अब चाइना से निकलकर लल्लन की सवारी जापान आ पहुँची है। जापान तक पहुँच जाने के बाद भी, लल्लन अपनी माँ से बात नहीं कर पाया है। शुक्ला जी इतने ढीठ हैं कि अभी भी लल्लन को तड़पाते रहते हैं।