आज ग्रैंडपैरेंट्स डे के अवसर पर हम हमारे बुज़ुर्गों के जीवन से जुड़े एक अहम मुद्दे पर चर्चा करनेवाले है। ज़्यादातर बुज़ुर्ग रिटायरमेंट के बाद घर पर बैठ कर ऊब जाते हैं और बुढ़ापे में काम किये बिना अपनी ज़िन्दगी काटने में दिक्कत महसूस करते हैं। कई लोगों के लिए उनका काम, एक सैलरी देनेवाली नौकरी से भी कई ज़्यादा मायने रखता है। बहुत से लोगों के लिए उनका काम उन्हें खुशी देता है, जीवन में लक्ष्य देता है और पैसों के अलावा कामकाजी दुनिया के कई अन्य लाभ भी देता हैं।

अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करते रहें

रिटायरमेंट के बाद काम करने से आप ना केवल अपनी बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों से दूर रह सकते हैं, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से एक्टिव रहकर लम्बे समय तक युवा महसूस कर सकते हैं। साथ ही काम करने से आप लोगों से घुलते-मिलते हैं जिसके कारण आपको बुढ़ापे में कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होता है। काम करने से आपको अपना जीवन आगे जीने के लिए एक मकसद मिलता है।

वह काम करें जिसमे आपको मज़ा आए

अन्य लोगों की तरह हो सकता है कि आपको भी अपने रिटायरमेंट के बाद इसलिए काम करना हो, क्योंकि आपको अपनी नौकरी से बहुत प्यार है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि आप उसी क्षेत्र में अब एक अलग प्रकार का काम करना चाहे। फ़र्ज़ कीजिये कि आप कई सालों एक वेबसाइट के लिए काम करते आ रहे हैं। रिटायरमेंट से पहले आप डिज़ाइनिंग टीम में थे और अब आप उसी वेबसाइट के लिए डिज़ाइनिंग ना कर कंटेंट लिखना चाहते हैं। इस प्रकार के काम करें जिसमे आपको मज़ा भी आए और आपका समय भी आसानी से कट जाए।

क्या आप केवल पार्ट-टाइम जॉब करना चाहते हैं

जो लोग फुल-टाइम जॉब करते हैं, अक्सर उनकी पूरी ज़िन्दगी उनके जॉब के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। इस वजह से वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं। रिटायरमेंट के बाद यदि आप काम करते हुए अपना समय गुज़ारना चाहते हैं, तो आप कोई भी पार्ट-टाइम जॉब कर सकते हैं। पार्ट-टाइम जॉब का फायदा यह होगा कि आप अपने समय के अनुकूल काम कर सकेंगे और अपने तरीके से काम कर पाएंगे।

मान लीजिये कि आपकी दादी या नानी बहुत सालों तक एक स्कूल टीचर की नौकरी कर रही थी और रिटायर होने के बाद उन्होंने अपने टीचर होने का अनुभव किसी ड्रामा ग्रुप या अन्य आर्गेनाईजेशन में बच्चों को कला सीखाने के लिए इस्तेमाल किया। इससे वे जॉब खत्म होने के बाद भी बच्चों के करीब रहकर काम कर सकती हैं।

क्या आप नए प्रकार के काम करना चाहते हैं?

दूसरों को एक्सरसाइज़ करना सिखाएं
दूसरों को एक्सरसाइज़ करना सिखाएं

रिटायरमेंट के बाद जब आपको पेंशन मिलने लगती है, तो तनाव अपने आप कम हो जाता है। इसलिए अब आप वे काम कर सकते हैं जिनसे आपको प्यार है या जो आप हमेशा से करना चाहते थे। जैसे कोई नया कोर्स सीखना, अपना छोटा सा बिज़नस शुरू करना, सोशल सर्विस करना, छोटे बच्चों को पढ़ाना आदि। ये जॉब्स शायद पैसों के मामले में इतने फायदेमंद नहीं होंगे, लेकिन आपको ख़ुशी बहुत देंगे।

मुंबई के रहनेवाले मिस्टर शिनॉय आईटी सेक्टर में जॉब करते हुए रिटायर हुए थे। उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद स्कूल के बच्चों को वर्कशॉप्स, वन-डे क्लास और सेमिनार्स के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत और रामायण सिखाना शुरू कर दिया था। इससे उनका भी समय अच्छे से कटता था और बच्चों को भी बहुत कुछ सीखने मिलता था। मुंबई जैसी मेट्रो सिटी में बहुत सी जगहों पर सीनियर सिटिज़न्स को इस प्रकार का काम करते हुए देखा गया है।

क्या काम किये बिना रहना आपके लिए मुश्किल है?

जीवन भर काम करने के बाद कई रिटायर्ड लोगों में लिए अचानक से बिना काम किये बाकी का जीवन गुज़ारना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। पूरा जीवन प्रेज़ेंटेशन्स और टू-डू लिस्ट के इर्द-गिर्द बिताने के बाद जब रिटायरमेंट आता है, तो काम के बगैर रहना बहुत उबाऊ लगता है। यही कारण है कि ऐसे लोग अपने लिए छोटा-मोटा काम ढूंढ ही लेते हैं।

रिटायरमेंट के बाद काम करने के और भी बहुत से कारण होते हैं, जैसे आपको हेल्थ इंश्योरेंस या लाइफ इंश्योरेंस की ज़रूरत हो, आपकी सेविंग्स कम हो या आप ज़्यादा इंवेस्टमेंट्स करना चाहते हो आदि।

रिटायरमेंट के बाद काम करने से आपको एक उद्देश्य मिलता है, अपनी कम्युनिटी के लिए समय निकलने का मौक़ा मिलता है। इसलिए यदि आपकी इच्छा हो और आप बिज़ी रहना चाहते हैं, तो आपको रिटायरमेंट के बाद काम ज़रूर करना चाहिए।

अपने सपनो को पूरा करने की ताक़त रखती हूँ। अभिलाषी हूं और नई चीज़ों को सीखने की इच्छुक भी। एक फ्रीलान्स एंकर। मेरी आवाज़ ही नहीं, बल्कि लेखनी भी आपके मन को छू लेगी। डांसिंग और एक्टिंग की शौक़ीन। माँ की लाड़ली और खाने की दीवानी।