आपने मसाला रोटी, मिस्सी रोटी, कुलचा, नान, तंदूरी रोटी जैसी कई रोटियां खाई होंगी, लेकिन क्या आपने कभी डिब्बा रोटी खाई है? डिब्बा रोटी, जो दक्षिण भारत में बड़े चाव से खायी जाती है, इसका स्वाद बेहद अनोखा होता है। यदि हम बात करें आंध्र प्रदेश की, तो इस रोटी को शाम के नाश्ते में और ब्रेकफास्ट में खाना पसंद करते हैं। इस रोटी को बनाने की विधि भी अन्य रोटियों से बिलकुल हटकर है। ज़ाहिर है इसका नाम भी अलग हटकर रखा गया है। डिब्बा रोटी को दक्षिण भारत में मिनापा रोटी के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे बनाएं डिब्बा रोटी?

इस रोटी को बनाने की विधि भी अन्य रोटियों से बिलकुल हटकर है

डिब्बा रोटी बनाना आम रोटियों की तरह आसान नहीं है, लेकिन इसका स्वाद चखने के बाद आप मेहनत करने से नहीं करताएंगे। इस रोटी को बनाने के लिए आपको 3 कटोरी उड़द दाल को आधे घंटे तक भिगोकर रखना होगा। इसके बाद इसे महीन पीस लीजिये। इस दाल में आपको 2 कप सूजी, रोस्टेड जीरा और नमक मिलाकर इसे आधे घंटे के लिए रख दें

अब मोटे तलेवाली कढ़ाई में तेल डालकर इसे गर्म करें और दाल के मिश्रण को अच्छी तरह से 2 इंच की मोटाई रखते हुए फैला लें। अब कढ़ाई को ढक्कन से 2 मिनट तक ढंक दें।

इसके बाद ढक्कन को हटाकर इसे दूसरी ओर से भी सेंक लें। और गैस बंद कर उतार लें। इस पर हरी धनिया छिड़क कर गरमा गर्म सर्व करें। यदि आप चाहें तो इसके मिश्रण में सब्ज़िया भी मिला सकते हैं, जिससे ये खाने में और भी हेल्दी बन जाएगी।

क्या हैं मिनापा रोटी के फायदे?

एक कटोरी उड़द दाल खाने के बाद आप कई घंटों के लिए ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं
जैसा कि आप सभी जानते हैं मिनापा या डिब्बा रोटी उड़द दाल से बनाई जाती है, जिसे खाने से आपके शरीर को कई फायदे हो सकते है। उड़द दाल में भरपूर मात्रा में मैग्नेशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और आयरन होता है, जिससे शरीर को पोषण मिलता है। उड़द की दाल खाने से पेट सम्बन्धी सम्याओं में भी आराम मिलता है। खास तौर पर महिलाओं में यूटीआई जैसी समस्या में उड़द की दाल का सेवन अच्छा माना जाता है।
इसके अलावा उड़द दाल खाने से आपको दिन भर के लिए ऊर्जा मिलती है। एक कटोरी उड़द दाल खाने के बाद आप कई घंटों के लिए ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं। यह रोटी खाने में बेहद फ्लफी और मुलायम होती है, जिसका आकर किसी केक की तरह होता है। यदि आप घर पर इस वीकेंड इसे बनाना चाहते हैं, तो ये डिश आपके परिवार को बेहद पसंद आएगी।
मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..