आंखों की रोशनी कमज़ोर होना एक आम बात है। यह एक ऐसी समस्या है जिस पर हमारा जोर नहीं चलता, बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या होना तो समझ आता है लेकिन यदि यही दिक्कत यंग एज में हो जाए तब? जी हां, इन दिनों कई ऐसे युवा हैं जो अपनी उम्र के पहले पड़ाव में ही आंखों की रोशनी कमज़ोर होने की समस्या से जूझ रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि नज़रें कमजोर होना एक ऐसी समस्या है जो सीधे तौर पर हमारी लाइफस्टाइल से भी जुड़ी हुई है। ख़राब लाइफस्टाइल और कुछ आदतें हमारी आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे कम करती रहती हैं और हमें पता भी नहीं चलता। आइए एक्सपर्ट्स से जानते हैं कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में जो जाने अनजाने हमारी आंखों की रोशनी को कमज़ोर कर देती हैं।

सनग्लासेस नहीं पहनना

भोपाल की डॉक्टर प्रेरणा उपध्याय के अनुसार, अधिकांश लोग घर से निकलते समय सनग्लासेस नहीं पहनते यह एक सामान्य सी बात है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी नज़रों को कमजोर बनाती है। जी हां, यह सच है, अक्सर हम में से कई लोग धूप में ऐसे ही निकल पड़ते हैं बिना यह सोचे कि इससे हमारी आंखों के ऊपर क्या असर पड़ेगा। आपको बता दें कि धूप में बिना सनग्लासेस के निकलने से अल्ट्रावायलेट किरणें सीधे हमारी आंखों पर पड़ती हैं, इसका बेहद बुरा असर हमारी आंखों पर पड़ता है और धीरे धीरे यह कमज़ोर होना शुरू हो जाती हैं।

लंबे समय तक कांटेक्ट लैंस लगाना

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगातार और लंबे समय तक कांटेक्ट लैंस पहने रहने से आंखों का इन्फेक्शन होने के चांसेज बढ़ जाते हैं। यह एक ऐसी आदत है जिसके बारे में जानते हुए भी अधिकांश लोग इसे रोज़ाना दोहराते हैं और नतीजा होता है आंखों की रोशनी का कम होना। इसलिए यदि आप भी कांटेक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं तो आज ही सतर्क हो जाएं।

आंखें मलना

थोड़ी-थोड़ी देर में आंखें मलना, आपने ऐसा करते हुए कई लोगों को देखा होगा या शायद आप भी ऐसा कई बार करते हों। तो ज़रा रुकिए, ऐसा करने से पहले यह भी जान लीजिये कि इससे आपकी आंखों को कितना नुकसान होता है। थोड़ी-थोड़ी देर में आंखें मलने से आपकी आंखों में ना सिर्फ कीटाणु और बैक्टीरिया फ़ैल जाते हैं, बल्कि इससे पुतली के डैमेज होने के चांसेज भी बढ़ जाते हैं। इसलिए अगली बार यदि आप ऐसा कुछ करने जा रहे हों तो सतर्क रहें।

स्मोकिंग

स्मोकिंग करना कई लोगों की आदत होती है। आपने अभी तक सुना होगा कि स्मोकिंग करने से हमारे फेफड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचता हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्मोकिंग से हमारी नज़रें भी कमजोर होती हैं। मेडिकल रिसर्च से इस बात की पुष्टि होती है कि स्मोकिंग करने से आंखों की पुतली पर बुरा असर पड़ता है। यही नहीं लंबे समय तक स्मोकिंग करना मोतियाबिंद का कारण भी बनता है।

यह कारण भी है गम्भीर

मोबाइल फोन बढ़ाए मुश्किल

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स्मार्टफ़ोन

लगातार फ़ोन पर नज़रें गड़ाए रहना, यह हम सबकी सबसे कॉमन आदतों में से एक है। आजकल की दौड़ भाग भरी ज़िन्दगी में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल इतना कॉमन है कि बिना इसके आप रह भी नहीं सकते। लेकिन यही मोबाइल फ़ोन आपकी आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे कमज़ोर बना देता है और आपको पता भी नहीं चलता। दरअसल, मोबाइल फ़ोन से निकलने वाली रेज़ आपकी आंखों की पुतली के लिए सही नहीं होती और लगातार लाइट पड़ने से आपकी नज़र कमज़ोर होती चली जाती है।

डॉक्टर से सलाह नहीं लेना

आंखों में छोटी-मोटी तकलीफ होने के बावजूद अधिकांश लोग घर में ही आंखों का इलाज कर लेते हैं। बिना डॉक्टर से सलाह लिए कई प्रकार की आई ड्रॉप्स डालते हैं जिनसे हमेशा इन्फेक्शन का ख़तरा बना रहता है। यही लापरवाही आगे चलकर हमारी आंखों की रोशनी कम कर देती है।

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