

इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं

इन्फ्लिमेशन के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं । इसीलिए तिल के तेल जैसे कई खाद्य पदार्थों का सेवन करना महत्वपूर्ण होता है, जिनमें एंटी-इन्फ्लेमेट्री गुण होते हैं।एक स्टडी में पाया गया कि यह तेल नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को काफी कम कर देता है, जो इन्फ्लिमेशन को और उभारता है।

एंटीऑक्सिडेंट का समृद्ध स्रोत

दो बहुत शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट – सीसमोल और सेसमिनोल से मिलकर बना हुआ है। अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एंटीऑक्सिडेंट फ्री रेडिकल से बचाने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल इन्फ्लिमेशन को बढ़ा सकते हैं और पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं इसलिए तिल के तेल से सेवन से इनसे छुटकारा पाया जा सकता है। एक स्टडी के अनुसार, तिल का तेल हार्ट सेल्स को डैमेज से बचाने में मदद कर सकता है।

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