दाल भारतीय भोजन का एक ऐसा हिस्सा है, जो सबसे ज़्यादा प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर होती है। यह दालें स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पचाने में भी बहुत आसान होती है। प्रोटीन के अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से दूर रखते हैं। दालें कई प्रकार की होती हैं और इन्हें पकाने के तरीके भी अलग-अलग होते हैं। इन दालों के हिंदी नाम तो आप जानते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि इन दालों को अंग्रेजी में किन नामों से जाना जाता है? यदि नहीं, तो आज हम आपको इन दालों के अंग्रेजी नामों और उनसे होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे।

अरहर की दाल- स्प्लिट रेड ग्राम

दालों में सबसे उत्तम होती है तुअर दाल
दालों में सबसे उत्तम होती है तुअर दाल

अरहर की दाल को दालों का राजा कहा जाता है। इसे कई लोग तुअर दाल के नाम से भी जानते है। इसे अंग्रेजी में स्प्लिट रेड ग्राम कहा जाता है। इसमें प्रोटीन ,पोटैशियम, सोडियम, विटामिन ए, बी, विटामिन 12 और कार्बोहायड्रेट जैसे पोषक तत्व होते हैं।

मसूर दाल- रेड लेनटिल्स

फायबर और प्रोटीन का खज़ाना होती है मसूर दाल
फायबर और प्रोटीन का खज़ाना होती है मसूर दाल

मसूर दाल अंग्रेजी में रेड लेनटिल्स के नाम से जानी जाती है, इसका कारण है कि ये लाल रंग की होती है। यह दाल फाइबर और प्रोटीन का खज़ाना है। इस दाल के सेवन से पेट और पाचन सम्बन्धित सभी रोग दूर हो जाते हैं। इस दाल का अगर सूप बना कर पीया जाये, तो गले और आंतो के भी सभी रोग दूर हो सकते हैं। जिन लोगों में खून की कमी होती है, उनके लिए मसूर दाल का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। लाल मसूर दाल के अलावा आप मसूर यानी लेंटिल और मलका मसूर यानी होल रेड लेंटिल भी खा सकते हैं। ये भी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती है।

उड़द दाल- स्प्लिट ब्लैक ग्राम

शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाती है उड़द की दाल
शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाती है उड़द की दाल

दालों की महारानी उड़द दाल सफेद और काली दो प्रकार की होती है। अंग्रेजी में काली उड़द दाल को स्प्लिट ब्लैक ग्राम और सफ़ेद उड़द दाल को वाइट लेंटिल कहते हैं। सबसे ज़्यादा उड़द दाल साउथ एशिया में खाई जाती है। उड़द सबसे पौष्टिक दालों में से एक मानी जाती है। अन्य दालों के मुकाबले इसे खाने से शरीर को ज़्यादा शक्ति मिलती है। उड़द दाल में प्रोटीन, विटामिन बी, थायमीन, नियासिन, विटामिन सी, आयरन, कैल्‍शियम, फाइबर और स्‍टार्च पाया जाता है। ख़ास कर काली उड़द दाल में भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्स होते हैं। जिन लोगों की पाचन शक्ति अच्छी होती है, वे यदि इस दाल का सेवन करें, तो उनके शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ती है। इसके अलावा अपच, कब्ज़ और बवासीर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी रोज़ाना उड़द दाल का सेवन करना चाहिए।

चौली – काऊपी

चौली को अंग्रेजी में कहते हैं काऊपी
चौली को अंग्रेजी में कहते हैं काऊपी

चौली जिसे लोबिया दाल भी कहते हैं, वह बहुत स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। अंग्रेजी में लोबिया दाल के बहुत से नाम हैं, जैसे अलूबिया, ब्लैक आइड बीन्स, ब्लैक आइड पीज़ और काऊपी। बढ़ते बच्चों के लिए यह दाल बहुत फायदेमंद होती है। इसे बनाना बेहद आसान होता है। लोबिया में प्रोटीन, पोटैशियम मैग्नीशियम, कॉपर, फाइबर, विटामिन ए, बी12, डी और कैल्शियम भारी मात्रा में पाए जाते हैं। लोबिया में मौजूद काले रंग के स्पॉट्स एंटी ऑक्सीडेंट का काम करते हैं जो शरीर को कैंसर, डायबिटीज़ और बढ़ते वज़न जैसी बीमारियों से बचाते हैं।

पीली मूंग दाल – येल्लो मूंग दाल

बनाने और पचाने में आसान पीली मूंग दाल सबको पसंद आती है
बनाने और पचाने में आसान पीली मूंग दाल सबको पसंद आती है

मूंग दाल वैसे तो दो प्रकार की होती है, हरी और पीली। धुली और छिली हुई मूंग दाल पीले रंग की होती हैं। मूंग की इस पीले दाल को अंग्रेजी में लोग सक्किन्ड दाल अथवा स्प्लिट येलो ग्राम कहते हैं। यह पकाने और पचाने में आसान होती है। बीमार लोगों के लिए पीली मूंग दाल बहुत फायदेमंद होती है। दाल के साथ-साथ इसका सूप भी पिया जा सकता है। भारत में ज्यादातर लोग इसे रोटी और चावल के साथ खाते हैं। इस में प्रोटीन, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन बी कॉम्पलेक्स और फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है। इसमें मौजूद फाइबर शरीर के बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। बीमारी में इस दाल का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है।

हरी मूंग दाल – स्प्लिट ग्रीन ग्राम

हरी मूंग दाल
हरी मूंग दाल

यह छिलकेवाली मूंग दाल हरे रंग की होती है, इसलिए इसे अंग्रेजी में स्प्लिट ग्रीन ग्राम के नाम से जाना जाता है। इसका स्वाद थोड़ा सा मीठा होता है और यह पचाने में आसान होती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स सी, ई, के, बी6, फोलेट, नियासिन, थियामिन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज़, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जिंक जैसे पोषक तत्त्व होते हैं। चावल और मूंग दाल की खिचड़ी खाने से कब्ज़ दूर होता है | कैंसर और टायफॉयड रोगियों को तो मूंग दाल ज़रूर खानी चाहिए। मूंग दाल को छिलके सहित खाना चाहिए |

चना दाल – स्प्लिट चिकपी

चना दाल असल में बनती है काले चने से
चना दाल असल में बनती है काले चने से

स्प्लिट चीखपी यानी चना दाल बिलकुल मकई के दानों की तरह दिखती हैं। काले चनों को दो टुकड़ों में तोड़कर उन्हें पॉलिश करके चना दाल तैयार की जाती है। लजीज और पौष्टिक होने के साथ ही यह पचाने में भी आसान होती है। खाने के अलावा खूबसूरती बढ़ाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। चना दाल पीसकर ही बेसन भी बनाया जाता है। चना दाल में प्रोटीन, जिंक, फोलेट, कैल्शियम और फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है। स्वादिष्ट होने के साथ ही इसमें ग्लाइसमिक इंडेक्स होता है जो डायबिटीज़ रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके सेवन से एनीमिया, कब्ज़, पीलिया, डिसेप्सिया, उल्टी और बालों के गिरने की समस्या दूर होती है।

ये थी स्वादिष्ट और पौष्टिक दालों के अंग्रेजी नाम और इन दालों के सेवन से होनेवाले फायदें। तो, यदि आपको ऐसा लगे की इन्हे खाने से आपके शरीर को फायदा हो सकता है तो इनका सेवन ज़रूर करें।

अपने सपनो को पूरा करने की ताक़त रखती हूँ। अभिलाषी हूं और नई चीज़ों को सीखने की इच्छुक भी। एक फ्रीलान्स एंकर। मेरी आवाज़ ही नहीं, बल्कि लेखनी भी आपके मन को छू लेगी। डांसिंग और एक्टिंग की शौक़ीन। माँ की लाड़ली और खाने की दीवानी।