नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क के लिए बेहद ज़रूरी मानी जाती है। इसका सीधा असर हमारे शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। यही वजह है कि ठीक समय पर सोना और उठना हमारे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हो जाता है। यदि आप अक्सर बुरे मूड में रहते हैं और लगातार चिड़चिड़ाहट महसूस करते हैं, तो हो सकता है कि इसका ताल्लुक आपकी नींद से हो। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह नींद की कमी आपका मूड बिगाड़ सकती है।

रिसर्च में हुआ खुलासा

कम नींद लेने वाले लोग छोटी-छोटी बातों पर इरिटेट हो सकते हैं
कम नींद लेने वाले लोग छोटी-छोटी बातों पर इरिटेट हो सकते हैं

Image Credit: rclinic.com.my

कई बार लोगों में इरिटेशन और मूड स्विंग्स के समस्या देखी जाती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं और समय के साथ इसे बढ़ता हुआ देख रहे हैं, तो आपको आपकी स्लीपिंग पैटर्न पर ध्यान देने की जरूरत है। यदि आपके सोने और जागने का समय सही ना हो, तो आपको मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है। दरअसल अमेरिका में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कम नींद लेने वाले लोग छोटी-छोटी बातों पर इरिटेट हो सकते हैं, साथ ही उन्हें मूड स्विंग की समस्या से भी जूझना पड़ता है। कम सोने वाले लोगों में डिप्रेशन के साथ-साथ एंज़ाइटी और घबराहट जैसी समस्याएं भी देखी जाती है।हालांकि नींद ना आने की समस्या को डिप्रेशन से जोड़ा जाता है। इसीलिए कम सोने की वजह से आपको डिप्रेशन भी हो सकता है, जिससे आपके मानसिक सेहत खराब हो सकती है।

संवेदनशील शरीर

पूरी नींद ना लेने से और भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।जिसमें सेंसेटिव बॉडी की समस्या भी जुड़ी हुई है। यदि आपकी बॉडी ज़रूरत से ज्यादा सेंसेटिव हो रही है, तो आपके सोने का इससे सीधा ताल्लुक हो सकता है। यदि आप लंबे समय तक सोने के रूटीन में बार-बार बदलाव करते हैं, तो शरीर की इम्युनिटी कमजोर होने लगती है और शरीर छोटी-छोटी समस्याओं के लिए संवेदनशील होता जाता है। इससे आपको मौसम के बदलाव के साथ आने वाली बीमारियां और संक्रमण घेर सकते हैं।

डायबिटीज़ का खतरा

सोने का समय यदि सही ना हो, तो आपको इनसोम्निया की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है
सोने का समय यदि सही ना हो, तो आपको इनसोम्निया की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है

Image Credit: purplecentre.com

आपको जानकर हैरानी होगी कि सही वक्त पर ना सोने से और निर्धारित घंटों की जरूरी नींद ना लेने से बॉडी में इन्सुलिन का स्तर बदलता रहता है, जिसकी वजह से आपको टाइप टू डायबिटीज़ का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में समय पर जागना और सोना आपके लिए बेहद ज़रूरी हो जाता है। साथ ही सोने का समय यदि सही ना हो, तो आपको इनसोम्निया की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है, जो आपको मानसिक समस्याओं की ओर लेकर जा सकता है।

नींद का समय ज़रूरी

यदि आप सोचते हैं कि रात की नींद को दोपहर में पूरा कर सकते हैं, तो आप गलत सोच रहे हैं। शरीर की एक प्राकृतिक बायलोजिकल क्लॉक होती है, जो शरीर की ज़रूरत के अनुसार बनी होती है। इसलिए रात की नींद आप दिन में पूरी नहीं कर सकते। इसीलिए रात में पूरी नींद लेना आपके लिए ज़रूरी हो जाता है।

यदि अगली बार आपके मूड में आपको उतार-चढ़ाव या अचानक बदलाव दिखे, तो आपको आपकी नींद का ध्यान रखना चाहिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..