केरला और उत्तर प्रदेश तो आप ज़रूर घूमने गए होंगे और अगर अब तक नहीं घूमने गए हैं , तो आप घूमने वाली जगहों की लिस्ट में दो ऐसे गांवों को शामिल करना न भूलियेगा, जो एक खास वजह से सारी दुनिया में पहचान बना चुके है। दरअसल इन गांवों में सबसे ज़्यादा जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। अगर आप हमारी बातों पर यकीन नहीं करते, तो खुद वहां जाकर देख सकते हैं। आइए जानते हैं इन गावों के बारे में और जानिए कैसे जाया जा सकता है वहां ।

केरल का ये कोडिन्ही गांव

अरब सागर के तट से 18 किलोमीटर की दूरी पर केरल के मल्लापुरम जिले में बसा है कोडिन्ही गांव। इस इलाके की अपनी एक अलग पहचान है, यहां जुड़वां बच्चे पैदा होने का चलन आम है। नन्नाबरा पंचायत के इस इलाके में दशकों से जुड़वां बच्चे ही पैदा हो रहे हैं। और स्थानीय लोगों की मानें तो जुड़वां बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अगर आप वहां जाना चाहते हैं, तो यहां जाने के लिए ट्रैन और हवाई जहाज़ दोनों का सहारा ले सकते हैं। केरला से मल्लापुरम और मल्लापुरम से कोडिन्ही गांव जाने के लिए सरकारी बसों के अलावा आपको निज़ी वाहन भी आसानी से मिल जाएंगे। रहने और खाने की भी कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि यहां आपको मिलेंगे सस्ते लॉज और खाने के लिए मिलेगा केरला का पारंपरिक भोजन, इडली, डोसा, रसम सांभर।

विश्व स्तर पर हो चूका है चर्चित

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कोडिन्ही गांव एक मुस्लिम बहुल गाँव है, जिसकी आबादी करीब 2000 है।

Credits: jansamparklife.com

अपनी जुड़वां बच्चों की खूबी के चलते कोडिन्ही गांव विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो चूका है। विश्व के अधिकतर बड़े मीडिया हाउस यहां की स्टोरी को कवर कर चुके है। विदशों के कई वैज्ञानिक समय समय पर यहां शोध करने आते है। भारत सरकार ने भी एक स्थानीय डॉक्टर कृषणन श्री बीजू को इसके अध्ययन के लिए नियुक्त कर रखा है।

इलाहाबाद का मोहम्मदपुर उमरा गांव

संगम नगरी, इलाहाबाद विश्व में धार्मिक मान्यता के लिये ही नहीं, बल्कि एक आश्चर्यजनक तथ्य के लिये भी मशहूर है। यहां भी एक ऐसा गांव है जिसका नाम है मोहम्मदपुर उमरा, जहां हर दूसरे घर में जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। जानकार बताते है कि देश की आज़ादी के दौरान पहली बार यहां जुड़वा बहनें पैदा हुई थी, उसके बाद तो इस गांव का मिज़ाज ही बदल गया। हर दूसरे घर में लोगों के जुड़वां बेटी और बेटे होने लगे। लेकिन यह क्रम यहीं नहीं रूका। अब तो इस गांव में जानवर भी जुड़वां पैदा हो रहे हैं।

कारण अभी तक है अनजान

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अमरीका के ओहियो स्थित ट्विन्सबर्ग (Twinsburg ) में सालाना ट्विन्स फेस्टिवल आयोजित किया जाता है।

जुड़वां बच्चों के इस रहस्य को समझने के लिए देश-विदेश के कई डाक्टर और वैज्ञानिक रिसर्च करने आए, लोगो का ब्लड सैंपल लिया गया, पानी व मिट्टी के भी नमूने एकत्रित किये गये, लेकिन संगम नगरी के इस गांव में जुड़वां बच्चों के पैदा होने का रहस्य आज भी बना हुआ है। अगर आप उत्तर प्रदेश घूमने जाएं और आपकी इच्छा हो इस गांव को जानने की, तो आप ट्रैन, हवाई जहाज़ और रोड सेवा के ज़रिये यहां आसानी से पंहुच सकते हैं। यहां रहने के लिए बड़े बड़े होटल ना सही, लेकिन अच्छे और थोड़े सस्ते लॉज ज़रूर मिल जाएंगे। रही बात खाने की तो यहां आपको रोटी सब्जी से लेकर कचोरी, हलवा पूरी सब मिलेगा क्योंकि इलहाबाद अपने खाने के स्वाद के लिए भी जाना जाता है।

क्या होती है परेशानी

एक ही गांव में इतने ज़्यादा जुड़वां बच्चे होने से लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। खासकर स्कूल में, जहां की शिक्षकों का बच्चों में भेद कर पाना मुश्किल हो जाता है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या आती है नवविवाहित जोड़ो को, जिनको कुछ दिन तक तो ये ही समझ में नहीं आता है कि उनका जीवन साथी कौन सा है। एक और विशेष बात यह है की यदि इन जुड़वां बच्चों में कोई एक बीमार होता है,तो दूसरा भी अवश्य बीमार होता है इसलिए एक बच्चे के बीमार होने पर डॉक्टर दोनों बच्चों को दवाई देने को कहते है।

जुड़वां बच्चों के पीछे क्या रहस्य है इसका पता लगाना सबके लिए भले ही मुश्किल हो, लेकिन इस बात पर कोई शक नहीं की एक साथ कई सारे बच्चों को देखना दिलचस्प होगा।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।